Ramayan Erisode 5 God Episode,
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00:00हमारी संस्क्रिति, हमारे संसकार सदा रहें हमारे समझ
00:08भारत के महान ग्रंथों और कावियों का संपोर्ण संकलन
00:12सब्सक्राइब करें तिलग
00:30सिताराम चरित अतिपावन
00:51बधुर सरस अरुखती मनभावन
01:05पुने पुने के तने हो सुने सुनाए
01:13यकी प्यास भुझत न भुझाए
01:21यकी प्यास भुझत न भुझाए
01:45राम यही है ताड़का
01:51यही है ताड़का
02:21यही है ताड़का
02:51यही है ताड़का
03:21यही है ताड़का
03:51दन्य हो राम तुम्हारी जै हो
03:56तीनो लोक में तुम्हारे सिवा कोई भी ताड़का को नहीं मार सकता था
04:00अब हमें विश्वास हो गया
04:02कि तुम जगत कल्यान के निमित ही इस भूतल पर आय हो
04:06इसलिए तुम्हारे उपर प्रसन होकर
04:08आज हम तुम्हें वो दिव्यास्त्र परदान करेंगे
04:11जो तीनो लोक में हमारे सिवा किसी के पास नहीं
04:16अपने अनुग्रह, अपनी क्रपा का पात्र मान कर
04:20आपने इस दास का गौरव बढ़ा दिया है मुनिराज
04:24हम जानते हैं राम
04:25वशिष्ट मुनी ने पूर्ण शस्त्र विद्या देकर
04:29तुम्हें रणक ओशल में पारंगत किया है
04:32परन्तु हम जो शक्तिया आज तुम्हें परदान करेंगे
04:35वो देवताओं को भी दुरलभ है
04:38अनेक लावकिक, पारलावकिक और वयज्यानिक शोत के द्वारा
04:42आध्यात्मिक शक्ति से हमने जिने सिद्ध किया है
04:46वो दिव्यास्त्र सारे संसार में एक साथ हमारे सिवा कहीं नहीं मिल सकते
04:53एक युग से हम एक ऐसे योग्य पात्र की तलाश में थे
04:57जो जन कल्यान के लिए हमारी सिद्धियों का सही उपियोग कर सके
05:03हमें दिखाई दे रहा है कि भविश्य में आतताई शक्तियों से आर्यवर्त की रक्षा करने का भार तुम्हें उठाना होगा
05:14और उस समय इन दिव्यास्त्रों की तुम्हें आवश्यक्ता होगी
05:20राम शत्रियों के लिए शत्र आवश्यक है परन्तु शत्र धारन करने के भी कुछ नियम होते हैं
05:33देश समाज और किसी निर्बल प्राणी की रक्षा के लिए शत्र उठाना वीर पुरुशों का करतव है धर्म है
05:42किन्तु अपने अहंकार या अपने बल का प्रदर्शन करने के लिए किसी पर वार करना किसी पर हमला करना वीर पुरुशों का धर्म नहीं
05:54मैं जो विद्या तुम्हें प्रदान कर रहा हूँ उसकी गुरुदक्षिना यही होगी कि किसी निर्दोश पर उसका उप्योग नहीं करोगे
06:03परन्तु जहां पाप अत्याचार और अन्याय देखोगे वहां पापी और दुराचारी का संहार करने के लिए शस्त्र अवश्य उठाओगे
06:15राम इसकी प्रतिग्या करो और मेरी शक्ती का आत्म साथ करो
06:32राम अब मैं तुम्हें इन दिव्यास्त्रों के आवाहन संचालन और विशरजन के मंत्र बताओंगा जिनके प्रभाव से तुम देवता, गंधर्व, नाग, असूर सब पर विजय पासकोगे
06:59वत्स, अस्त्रों में कई प्रकार की शक्तियां होती हैं, कुछ शक्तियां वयज्यानिक अनुसंधान से पैदा होती हैं, कुछ आध्यात्मिक साधना से दिव्यलोकों से प्राप्त होती हैं, कुछ शक्त परमानु शक्ति से संपुट होते हैं, कुछ मन की शक्ति से चलते है
