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Ramayan Erisode 4 God Episode
Ramayan Erisode God Episode,
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Transcript
00:00हमारी संस्क्रिति, हमारे संसकार सदा रहें हमारे समझ
00:08भारत के महान ग्रंथों और कावियों का संपोर्ण संकलन
00:12सब्सक्राइब करें तिलग
00:31सिताराम चरित अतिभावन
00:40बधुर सरस अरुखती मनभावन
00:50बधुर सरस अरुखती मनभावन
01:00पुने पुने के तुने हो सुने सुनाए
01:14ये की प्यास भुझत न भुचाए
01:22राज कुमार राम चंदर की जेव
01:44भरत लाल की जेव
01:46राज कुमार राम चंदर की जेव
02:04महरानी जी, महरानी जी, राज कुमार नगर में आ गए
02:07जनता उनकी जेचे कार कर रही है, उन पर फूर बरसा रही है
02:10भरत लाल की जेव
02:12लट्शमान लाल की जेव
02:19राज कुमार लट, लट्शमान की जेव
02:32डर्ड कुमार पतल की जेव
02:40मैं तो अपने भरतलाल को देख ली आई हूँ।
02:43भीड में बड़ी मुश्किल से गुशकर इतना वड़ा, इतना वड़ा, इतना वड़ा हो गया है।
02:48अच्छा? सच?
02:50हाँ. हाँ.
02:52राम कैसा देखता है?
02:54वो तो भरत से भी उच्छा हो गया होगा?
02:57मैंने तो देखा ही नहीं.
02:59मैं तो अपने भरत को ये देखती रही.
03:01भरत को.
03:03राजकुमार राम चंदर की.
03:05जै!
03:06भरतलाल की.
03:07जै!
03:08लक्षिनलाल की.
03:09जै!
03:10महल में आ गए.
03:11चारो भईया राजमहल में परवेश कर रहे हैं.
03:15आ गए?
03:17वो राजमहल में आ गये.
03:21नहीं- क्या हुआ.
03:25क्या हुआ मारे।
03:26मैं नहीं जाओगी, मैं नहीं जाओगी!
03:29इतनी.. इतने खुस्य मैं ज़म खे से.?
03:34मैं उसके कैसे देख माओंगी?
03:36कै।
03:39कैही अधिकत नही लग जाया है.
03:41नहीं लग जाये, क्यों मेरु नसर नहीं लग जाये
04:00देखो न, ये कैसा अन्याय है
04:03गुरुदेव राजकुमारों को सुवे महराज की कक्ष में ले गए
04:06उन्हें मातों का कुछ भी ख्याल नहीं
04:08हमें भी तो उनकी प्रतिक्षा थी
04:11क्यों नहीं हम महराज की कक्ष में ही जले
04:14परिंटर, गुरुदेव क्या कहेंगे
04:36मैं आपका पुत्र राम
04:39अपने भाईयों सहित अपने आपको आपकी सेवा में समर्पित करता हूं
04:45आपकी आज्या का पालन करना आज इवन हमारा धर्म रहेगा
04:51भगवान तुम्हें दीरगायू प्रदान करे
04:54और सदा सुखी रखे
04:57गुरुदेव, आपकी कृपा से
05:01आज मेरे चारों मनोरत सफल हो गए
05:05विद्धानरेश, तुम्हें नन्य अबोद बालक हमें सौंपे थे
05:11आज उन्हें पूर्ण पुरुष बना कर
05:14वेद वेदां, धर्म शास्त्र, समाश शास्त्र
05:19अर्थ शास्त्र, राजनीती, समस्त विद्धाओं में पारंगत बना कर
05:24हम तुम्हें सौंपे थे
05:30शमा कीज़े गुरुदेव
05:33हम सब और अधिक प्रतिक्षय ना कर सकी
05:38हम आपके दोशी हैं महारानी
05:41देवी अरुन्धती ने हमसे कहा था
05:43कि कुमारों को पहले माताओं के पास ले जाना
05:47खिन्टु राज की ये शिष्टाचारों में हम भूल गया
05:50हमें क्षमा करना
05:52अब आपकी अमानत आपके हवाले करता हूँ
05:58एक बनवासी ने इनसे बड़ी कठूर तपस्या कराई
06:03अब इने अपने आचल की शीतल छाया में समइट लो
06:10राम
06:13मा का स्थान ईश्वर और गुरू से भी उचा होता है
06:19जो भक्ति भाव से मा के चर्णों की सेवा करता है
06:24देवता भी उसकी पूजा करते हैं
06:27जिन चर्णों में कई स्वर्ग समाय है
06:32उन मात्र चर्णों की वंदना करो राम
07:02मेरा राम
07:33जुख जुख जीओ
07:35सबहाँ खुश रहो
08:03सबहाँ खुश रहो
08:27लक्ष्यू मंद्र खिला बूज़ुत करो
08:29मैं सब खाराँ हलुआ खाराँ
08:30न बेडे
08:32मा, और कितना खिलाओगी?
