00:00900 साल पुराना श्रापिक मंदिर जहां रात धलते ही इनसान बन जाता है पत्थर
00:06राजस्थान की तप्ती रेट में छिपा है एक ऐसा रहस्य जिसने सदियों से इनसानों की जुबान सी दी है
00:14एक ऐसा रहस्य जिसे सुनकर ही आत्मा काप उठती है
00:19और अगर कोई वहां रात में चला जाए तो उसकी चीखें सिर्फ पत्थर की दीवारों से टक्रा कर लोटती है फिर कभी वापस नहीं आती
00:29यह कहानी है बाडमेर जिले के हाथ मागाओं में स्थित किराडू मंदिर की
00:36एक ऐसा मंदिर जो देखने में जितना सुन्दर है उतना ही खतरनाक और भयावर
00:42इसे राजस्थान का खजुराहों भी कहा जाता है लेकिन इस खजुराहों में प्रेन नहीं सिर्फ श्राप है
00:50और पत्थर बनते इंसानों की अनकही चीखें
00:55ज्यारहवी शताबदी में परमार वंश द्वारा निर्मित यह मंदिर वास्तुकला की अध्भुत मिसाल है
01:02पत्थर की जटिल नकाशिया, देवी देवताओं की मूर्तिया और प्राचीन सभ्यता के चिनह इस मंदिर की दीवारों में सांस लेते हैं
01:12पर इन दीवारों में सिर्फ इतिहास नहीं, हजारों आत्माओं की कराह भी बसी हुई है
01:21कभी यहां पाँच मंदिरों की श्रिंखला थी, पर समय और भूकम्प ने उन्हें निगल लिया
01:28आज सिर्फ दो मंदिर बचे हैं, एक भगवान शिव का और दूसरा विश्णु का
01:35पर इन मूर्तियों की आखों में जो दर्ध है, उसे कोई देख नहीं सकता
01:40सिवाए उन लोगों के, जिन्होंने शाम धलने के बाद इस मंदिर के प्रांगण में कदम रखा हो
01:47900 साल पहले की बात है
01:51एक दिव्य साधू अपने शिश्यों के साथ किराडू आए
01:55वहाँ उन्होंने कुछ समय व्यतीत किया, तब ध्यान और पूजा की
02:00लेकिन एक दिन अचानक साधू अपने शिश्यों को बिना बताए कहीं चले गए
02:06साधू के जाते ही शिश्य बीमार पढ़ने लगे
02:10उनकी हालत दिन बदिन खराब होती चली गई
02:14गाओं के लोगों ने उनकी तरफ आख उठा कर भी नहीं देखा
02:19भूख प्यास और बुखार में तडपते शिश्यों की देख भाल केवल एक कुमहारिन नेकी निस्वार्थ बिना किसी भैके
02:27कुछ समय बाद साधू वापस लोटे और जब उन्होंने अपने शिश्यों की हालत देखी
02:35तो उनके नेत्र क्रोध से लाल हो गए
02:38उन्होंने गाव वालों से कहा
02:41जहां करुणा नहीं वहां मानवता नहीं
02:45और जहां मानवता नहीं वहां जीवन नहीं
02:49उन्होंने गगनभेदी आवाज में श्राप दिया
02:53इस गाव के हर प्राणी को पत्थर में बदल दूँगा
02:57ताकि ये दर्ध हमेशा के लिए अमर हो जाए
03:00और देखते ही देखते पूरा गाव पत्थर में बदल गया
03:05लोग चीखते रहे, बिलखते रहे, मगर किसी की आवाज नहीं निकली
03:11मंदिर की दिवारें आज भी उन चीखों को अपने भीतर दबाए बैठी है
03:16केवल एक इनसान को उन्होंने श्राप से बचाया, वही कुमहारिन
03:23उसे आदेश दिया गया कि वह सूर्यास्ट से पहले गाव छोड़ दे
03:28और कभी पीछे मुड़ कर न देखे
03:30लेकिन इनसान की फितरत होती है भूल करना
03:36जैसे ही वह गाव की सीमा पार कर रही थी
03:40किसी अंजानी शक्ती ने उसे पीछे देखने पर मजबूर कर दिया
03:45और उसी क्षन उसका शरीर पत्थर की मूर्ती में बदल गया