07:29जो अपने फलक पर दिव्य शक्तियों को धारन करके चलते हैं,
07:34जैसे शिव का शूल्वत नामक आस्त्र,
07:48ब्रह्मा आस्त्र,
07:49श्री नारायन अस्त्र,
08:19ब्रह्मा आस्त्र,
08:25ब्रह्मा आस्त्र,
08:29ब्रह्मा आस्त्र,
08:33ब्रह्मा आस्त्र,
08:37ब्रह्मा आस्त्र,
08:41ब्रह्मा आस्त्र,
08:45ब्रह्मा आस्त्र,
08:49ब्रह्मा आस्त्र,
08:53ब्रह्मा आस्त्र,
08:57ब्रह्मा आस्त्र,
09:01ब्रह्मा आस्त्र,
09:05ब्रह्मा आस्त्र,
09:09ब्रह्मा आस्त्र,
09:13ब्रह्मा आस्त्र,
09:15ब्रह्मा आस्त्र,
09:19ब्रह्मा आस्त्र,
09:23ब्रह्मा आस्त्र,
09:27ब्रह्मा आस्त्र,
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10:27ब्रह्मा आस्त्र,
10:31ब्रह्मा आस्त्र,
10:33ब्रह्मा आस्त्र,
10:37ब्रह्मा आस्त्र,
10:53ब्रह्मा आस्त्र,
10:58वदियां जयस्य,
11:03वीनु परेड़ा वीनु परेड़ा
11:05वीनु परेड़ा वीनु परेड़ा
11:07वीनु परेड़ा वीनु परेड़ा
11:09वीनु परेड़ा वीनु परेड़ा
11:11वीनु परेड़ा वीनु परेड़ा
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11:51वीनु परेड़ा वीनु परेड़ा
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12:01वीनु परेड़ा वीनु परेड़ा
12:03वीनु परेड़ा वीनु परेड़ा
12:05वीनु परेड़ा वीनु परेड़ा
12:07वीनु परेड़ा वीनु परेड़ा
12:09वीनु परेड़ा वीनु परेड़ा
12:11वीनु परेड़ा वीनु परेड़ा
12:13वीनु परेड़ा वीनु परेड़ा
12:15वीनु परेड़ा वीनु परेड़ा
12:17वीनु परेड़ा वीनु परेड़ा
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12:21वीनु परेड़ा वीनु परेड़ा
12:23वीनु परेड़ा वीनु परेड़ा
12:25वीनु परेड़ा वीनु परेड़ा
12:27वीनु परेड़ा वीनु परेड़ा
12:29वीनु परेड़ा वीनु परेड़ा
12:31वीनु परेड़ा वीनु परेड़ा
12:33तुम्हारी सदा जैहो
12:35महामहिम के चड़नों में
12:37साधर परणाम
12:39कल्यानमस्तु
12:41उर्देव मितलेस और महाराज जनक
12:43के एक विशेश सामन्त
12:45कुछ सुप संदेश लेकर आपकी सेवा में आये हैं
12:47धरसन की आज्यां चाहते हैं
12:49उन महानु भाव को
12:51अतिदी कक्ष में ले जाओ
12:53उनका सतकार करो
12:55उनसे मिलने हम वही आयेंगे
12:59हमें ये जानकर प्रसंदनता हुई
13:01कि महाराज जनक
13:03अपनी पुत्री
13:05राजकुमारी सीता का
13:07स्वहमर रचा रहे हैं
13:09पुनिवर आपके आशिरवास से
13:11उपकार निर्विकन संपन हो
13:13उसके लिए महाराज ने
13:15आप से विशेश प्रार्टना के लिए
13:17इस दास को भेजा है
13:19हम विदेह राज जनक का आमंतरन पाकर
13:21बहुत प्रसंदन हुई
13:23महाराज को हमारा आशिरवास
13:25उने कहना
13:27कि हम आवश्या आयेंगे
13:29बह्या गुरुदेव आ रहे है
13:31गुरुदेव
13:37प्रणाम गुरुदेव
13:39पधारिये
13:43मैठो वच
13:49राम
13:51मैठो वच
13:53महराज जनक्ह कि यहाँ से निवता आया है।
13:56वो अपनी पुतिरी सीत avisinapuni putri Sita
13:58का स्वेहमवर रचा रहे है। ka sweyamvar rachaa rahe hai.