08:34लक्षमन, तू भूजन कर रहा है कि पक्षियों का चुगा चुन रहा है?
08:39कोशिल्या बहन, आप तो राम के तरव ध्यान ही नहीं दे रही हैं.
08:43उसने तो कुछ खाया ही नहीं.
08:44क्या कुरू, सुनता ही नहीं.
08:46मा, खाले.
08:48आप खिलाओगी नहीं.
08:49अच्छा, मैं खिलाओगी.
08:51ले, थोड़ा सा खाले.
08:53थोड़ा सा.
08:59खीर खाले थोड़ी सी, तुझे बहुत पसंद है.
09:01नहीं मा, बस अब और नहीं.
09:02अरे, गुर्कुल में भेजा था, तो कितना अच्छा मोटा ताजा था.
09:07हाँ मा, देखो न आपने राम भईया, कितने सुख गए हैं.
09:13ये सब आप क्या कर रही हैं?
09:15ये ठुमक ठुमक कर चलने वाले ननने बच्चे नहीं रहे.
09:18हाँ, हाँ, हमें बालोग है.
09:20नजर मत लगाई हमारे बच्चों को.
09:23सुनिये महराज, हम मा, बेटों के बीच में बोलने के आपकी कुई आवश्यक्ता नहीं है.
09:28आप छुप चाप अपना भुज़िन कीजे.
09:44अरे, उपतर में थोड़ा चंदन तो और मिला.
09:51इतने चंदन मा?
09:52ओहो, तु छुप रहना.
09:55राजकुमारों का शरीए , स्वूनों की तरह कुमल हुना चाहिए.
09:59हमारे गुरुदेव कहते थे, शत्रीराजकुमारों का शरीए ,
10:01पज्जीर की तरह होना चाहिए.
10:03राजकुमानों को शरीट पज्जिर की तरह होना चाहियहत.
10:05जिससे तक्रा कर शत्रु की तलवारें कुंठ हो जायें.
10:09सो तो मैं देखी रही हूँ.
10:11गुरुदेव ने पत्थर की ही तरह बना कर भेजायें.
10:15उन्होंने ये नहीं सोचा कि जीवन केवल युद्ध ही युद्ध नहीं हुता.
10:20उसमें प्रेम और शिंगार परम आवश्यक हैं.
10:24शिंगार?
10:25हाँ.
10:27गुरुदेव भला इन बातों को क्या समझेंगे?
10:30वो क्या जानें कि जब हमारे राजकुमार किसी दुसरे राजी में जायेंगे
10:35तो वहाँ की राजकुमारियां हमारे राजकुमार को देखर भला क्या कहेंगी?
10:40वो तो यहीं कहेंगी कि आयोध्या की राजकुमारों को
10:44प्रेम और शिंगार की विद्या आती ही नहीं
10:46वो तो सिर्फ योधा बने मटक्ते फिरते हैं
10:50उन्हें सुन्दर्ता से तो कोई लगाव ही नहीं
10:54पर मा, हमारे गुरुदेव कहते थे
10:57पुरुश की असली सुनदर्ता उसकी वीर्ता में है
11:00वीर पुरुशों के सहरे संसार के सभी प्राणी
11:03सुक और शांती से रह सकते हैं
11:06किन्टु लक्षमन, जिस वीर्ता में भावना की कुमलता नहो
11:11वो सुनदर नहीं हो सकता
11:14शिंगार रस के बिना जीवन रसहीन और सुना हो जाता है
11:19और जिसका अपना जीवन सुना हो
11:22वो भला संसार को क्या सुक और क्या शांती दे सकता है
11:49वो भला संसार के बिना जीवन रसहीन और सुनदर नहीं हो जाता हाय
11:56वो भला संसार के बिना जीवन रसहीन और सुनदर नहीं हो जाता है
12:02वो भला संसार के बिना जीवन रसहीन और सुनदर नहीं हो जाता है
12:07आप जेवन का कतियों यिंग ज़म करते हैं
12:15आप जेवन का कतियों यिंग जब दो गंगते हैं
12:24कुछ नहीं, राम को देखने आया था, उसह देखे बिना नीन नहीं आती.
12:40जगा दू?
12:41नहीं, नहीं, केवल देखना ही था.
12:46फिर चलिए, आराम कीजी.