03:50आज भी वह पत्थर की बनी कुमहारिन की मूर्ती पास के गाव में मौजूद है
03:56अकेली, शांत और शापित
03:58किराडू मंदिर में सूरियास्त के बाद कोई नहीं जाता
04:03रात होते ही वहां का माहौल बदल जाता है
04:07हवा की सायसाय करती आवाज अचानक रुख जाती है
04:12मंदिर की दिवारों पर किसी की परचाया दिखती है
04:16मानो पत्थर में बदल चुके लोग रात को जीवित होकर मंदिर में घुमते हूँ
04:21स्थानिय लोगों का कहना है कि कई बार रात को मंदिर से पकपक की आवास
04:28किसी स्त्री के रोने की चीख और पत्थर घिसने की खर्खर सुनाई देती है
04:33एक बार एक विदेशी पर्यटक ने वहां रात बिताने की कोशिश की अगली सुभा वो नहीं मिला
04:40सिर्फ उसके कैमरे की रील मिली जिसमें अंतिम तस्वीर थी एक अधूरी मूर्ती
04:46जिसके चहरे पर डर की चीख जमी थी
04:50एसाई भारतिय पुरातत्व सर्वेक्षन ने अभी तक इस श्राप की कोई आधिकारिक पुष्टी नहीं की है
04:58लेकिन वो यह भी नहीं बता पाए कि रात में वहां कौन घूमता है
05:02या पत्थर की कुछ मूर्तियों की आखें गीली क्यों दिखती है
05:06कुछ वैज्यानिकों ने दावा किया कि यह बस एक मिठक है
05:12पर फिर एक वैज्यानिक डल जो वहां रात्री परीक्षन के लिए रुका था आज भी लापता है
05:20उनके उपकरण मिले पर वे नहीं
05:23यह विज्यान का युग है
05:27हम तारों तक पहुँच गए
05:30लेकिन आस्था और श्राप जैसे विश्यों को आज भी कोई नहीं समझ पाया
05:35जो लोग उस मंदिर में रात बिता कर लोटे
05:38उन्होंने कभी कुछ कहा नहीं
05:41और जिन्होंने कुछ कहा
05:43उनके शब्द बस कापती जुबान से निकले फुस्फुसाते बाक्य थे
05:47हम अकेले नहीं थे वहाँ
05:51कोई था
05:52जो देख रहा था
05:54बहुत करीट से
05:56तो अगर आप कभी राजस्थान जाएं
06:00और कोई आपको कहे कि किराडू मंदिर चलो
06:03रात को
06:05तो बस इतना कहना
06:07मैं इनसान हूँ
06:09पत्थर नहीं बनना चाहता
06:12900 साल पुराना श्रापिक मंदिर भाग दो पत्थरों की चीखें
06:18वर्तमान समय
06:20ये सब बकवास है यार
06:24कोई इनसान पत्थर कैसे बन सकता है
06:26अर्जुन एक प्रसिद्ध यूट्यूग घोस्ट एकसपलोरर
06:31राजस्थान के किराडू मंदिर की सच्चाई जानने की जिद पर अड़ा हुआ था
06:36उसके साथ उसकी टीन थी
06:39सिया उसकी गर्लफ्रेंड और साउंड रिकॉर्डिस्ट
06:42राहुल कैमरा ओपरेटर और नील जो पुरानी हस्तियों और मंदिरों पर रिसर्च करता था
06:48सभी ने मंदिर के बारे में सुना था
06:52लेकिन कोई भी उस पर यकीन नहीं करता था
06:55अगर वहां कुछ है तो ये हमारी अब तक की सबसे डरावनी वीडियो होगी
07:01यही सोच कर उन्होंने वहां रात बिताने का फैसला किया
07:05वे लोग शाम छे बजे मंदिर पहुँचे
07:10आस्मान नारंगी से खून जैसा लाल होने लगा था
07:14आसपास कोई नहीं था
07:17सन्नाटा इतना गहरा था कि खुद की सासे भी भारी लग रही थी
07:22जैसे ही उन्होंने कैमरे आउन किये
07:26अचानक मंदिर के मुख्यद्वार की मूर्ती की आखों से एक बूंद पानी गिरा
07:31क्या ये?