14:00जिसमें उनोंने हम Eastern ushistoire mezli immense
14:02ही निवता आया है। hihi nivta aayaya hai.
14:05हम छेर गलिए हामवैं Sanatan wa his sirge kaleye hama
14:07तुम्हारे पास आने में कष्ट नहीं, आनन्द ही आनन्द है, राम.
14:12तात महराज जनक के यहां से निवता आया है.
14:16वो अपनी पुत्री सीता का स्वयम्वर रचा रहे हैं.
14:20जिसमें उनोंने हमें भी आमंत्रित किया है.
14:23हमारी इच्छा है कि तुम दोनों भाई हमारे साथमी थिला चलो.
14:28राम, इस विशय में तुम्हारा क्या विचार है?
14:33गुरुवर्य, आपकी आज्या के सामने किसी अन्य विचार का स्थान ही कहा है?
14:40केवल आज्या वशी नहीं वच.
14:42हम चाहते हैं कि तुम भी उसे एतिहासिक द्रिश का एनुभव करो.
14:46जहां आर्यवर्त के हर प्रांथ और हर प्रदेश की राजकुमार..
14:51..सीता को पाने के लिए अपना अपना बल, कौशल और पराकर्म दिखाने आएंगे.
14:56मुनिवर, स्वैंबर करत तो यही है..
14:58..कि राजकुमारी जिसे पसंद करेंगी..
15:01..उसी के गले में वरमाला पहना देंगी.
15:04फिर उसमें बल और कौशल दिखाने की आवशकता ही कहा है.
15:08इसलिए कि महराज जनक ने सीता के विवाह के लिए..
15:14..एक कठिन शर्त रख दी है.
15:16शर्त?
15:17हाँ रगुननदन, कई कारणों से ये स्वेमवर बड़ा अदभूत होगा.
15:22पहला कारण तो यह..
15:24..कि सीता स्वेम ही एक अदभूत कन्या है.
15:27और दूसरा कारण यह है..
15:29..कि महराज जनक के पास..
15:31..भगवान शिव का एक अलाउकिक धनुश है..
15:33..कि महराज जनक के पास..
15:35..भगवान शिव का एक अलाउकिक धनुश है..
15:38..जो शिव ने देवताओं को दिया था.
15:40और देवताओं ने जनक के पूर्वज महराज देवराज के पास..
15:44..धरोहर रूप में रखा था.
15:46सीता को देवी कन्या मान कर..
15:47..महराज जनक ने ये निष्चह किया है..
15:50..कि सीता का विवाह किसी साधारन मानव से नहीं हो सकता.
15:55और उनोंने शर्त रख दी..
15:57..कि जो शूर्वीर उस महान शिव धनुश को जुका कर..
16:02..उस पर प्रतंचा चड़ा देगा..
16:04..उसी के साथ सीता का विवाह होगा.
16:05उसी चमतकार को देखने के लिए..
16:08..तुम हमारे साथ मिठला चलो.
16:10यही हमारी इच्छा है.
16:13आहो भाग्या.
16:15तो कल प्राता ही प्रस्थान करेंगे.
16:18जो आग्या गुरुदेव.
16:19जो आग्या गुरुदेव.
16:32चले राम, लच्मन, मुनी संगा..
16:38चले राम, लच्मन, मुनी संगा..
16:44गए जहाँ जग पावनी गंगा.
16:50गए जहाँ जग पावनी गंगा.
16:58जग पावनी गंगा.
17:06हे रखुकुल तिलकराम, वच्च लच्मन..