12:54उम सांथी सर्वा सांथी स्वभाद राम काम काम जगा, नत्यां इंड्रा देख जडेख वा, इंड्राया पुत्रि ननी धन्मा वा, इंड्राया पुत्रि ननी धन्मा वा,
13:20नत्यां इंड्रा देख जडेख वा, इंड्राया पुत्रि ननी धन्मा वा, इंड्राया पुत्रि ननी धन्मा वा, नत्यां इंड्रा देख जडेख वा, इंड्राया पुत्रि ननी धन्मा वा, इंड्राया पुत्रि ननी धन्मा वा, नत्यां इंड्रा देख जडेख वा,
13:50इंड्राया पुत्रि ननी धन्मा वा, नत्यां इंड्रा देख जडेख वा, इंड्राया पुत्रि ननी धन्मा वा, नत्यां इंड्रा देख जडेख वा, इंड्राया पुत्रि ननी धन्मा वा, नत्यां इंड्रा देख जडेख वा, इंड्राया पुत्रि ननी धन्मा वा,
14:20नत्यां इंड्राया पुत्रि ननी धन्मा वा, नत्यां इंड्राया पुत्रि ननी धन्मा वा,
14:28नत्यां इंड्राया पुत्रि ननी धन्मा वा, नत्यां इंड्राया पुत्रि ननी धन्मा वा,
14:36नत्यां इंड्राया पुत्रि ननी धन्मा वा, नत्यां इंड्राया पुत्रि ननी धन्मा वा,
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14:56नत्यां इंड्राया पुत्रि ननी धन्मा वा, नत्यां इंड्राया पुत्रि ननी धन्मा वा,
15:06नत्यां इंड्राया पुत्रि ननी धन्मा वा, नत्यां इंड्राया पुत्रि ननी धन्मा वा,
15:16नत्यां इंड्राया पुत्रि ननी धन्मा वा, नत्यां इंड्राया पुत्रि ननी धन्मा वा,
15:36नत्यां इंड्राया पुत्रि ननी धन्मा वा,
16:00हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा, हा
16:30प्रम रशी ये राक्षःत सुब वह मारिच आपका यग सफल नहीं होने देंगे
16:48टभू आप उने शाप दे कर भस्म क्यों नहीं कर देते
16:53हम जिस यग्य का अनुष्ठान कर रहे हैं..
16:55..उसका नियम ही ऐसा है कि हम क्रोथ नहीं कर सकते.
16:59इसलिए हम श्राप भी नहीं दे सकते.
17:01आप तो जानते हैं कि क्रोथ का विकार मन में आते ही..
17:05..आतमा की शुद्धी भस्म हो जाती है.
17:08तो क्या मुनिवर, असुरो का अनाचार इसी तरह बढ़ता रहे गा?
17:12और हम जन कल्यान के लिए कोई भी प्रयोग, कोई भी अनुष्ठान नहीं कर सकेंगे?
17:17निराश न हो, उपाय हमने सोच लिया है.
17:21क्या मुनिवर?
17:23हम आज ही महराज दश्रत के पास जाएंगे और उनसे सहायता माँगेंगे.
17:28क्यूंकि धर्म और विज्ञान की साधना करने वालों की रख्षा करना, राजा का ही धर्म है.
17:33गुरु आश्रम से आने के बाद अयोध्या की सारी प्रजा की नज़रें ओनहार राजकुमारों पर लगीवी हैं.
17:40अब समय आ गया है, राजकुमारों की रूची के अनुसार, जिम्मेधारी उनके कंधों पर डाल देनी चाहिए.
17:47चारों कुमार गुरुदेव के शिष्य हैं, किसकी रूची किस खेतर में अधिक है, गुरुदेव ये भली भाती जानते हैं, उनकी योगिता के अनुसार, कारे भार निच्चित कर देंगे.
18:01महराज के जै हो, महरशी विश्वामित्र द्वार पर पधारे हैं.
18:06महरशी विश्वामित्र, अचानक?
18:10बिना किसी विशेश प्रयोजन के तपोवन छोड़कर विश्वामित्र जी नहीं आएंगे.
18:15जब ज्यान और विज्ञान के ऐसी विभूती अथिती रूप में आएं, तो राजशक्ति को आगे बढ़कर अभिनन्दन करना चीए.
18:22उठिये राजन.
18:24जो आग्या.
18:53आपका स्वागत है तपो निधी.
18:56सु स्वागतम. सु स्वागतम मुनि श्रेष्ट.
19:00आपकी चरन धूली से आयोध्या नगरी धन्य हो गई है.
19:04पढ़ारिये मुनिंद्र. इस घर को पावन कीजिए.
19:08पढ़ारिये. पढ़ारिये.
19:22पढ़ारिये.
19:35पढ़ारिये.
19:47सुर्य वंश के राजा दशरत
19:49तुम्हारे सामराज्य में सर्वकुषल मंगल तो है ना?
19:53जहां आप जैसी पुर्ण विभूती के चरण कमल आ जाएं..
