00:00ुशेश रूप से महिलाओं को समर्थन देने के लिए, उनको विश्वाहत देने के लिए, राष्टिय महिला आयोग यहाँ पर आया है।
00:16दो दिन मैं अनेक अनेक लोगों को मिली हूँ, विशेश रूप से महिलाओं को और बच्छों को मैं मिली हूँ और यह जो घटना वहाँ पर घटी है, उसकी बहुत जा बहुत बड़ी पिडा उन सभी लोगों को हो रही है।
00:39यह जो पिडा है, यह एक असहनिय ऐसी पिडा है।
00:47जो चीजे मैंने वहाँ पर देखी, जो मैंने वहाँ पर बात करी, यह इतनी खराब और इतनी कठिन है, कि उस मनजर को मैं कभी भूल नहीं सकती।
01:03अनेक मैलाओं के साथ बात करी।
01:09तो धान में यह आया, कि ऐसी जो सामपरदाईक हिंसा होती है, उसका सबसे बुरा असर, सबसे पहले वाले प्रभावशाली, अगर कोई बुरा असर होता है, तो वो महलाए और बच्चों के उपर होता है।
01:31इस दग्गे की वज़े से सैकड़ो सैकड़ो घर बरबाद हुए।
01:38उनके घर जलाए गए, घर में एक इतनी भी चीज बाकी नहीं रही।
01:47उनके घर लुट गए, जो चीजे थी वो उठाई गई।
01:54इतना ही नहीं, उनको बहुत धमकाया गया, उनको बहुत डराया गया, बहुत खराब तरीके से उनको धमकिया भी मिली।
02:07और यह जो वहाँ पर हिंसा हुई है, और इसकी लगातार घटनाए अगर हम देखते हैं कुछ मेहनों में, इस लगातार घटनाओं से उन महिलाओं का शारीरिक, भावनात्मक और उनके उपर मनोवे घ्यानिक बहुत ज़्यादा आघात हुआ है, उसका असर भी हुआ है।
02:37मैंने अनुभों भी कही है।
03:07महनत करते हुए जीने वाले लोग है, हमारा इसमें क्या कसुर था।
03:13अपने ही प्रदेश में, अपने ही गाव में निर्वासित होना।
03:21अपना ही गाव अपना घर जो खुद का है, जिसने कमाया है अपना मेहनत के साथ, बनाया है बहुत सपने लेकर, उस घर को अपने सपनों को बरबात होते हुए उन्होंने देखा है।
03:37उनका सब कुछ खतम हो गया है, और इन चीज़ को लेके हुए वो इतना ही पूछ रही है कि हमारा क्या कसुर है, कि अपने ही जगों में, अपने ही गाव में हम निर्वासित हो गए, यहाँ पे हम नहीं रह पाए, हमें यहाँ से जाना पड़ा, पलायन करना पड़ा, क्या ह
04:07हर लगबग घर पे हम जाकर वहाँ पीस्तिती देखके आए, लोगों को भी मिलके आए, परिवारों को भी मिले, बहुत हिंसा हुई है, सबसे बड़ी बात यह है कि बहुत ज़्यादा डर का वातावरन है, जिस तर किसे मारा पिटा गया है, वो असहनिया है, और किसी को नह
04:37को साथ तियों सहुई है
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