17:09ये परम पावनी सर्व पापनाशनी गंगा है.
17:14इने परनाम करो.
17:22वच्च राम, पवित्र गंगा नदी का पुश्पों से पूझन करो.
17:32वच्च लच्मन, तुम भी पुश्प लो. तुम भी पूझन करो.
17:39तुम भी पुश्प लो. तुम भी पुष्प लो.
17:47राम, ये पवित्र गंगा नदी तुम्हारे पुरुजों की देन है.
17:54हा, बैठो.
18:02राम, तुम्हारे उज्ञुल कुल की कथा सुनाता हूं.
18:06वत्स, प्रतापी अक्षवाकु वन्ष में एक धर्मात्मा राजा सगर हुए हैं
18:17एक बार, जब वह अश्वमेद यग्य कर रहे थी
18:37इंद्र उनसे इवशा करता था, इसलिए उनके यग्य का घोड़ा चुरा कर पाताल लोक में ले गया
18:50वहाँ उसने वो घोड़ा कपिल मुनी के आश्रम में छोड़ दिया
18:56महराज सगर के सारे पुत्र, घोड़े की तलाश में पाताल लोक तक जा पहुंचे
19:03उन्होंने कपिल के आश्रम में घोड़े को देख कर महात्मा कपिल का अपमान किया
19:09उनके दुर विवहार से कुपित होकर, महरिशी कपिल ने सगर के पुत्रों को शाप देकर भस्म कर दिया
19:16बसम कर दिया.
19:18फिर उनका उद्धार करने के लिए..
19:20..गंगा को स्वर्ग से धर्ती पर लाना अवशिक हो गया.
19:24परन्तु ये काम बहुत कठिन था.
19:27महराज सगर, उनके बाद महराज अन्शुमान..
19:36..उनके पुत्र, महराज दिलीप..
19:41..ये काम न कर सके.
19:43फिर?
19:45फिर दिलीप के पुत्र महराज भगीरत ने ये निष्चय किया..
19:49..कि वो गंगा जी को धर्ती पर लाकर..
19:52..अपने पितरों का उद्धार करेंगे.
19:54उनने गंगा जी को धर्ती पर लाने के लिए..
19:57..खोर तपस्या की.
20:12उनकी तपस्या से प्रसंद होकर..
20:14..गंगा जी को धर्ती पर लाने के लिए..
20:16..खोर तपस्या की.
20:18वो गंगा जी को धर्ती पर लाने के लिए..
20:20..खोर तपस्या के लिए खोर तपस्या के लिए खोर तपस्या के लिए..
20:23..खोर तपस्या के लिए खोर तपस्या के लिए खोर तपस्या के लिए खोर तपस्या के लिए खोर तपस्या के लिए खोर तपस्या के लिए खोर तपस्या के लिए खोर तपस्या के लिए खोर तपस्या के लिए खोर तपस्या के लिए खोर तपस्या के लिए खोर तपस्य
20:53गंगा को धरति पर लाने का वरदान भगिरत को दिया
21:02फिर ब्रमा जी के कहने पर भगिरत ने शंकर जी की आराथना की
21:08ता कि जब गंगा आखाश से धरती पर घिरे तो उन्हें अपने शीष पर धारण करें
21:16अन्य था गंगा के वेग की प्रबलता से धरती के फट जाने का नर्था
21:35अगीरत ने फिर गोर तपस्या की और भगवान शिव को प्रसंद कर लिया
21:46उन्होंने भगीरत को वचन दिया कि वो गंगा जी को अपने शीष पर धारन कर लेंगे
21:58फिर ब्रह्मा जी के आदेश से श्री विश्णू के चरणों से निकल कर गंगा जी आकाश मार्ग से धरती पर बड़े वेग से आई
22:16भगवान शिव ने उन्हें अपनी जटाओं में समेट लिया और फिर धरती पर बहने दिया