07:34पसीना है?
07:36सिया ने कापती आवाज में पूछा
07:38नील ने कहा ये संभव नहीं
07:42ये सिर्फ मूर्ती है
07:44मगर तभी
07:47मंदिर के अंदर से किसी स्त्री की धीनी हसी गुंजी
07:52इतनी थंडी और खोखली की दिल की धड़कने थमसी गई
07:56कौन है वहा?
08:00अरजुन ने चिल्ला कर पूछा
08:01कोई जवाब नहीं आया
08:05बस मंदिर की दीवारों पर से पत्थर गिरने की गुंजती आवाजें आने लगी
08:10मानो कोई बहुत भारी चल रहा हो
08:13धीरे धीरे
08:15उनके पास
08:16नील ने मंदिर की पिछली दीवारों पर एक प्राचीन शिला लेख देखा
08:22जिसमें कुछ संस्कृत में लिखा था
08:25शापित नगर की आत्माए जीवित है
08:29जब कोई उनका दर्द सुनने आये
08:32तो वो अपनी कहानी बताती है
08:34और फिर उसे अपनी दुनिया में खीच लेती है
08:39इससे पहले की वे कुछ समझ पाते
08:43कैमरे में अजीब आकरितिया दिखने लगी
08:46इनसानों की आकरितिया
08:48मगर चहरे अधूरे
08:50आखे काली और गहरी
08:53बिना पलके जपकाए कैमरे की ओर घूरती
08:56ये
08:58ये लाइव फीड है
09:01राहुल चिलाया
09:03लेकिन वहां कोई नहीं था
09:06सिया अचानक मंदिर की एक तरफ की मूर्ती के पास चली गई
09:11वही कुमहारिन की मूर्ती
09:13इसकी आखें
09:16खिल रही है
09:17वह बुदबुदाई
09:20अर्जुन भाग कर उसके पास गया
09:23मगर जब वह पहुँचा
09:25सिया पत्थर की मूर्ती बन चुकी थी
09:28आखें फैली हुई
09:30पोट कापते हुए
09:31जैसे मरते समय चीखने की कोशिश कर रही हो
09:34नहीं
09:36सिया
09:38अर्जुन चिल लाया
09:40राहुल और नी भागने लगे
09:43मगर मंदिर के द्वार खुद बखुद बंध हो चुके थे
09:47और तभी
09:50मंदिर के हर कोने से एक एक पथर गिरने लगा
09:54और उनमें से निकलने लगे पथर बने इनसानों के भूत
09:58उनके चहरों पर पीडा, शरीर पर घ्व और आखों में नफ्रत थी
10:04क्यों आए हो
10:07हमारी पीडा देखने
10:10अब रहो हमारे साथ
10:12सदा के लिए
10:13उनकी हड्या चटकती थी, मोह से राख निकलती थी, और जैसे जैसे वे पास आ रहे थे, राहुल की सासे अटकने लगी
10:23उसने भागने की कोशिश की, लेकिन उसका पैर किसी पत्थर की जड़ में फस गया
10:30और देखते ही देखते, उसका पूरा शरीर पत्थर में बदल गया
10:35अब सिर्फ अर्जुन और नील बचे थे
10:39नील ने कापते हुए मंत्र पढ़ने की कोशिश की, पर शब्द गड़ बढ़ा गए
10:45तभी मंदिर के बीचों बीच एक और आकरती प्रकट हुई, वह साधू
10:50तुम लोगों ने फिर से हमारी नीन तोड़ी, अब तुम कभी नहीं जागोगे
10:57अर्जुन ने कैमरा उठाया और भागने की कोशिश की, पर नील की चीक उसके पीछे गुंच गई
