00:00बहुत पहले की बात है, एक घणा जंगल था, जिसमें बहुत सारे जानवर रहा करते थे।
00:05उस जंगल का राजा का राजा एक शेर था।
00:08शेर की सेवा करने के लिए तीन जानवर थे।
00:11बाग, सियार और कौआ।
00:13ये तीनों भले ही शेर के काम करते हूं,
00:16लेकिन जंगल के बागी जानवर उन्हें चापलूस मंदली कहा करते थे।
00:20वो जानते थे की ये तीनों कोई काम भले अच्छे से करें या ना करें,
00:25लेकिन शेर की चापलूसी अच्छे से करते हैं।
00:28हर रोज ये सभी शेर की तारीफ करते थे, जिससे शेर बहुत खुश हो जाता था।
00:33शेर जो भी शिकार करता था, अपना पेट भरने के बाद बाकी बचा हुआ खाना इन तीनों को दे देता था।
00:40इस तरह बाग, सियार और कॉय की जिंदगी मज़े से कट रही थी।
00:44एक दिन कॉआ अपने चापलूस दोस्तों के लिए ख़बर ले कर आया कि काफी देर से उनके जंगल में एक उंट घूम रहा है।
00:52वह शायद अपने समूसे भटक कर जंगल और आ गया था।
00:56उंट का मांस खाने का लालच तीनों के मन में जाग गया और वे तुरंट अपने मालिक शेर के पास गए और उसे पूरी बात बताई।
01:04कवा शेर से कहने लगा, स्वामी उंट नामक ये प्राणी आपके भोजन के लिए बहुत अच्छा रहेगा, आप इसे मार कर खा जाये।
01:12शेर ने यह बात सुनकर कहा, मैं इस जंगल का राजा हूं और अपने यहां आने वाले किसी अतित्ही को नहीं मारता।
01:20कहते हैं कि विश्वस्त और निदर होकर अपने घर आने वाले शत्रु को भी नहीं मारना चाहिए। उस उंट को मेरे पास ले आओ, मैं उसके यहां आने का कारण पूछता हूं।
01:31शेर का आदेश सुनकर तीनों उंट को उसके पास ले लाए। उंट ने सिह को प्रणाम किया, लेकिन वह डर से काप रहा था। शेर ने जब उसके जंगल में भटकने का कारण पूछा, तो उसने बताया कि वह अपने साथियों से बिछुड गया है। शेर ने उसे कहा कि घ
02:01तब धीरे से बाग अपने साथियों से बोला कि चिंता मत करो, हम बाद में इसे किसी तरह मरवा देंगे। इस समय राजा का आदेश मान लेते हैं। उंट अब उस जंगल में स्वच्छंद तरीके से रहने लगा। उसे वहाँ ताजी घास खाने को मिलती। समय के साथ वह �
02:31जान्वरों को अपनी पीठ पर बैठा कर चलता। एक दिन शेर का एक हाथी के साथ युध हो गया। शेर ने जब हाथी पर आक्रमन करना चाहा, तो हाथी ने उसे पटक दिया। हाथी के दातों के प्रहार से शेर बुरी तरह घायल हो गया। और उसने जैसे तैसे अपनी �
03:01भूखे रहने लगे। एक दिन भूख से बेहाल शेर ने सोचा, आखिर कब तक ऐसा चलता रहेगा। उसने अपने सेवकों को आग्या दी और कहा, किसी ऐसे जीव की खोच करो कि जिसको मैं इस अवस्था में भी मार कर खा सकूं। शेर की आग्या पाकर तीनों चापलूस �
03:31का ही भोजन किया जाए। बाग की बात सियार और कोई को भा गई और सब एक योजना बना कर शेर के पास गए। तीनों ने कहा कि उन्हें जंगल में कुछ भी नहीं मिला। फिर सियार शेर से बोला कि महाराज आप कब तक भूखे रहेंगे। मेरा ही शिकार कर लीजीए आ�
04:01कि उन्हें जंगल में कुछ भी नहीं मिला। तीनों ने कहा कि उन्हें जंगल में कुछ भी नहीं मिला। फिर सियार शेर से बोला कि महाराज आप कब भूखे रहेंगे। तीनों ने कहा कि उन्हें जंगल में कुछ भी नहीं मिला। फिर सियार शेर से बोला कि उन्हें जं�
04:31राजा, आप ऊंट को ही खा ले। अब तो वह खुद ही कह रहा है कि उसे खा लिया जाए। वह स्वस्थ भी है और उसके मांस भी ज्यादा है। यदि आपकी तबियत सही नहीं लग रही है, तो हम तीनों इसका शिकार कर लेते हैं। इतना कहने के बाद बाग और सियार ने
05:01कहने के बाद बाग नहीं लग रही है।