22:36जिस से भगीरत का मनोरत सफल हुआ और धरती से लेकर पाताल तक सब का कल्यान हुआ
22:50गंगा अपनी धाराओं से तीनों लोकों को पवित्र करती है इसलिए इन्हें त्रिपत गामनी भी कहती है
22:58महराज भगीरत इन्हें भू लोक पर लाए इसलिए मृत्यू लोक में इन्हें भगीरती भी कहा जाता है
23:06राम ये परम पवित्र गंगा यावध चंद्र दिवा करो जब तक सूरत चांद रहेंगे इस धरती के प्राणियों का कल्यान करेंगी
23:16संभव है आने वाले युगों में देवी देवताओं के प्रती लोगों की आस्था कम हो जाए पर गंगा का गौरव कभी कम नहीं होगा
23:28कभी सदा इसका गुनगान करेंगे ये जिस देश में बहेगी वहा सदा हरा भरा रहेगा
23:37गंगा का पवितर जल जीवन से मरने तक मानव के लिए उपियोगी होगा और अनंत काल तक लोग इसे गंगा मैया कहकर माता से भी महान मानकर इसकी पूजा करेंगे
23:54संसार की समस्त नदियों में सर्वप्रथम इन ही का नाम होगा
24:07संसार की समस्त नदियों में सर्वप्रथम इन ही का नाम होगा
24:37संसार की समस्त नदियों में सर्वप्रथम इसकी पूजा करेंगे
25:07संसार की समस्त नदियों में सर्वप्रथम इसकी पूजा करेंगे
25:17संसार की समस्त नदियों में सर्वप्रथम इसकी पूजा करेंगे
25:27संसार की समस्त नदियों में सर्वप्रथम इसकी पूजा करेंगे
25:37संसार की समस्त नदियों में सर्वप्रथम इसकी पूजा करेंगे
25:47संसार की समस्त नदियों में सर्वप्रथम इसकी पूजा करेंगे
25:56महरिशी गौतम की पतनी अहिल्या परम्चुन्दरी थी
26:02जिसके कारण देवराजिंद्र उस पर आसक्त हो गया
26:14एक समय जब महरिशी गौतम प्राता है
26:19स्नान के लिए नदी पर गये
26:26तो इंड्रने अवसर देखा और अवसर का लाब उठाने की ठानी
26:32उसने गौतम का रूप धारन कर लिया
26:37गौतम का रूप धारन करने के पश्चाथ आहिल्या से समागम के लिए
26:43वो दबे पाओं छुपके छुपके आहिल्या की कुठिया की ओर चल पढ़ा
26:50चिपते चिपाते वो अहिल्या की कुटिया में परवेश कर गएहा
26:58जिस समय इन्द्र चिपकर अहिल्या की कुटिया से निकल रहा था
27:09उसी समय गौतम मुनी सनान करके वापस लोट रहे थे
27:15उन्होंने अपने ही रूप में दूसरे पुरुष को अपनी कुटिया से निकलते देखा
27:21तो वो समझ गई कि ये इंद्र का कपट जाल है
27:26क्रोत में भर कर उन्होंने इंद्र को शाप दिया और उसे विफल कर दिया
27:33अहिल्या कुटिया से बाहर आई
27:39वो समझ गई कि उसके साथ छल हुआ है
27:43वो रोती हुई पती के चरणों में गिर गई
27:47परन्तु क्रोत में भरे गौतम मुनी ने आवेश में आकर अपनी पतनी को भी शाप दे दिया
27:56और वो उसी क्षण पत्थर की शिला बन गई
28:02उसी समय से वो शापित नारी इस पत्थर का रूप धरे किसी की आने का रास्ता देख रही है
28:11किसका रास्ता देख रही है गुरुदेव?