11:05वो मेरी आखों में घुस रहा है अर्जुन, वो मुझे देख रहा है
11:13अगली सुभा गाव वालों ने मंदिर के बाहर एक नया कैमरा पड़ा देखा
11:20जब कैमरे की रिकॉर्डिंग चलाई गई, उसमें सिर्फ अंतिन फ्रेम था एक नई पत्थर की मूर्ती
11:28जो बिलकुल अर्जुन जैसी दिखती थी
11:31आज भी अगर कोई मंदिर जाता है तो मंदिर की पिछली दीवार पर अर्जुन, सिया, राहुल और नील की चार पत्थर की मूर्तिया खड़ी हैं
11:42जिनके चहरों पर डर, पच्चतावा और चीखें जमी हुई हैं
11:46कभी अगर आप किराडू जाएं और सूरज धलने लगें तो किसी भी हालत में पीछे मुर कर मत देखिए
11:57क्योंकि हो सकता है
11:59कोई पत्थर की मूर्ति आपको घूर रही हो और बस इंतजार कर रही हो कि आप भी
12:07उसका हिस्सा बन जाएं
12:10हमेशा के लिए भाग तीन पत्थर की दुनिया अंतिम शाप
12:16दो महीने बाद
12:18एक प्रसिद्ध खोजी पत्रकार अनन्या रावत ने सुर्खियों में खबर देखी
12:24चार यूट्यूबर्स किराडू मंदिर में लापता कैमरा बरामत पर फुटेज इतनी डरावनी की पुलिस भी हिल गई
12:32अनन्या को यकीन नहीं हुआ
12:36ये वही मंदिर था जिसकी कहानिया बचपन में उसकी दादी सुनाया करती थी
12:42शाम धले वहां मत जाना बिटिया
12:45वो लोग अब भी वहां सांस लेते हैं बस पत्थर की खाल में छुपे हुए
12:51अनन्या ने ठान लिया मैं इस रहस्य से परदा हटाऊंगी
12:56उसने एक एक्सपर्ट टीम बनाई
13:00डॉक्तर आदित्यगोश पुरातत्वविद
13:04नेराप मिस्टिक एनरजी स्पेशिलिस्ट
13:07और रगुवीर एक ग्रामीन जो कभी मंदिर के पास रह चुका था
13:12वे शाम धलते ही मंदिर पहुँचे
13:16सन्नाटा इतना गहरा था कि जैसे हवा भी वहां दम घोट कर मर चुकी हो
13:22दॉक्तर घोश ने एक प्राचीन शिलालेख पर ध्यान दिया
13:28उस पर लिखा था
13:30जिनकी आत्माए अधूरी रह गई वो पत्थर के भीतर सोती है
13:36पर जब कोई उनकी पीडा समझ ले
13:40वो जागती है
13:42नेरा ने कहा यह मंदिर सिर्फ एक इमारत नहीं
13:48ये एक कब्रगर है
13:50जीवित कब्रग
13:52मंदिर के अंदर घुसते ही उन्होंने महसूस किया कि हवा भारी होती जा रही है
13:59मानू सैक्रों आखें एक साथ उन्हें घूर रही हो
14:04रगुवीर चिलाया ये मूर्तिया हिल रही है
14:08मैंने देखा
14:11उस औरत की मूर्ति ने पलक जपकाई है
14:14अनन्या ने कैमरा उठाया और मूर्तियों को जूम किया
14:20और वो चीख पड़ी
14:22एक मूर्ति धीरे धीरे मुस्कुरा रही थी
14:26नीरा ने ध्यान लगाया और मंदिर के केंडर में बैठे एक साधू की मूर्ति को निहारा
