00:00बहुत सालों पहले की बात है, रत्नापुर गाऊह में एक बहुत परसिद्ध मन्दिर हो आ करता था
00:05उस मन्दिर में एक पुझारी हर दिन पूजा पाथ करने आया करता था
00:10उस पुजारी के पास एक हाथी था, जिसको वो हर दिन अपने साथ मंदिर लेकर आया करता था.
00:17गाव के लोग भी उस हाथी को बहुत पसंद करते थे.
00:20हाथी भी मंदिर में आने जाने वाले भक्तों का स्वागत, सतकार करता था.
00:26मंदिर में पूजा करने के बाद, पुजारी हाथी को नहलाने के लिए तालाब ले जाया करता था.
00:32हाथी के नहाने के बाद, दोनों लोग वापस घर लोटते समय दर्जी की दुकान पर रुकते थे.
00:38दर्जी बहुत प्यार से हाथी को अपने हाथ से केला खिलाता था और बदले में हाथी भी बध्धे आदर के साथ अपनी सूंट से नमस्ते करता था.
00:47फिर दर्जी और हाथी घर लोट जाते थे.
00:50ये हाथी और दर्जी दोनों के रोज की दिनचर्या का हिस्सा हो गया था और उनकी जिंदगी का हिस्सा बन गया था.
00:57एक दिन जब हाथी दर्जी की दुकान पर रोज की तरह पहुंचा और केला खाने के लिए आगे बरहा, तभी दर्जी को एक शरारत करने का मन हुआ.
01:20अगले दिन पुझारी और हाथी तालाब से लोट रहे थे. तभी पुझारी एक जगह रूप कर लोगों से बात करने लगा और हाथी दर्जी की दुकान की तरफ बरहाग गया.
01:47इस बार हाथी अपनी सूंड में कीचादी डियेच लेकर आया था. हमेशा की तरह दर्जी अपनी दुकान में कपद्धीहों की सिलाई कर रहा था. हाथी दर्जी की दुकान के सामने आया और उसने अपनी सूंड में भरे कीचादी डियेच को उसकी तरफ फेंग दिया. दर
02:17जी को अपनी हर्कतों का बहुत बुरा लग रहा था. उसने मजाग-मजाग में अपना एक अच्छा दोस्त खो दिया. उसी दिन
02:25से दर्जी ने सोच लिया था कि आज के बाद वह किसी के साथ ऐसा बुरा मजाग नहीं करेगा.
02:37हाथी और दर्जी की कहानी से हमें यह सीख मिलती है कि हमें कभी भी किसी को मजाग में भी नुकसान नहीं पहुचाना चाहिए क्योंकि इससे हमारे साथ भी बुरा हो सकता है.
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