28:14जो गिरे हुओ को उठा सके
28:17राम किसी पर दोश लगा कर दंड देना तो सभी को आता है
28:23परन्तु वो पतित पावन जो किसी गिरे हुए को उठा सके विरला ही होता है
28:29ऐसे महा मानव के चर्णों को चुने से सारे पाप नश्ट हो जाते हैं
28:35इसलिए इस शिलह को अपने पवित्र चर्णों से सपर्ष करके एक अभागन का उध्धार करो राम
28:52श्री राम चरण के सुखद सपर्ष से शिला बनी सुन्दर नारी
29:07पद पंकज पावन शोक नशावन पद रज की महिमा भारी
29:20मैं नारी अपावन प्रभु जग पावन पावनता का दान दिया
29:37जोत्र भुवन पूझित लक्षमी सेवित उन चरणों में स्थान दिया
29:50रिशी गोतम द्वारा श्राप जमाया श्राप वही वरदान हुआ
30:09गई तन की जड़ता पाई शुचिता भाग्य जगे कल्यान हुआ
30:21यही भाति सिधारी गोतम नारी बार बार हरी चरण परी
30:32जो अति मन भावा सोई बर पावा गई पति लोक अनंद भरी
30:44गई पति लोक अनंद भरी
30:54राम हरी चे राम हरी
31:25राम लक्षमन इस आमर वाठीका का वातावरन बढ़ा शानत और पवित्र है
31:35नगर के कुलाहल से अलग क्यों ना हम अपना डिरा यही डाले
31:40जैसे आपके इच्छा गुरुदेव
31:42महामुनी के स्री चर्णों में दास का साधर परनाम
31:46कल्यान मस्तु
31:48मैं महाराज को आपके आगमन की सुचना देता हूँ
31:51अखंड सवभाग्य महाराणी सुनैना
31:55यशस्वी हो मिथिलेश्वर जनक
31:58सकल मनोरत सफल हो
32:05कुरुदेव आपकी क्रिपा बनी रहे
32:09इसी में हमारा कल्यान है
32:12राजकुमारी सीता नहीं आई अभी तक
32:14आती होंगे
32:44गुरुशतानणन्ट के चरणों में परनाओं
32:47तोमारी मनों कामना पुर्न हो बेटी
32:54कशमाकिजे पताजि
32:57मेरे कारण, मेरे कारण, अच्छा तैशे काड़िपक हो
33:08वर्सकी फिथियों में समर्व हो
33:11शमा कीज़े पिताजी, मेरे कारण आपको प्रतिक्षा करने पड़ी.
33:17बेटी, आज शिवधनुश को स्वयम्वर्च सभामें भेज दिया जाएगा.
33:22इसलिए इनकी पूजा करके भगवान से आशिर्वाद माँगो.
33:26सीता, बच्पन से तुने इस शिवधनुश की पूजा की है बेटी, आज उसी पूजा की पुर्ण आहुती की घड़ी आगई.
33:43तेरे पिता ने तेरे विवह के लिए एक ऐसे पराक्रम की शर्त रखी है, जिसे पूरा करना एक साधारन पुरुष के लिए असंबव नहीं.
33:56यह बहुत कथिन अवश्य होगा.
34:00शंका मन से निकाल दो देवी, जिन्होंने महराज जनक के मन में उस अजभूत तरण की प्रेणा उत्पन की थी, उपाय भी वो अपने आप ही करेंगे, फरिणाम उनहीं पर छोड़ दो.
34:16आशंका और अविश्वास को मन से निकाल कर बगवान आश्वतोष पर भरोसा रखो.
34:24वो सब की मनो कामना पुर्ण करते हैं.
34:28उनके इस पूजनिय दनुश के कारण कभी किसी का आमंगल नहीं हो सकता.
34:35चलो महराज, पूजा करेंगे.
34:45लो बेटी सीता, मन लगा कर पूजा करो.
34:49बेटी उर्मिला, तुम भी अपनी बड़ी बहन के लिए पगवान से प्रार्थरा करो.
35:15मंगल भवन अमंगल हारी, रव हो सो दशरत अजिर भिहारी.
35:35सीता राम चरीत अति बावन, मधुर सरस अरुपती मन भावन.
35:55पुनी पुनी के दिल में हो सुने सुनाए, यगी ब्यास भुझत न भुझाए.
36:25पुनी पुनी के दिल में हो सुने सुनाए, यगी ब्यास भुझत न भुझाए.