14:33उसने कापती आवाज में कहा
14:37वो मूर्ति नहीं
14:39वो अब भी जिन्दा है
14:43यही वो साधू है जिसने शाप दिया था
14:46उसकी आत्मा पत्थर में फंसी नहीं
14:50वो पत्थरों के जरिये जिन्दा है
14:52तभी साधू की आखें खुल गई
14:56सुलकती हुई लाल आखें
15:00और वो बोले, फिर कोई आया, हमारी पीडा समझने, अब तुम हमारी दुनिया में आओ, मंदिर की छत कामपने लगी, दीवारों से खून बहने लगा, रगुवीर की चीख गुंजी, मेरे हाथ ये पत्थर बन रहे हैं, मेरी आखें जल रही हैं,
15:26कुछ ही क्षणों में वो भी एक मूर्ती बन गया, उसकी आखों से आसू बह रहे थे, जो धीरे धीरे खून में बदलते गए, और फिर पत्थर में जमे रह गए,
15:39नीरा ने भगवद गीता का पाठ शुरू किया, लेकिन हर मंत्र के बाद मंदिर और गुंजने लगा,
15:47शब्ध हमें नहीं रोक सकते, हमने इश्वर को भी पत्थर कर दिया था, तभी सारी मूर्तिया हिलने लगी, जैसे मंदिर अब चलने लगा हो,
16:00अनन्या और डॉक्तर घोश भागते हुए उस जगह पहुँचे जहासिया, अर्जुन और बाकी मूर्तिया खड़ी थी,
16:09उन मूर्तियों की आखों से आसु बह रहे थे, और वे होठोन से बोल रही थी, बिना आवाज के,
16:18घोश ने एक मंत्र बोला और मंदिर की सबसे पुरानी दीवार पर हाथ रखा, और एक दरार खुल गई,
16:28उस दरार के पीछे था मंदिर का असली रहस्य, एक गहरी गुफा, और गुफा के अंदर वो साधु, मूल रूप में, जीवित,
16:41वह जमीन पर बैठा था, मगर उसकी पीट से पत्थरों की बेले निकल कर मंदिर की हर मूर्ती से जुड़ी थी,
16:50वो एक जीवित पत्थर का देवता बन चुका था, जो आत्माओं से शक्ती खीच कर अमर हो गया था,
16:59अनन्या ने चिल्ला कर पूछा, तु कौन है?
17:01साधो बोला, मैं वो हूँ जिसे दया नहीं मिली, और अब मैं दुनिया से दया चीनता हूँ,
17:13तुम सब अब मेरे संग्रह में रहोगे, सदा के लिए,
17:18अनन्या ने कैमरा आखिरी बार आन किया और दुनिया को लाइव दिखाया,
17:23किराडू मंदिर कोई प्राचीन विरासत नहीं, ये एक जीवित पिशाच है,
17:32जो आत्माव से जीता है, अगर ये प्रसारन बंध हो जाए,
17:37तो समझ लेना मैं भी अब पत्थर हूँ,
17:42आज भी यूट्यूब पर वह अंतिन फुटेज मौजूद है,
17:46जहां कैमरे में एक लड़की दिखती है, उसकी आखे काप रही है,
17:55हूँट कुछ कह रहे हैं,
17:58और फिर अचानक, अंतिन पंक्तिया,
18:02अगर आप कभी किराडू जाएं,
18:05और मंदिर आपको बुलाएं,
18:08तो याद रखना,
18:11मंदिर अब सिर्फ मंदिर नहीं,
18:13वो एक आत्माओं का संद्रहाले है,
18:18और हो सकता है,
18:22आपकी भी जगह वहां तय हो चुकी हो,