00:00किसी राजा की सिर्फ एक ही बेटी थी वह बहुत जिद्धी थी एक दिन सुभा को वह बाग में टहलने गई तो उसने फूलों की पत्तियों पर शबन के बूंदों को चमकते हुए देखा
00:16शबन के ये बूंदे उन हीरों से ज्यादा चमकदार और सुन्दर थे जो राजकुमारी के पास थे राजकुमारी सीधे महल में वापस आई और राजा से कहने लगी
00:29मुझे शबन का एक ताज बनवा दीजिए जब तक मुझे ताज नहीं मिलेगा मैं ना कुछ खाऊंगी और ना पीऊंगी यह कहकर राजकुमारी ने अपना कमरा बंद कर लिया और चादर ओड़ कर पलंग पर लेट गई
00:45राजा जानता था कि शबन के बूंदों से ताज नहीं बनाया जा सकता
00:50फिर भी उसने राजकुमारी की जित पूरी करने के लिए शहर के सभी स्नानघरों को बुलवाया
00:57और उनसे कहा कि तीन दिनों के अंदर शबन्म के बून्दों का ताज बना कर पेश करो, वरना तुम्हें कठोर सजा दी जाएगी।
01:06बेचारे स्नानघर हैरान परेशान थे कि शबन्म का ताज कैसे बनाएं।
01:11उन स्नानघरों में एक बुढ़ा स्नानघर बहुत बुद्धिमान था।
01:17सोचते सोचते उसके दिमाग में एक तरक आया।
01:21वह दूसरे दिन सुबह महल के दरवाजे पर गया और सिपाहियों से कहा कि वह राजकुमारी का ताज बनाने आया है।
01:29शिपाही उसे राजकुमारी के पास ले गए। बुरे स्नानघर ने राजकुमारी को जुख कर सलाम किया और बोला मैं आपका ताज बनाने के लिए आया हूँ।
01:42लेकिन मेरी एक छोटी सी दर्खास्त है। कहो क्या कहना चाहते हो।
01:48राजकुमारी ने कहा, स्नानघर बोला आप बाग में चलकर मुझे शबन के वह बून्दे दे दीजिए जिनका आप ताज बनवाना चाहती हैं।
02:00जो बून्दे आप पसंद करके मुझे देंगी। मैं तुरंत उनका ताज बना दूंगा।
02:06राजकुमारी स्नानघर के साथ बाग में गई। फूलों और पत्तियों पर शबन के बून्दे जगमगा रहे थे।
02:16लेकिन राजकुमारी ने जिस बून्दे को भी छुआ वह उसकी अंगुलियों पर पानी की तरह बहा गई।
02:22तब राजकुमारी क्षमाय आचना करते हुए बुडे स्नानघर से माफी मांगी और वादा किया कि वह अब कभी ऐसी जिद नहीं करेगी।