00:00एक बादशाह गुलाम के साथ कष्टी में बैठा था। गुलाम ने इससे पहले कभी दरिया ना देखा था। कष्टी का सफर भी नहीं किया था। उसके जिस्म में कप-कपी शुरू हो गई। डर के मारे उसने रोना-धोना शुरू कर दिया। उसके इस रवये पर बादशा
00:30होगी। उस दाना के इशारे पर मुलाजिमों ने घुलाम को दरिया में फेंग दिया। जब वह चंद गौते खा चुका तो उसके बालों को पकड़ कर कष्टी की तरफ ले आए। उसने कष्टी के पिछले हिस्से को दोनों हाथों से पकड़ लिया और फिर कष्टी के एक
01:00वहीं जान सकता है जो मुसीबत जहेल चुका हो।
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