19:57..वहाँ सब मंगल ही मंगल है.
20:00आपके आगमन से मेरा घर तीरत हो गया.
20:04मेरा जीवन धन्य हो गया.
20:07अयो ध्यानात, तुम्हारी शिष्ठता..
20:10..तुम्हारी विनमर्ता देख कर हम प्रसन हुए.
20:13हमें विश्वास हो गया है..
20:15..कि तुम्हारे राज्य में रिशी मुनीयों के धर्म..
20:18..और सत्कर्म निर्विक्न पूरे होगे.
20:22धर्म और सत्कर्म की सेवा में..
20:24..सरवस्र समर्पन करने के लिए..
20:26..रगुकुल का बच्चा बच्चा वचन बद्ध है.
20:30आज्या कीजे मुनींद्र..
20:32..के सभी प्राय से आपका यहां पधारना हुआ है.
20:36आपकी जो आज्या होगी..
20:38..दश्रत प्रान दे कर भी उसे पूरा करेगा.
20:42धन्य हो रगुकुल शिरोमनी.
20:44इस प्रित्वी पर दूसरे किसी के मुख से..
20:47..ऐसे उदार वचन संभव नहीं है.
20:51और क्यों न हो?
20:53आपको वशिष्ट जैसे ब्रह्मरिशी के उपदेश चो प्राप्त है.
20:57राजन, हमारे हिरदय में जो बात है..
21:00..हम जिस कारी के लिए आए हैं, वो कारी पूर्ण करो.
21:04बस आपकी आज्या मातर की ही दे रहे हैं.
21:08राजन, तपोवन में असुरों के उतपा दिन परती दिन बढ़ते जा रहे हैं.
21:13हमारे यग्य, हमारी आध्यात्मिक साधना..
21:16..ज्यान विज्यान के प्रियोग पूरे नहीं हो पा रहे हैं.
21:20आरे भुमे में ऐसा दुश कर्म, दुश साहस करने वाले लोग कौन हैं?
21:24लंका के राजा रावन के गुप्त चर.
21:27सुबाहु, ताडका का पुत्र मारीच, अपनी मायावी शक्ति से..
21:30..हमारा कोई कार्य, हमारा कोई पवितर अनुष्ठान पूरा नहीं होने देते.
21:36और अपनी मायावी शक्ति से जन कल्यान के कार्यों में भी विगन डालते हैं.
21:40रेशी राज, तपस्वी रेशी मुनियों के सहायत हमारा धर्म है.
21:44अवत की सारी सेना आपकी सेवा में तैनात कर दिजाएगी.
21:49नहीं अयोध्या पति, सेना की सहायता से सुरक्षा को उपाय किया..
21:54..तो असुर शक्तियां भी आर्यवर्त की सीमाओं पर सेना का संगहटन करेंगी.
21:59और उसके लिए अभी उप्यूक्त समय नहीं है.
22:01तो हम किस प्रकार आपकी सहायता कर सकते हैं?
22:04हम तुम से तुम्हारे राम को माँगने आये हैं.
22:08हमें केवल राम दे तो, हमारी रक्षा का उपाय हो जाएगा.
22:13राम, नहीं, नहीं, वो ननना सा बालक..
22:18..आपके कारे को कैसे सिद्ध कर सकेगा?
22:20आप मुझे अग्यादी जी, अपनी पराक्रमी सिवना के साथ..
22:25..मैं स्वाइम सबसे आगे रहकर आपके यग की रक्षा करूँगा.
22:29जब तक शरीर में प्रान रहेंगे..
22:31..तब तक आपके अनुस्थान पर आच नहीं आने दूँगा.
22:34राम तो अभी बालक है! युद्ध के दाओ पेछ का अनुभव नहीं.
22:39शत्रु के बलाबल, आसुनों के छलकपड को नहीं जानता.
22:43यह आपने राम को आपके साथ कैसे भेज़ दूँ?
22:46यह नहीं हो सकता.
22:48वह अपने राम को आपके साथ कैसे भेज़ दूँ?
22:51ये नहीं हो सकता.
22:52बस राजन, धर्म और आदर्श की बड़ी बड़ी बाते करना और बात है.
22:58और उसे निभाना और बात है.
23:00तुम्हारे पुर्वजोंने अपने वचन को निभाने के लिए क्या कुछ नहीं किया.
23:04महराज शिवी ने एक कभूतर के लिए अपने शरीर की बोती-बोती कटवादी.
23:08...महराजा हरिष्चन्डर ने अपना वचन निभाने के लिए..
23:11...अपने पूत्र और अपनी पत्नी को बेच दिया.
23:14और एक तुम हो, अपने पूर्वजों की कीरती पर कलंक लगा रहे हो.
23:20हमारी इच्छा पूरी करने की प्रतिग्या की थी, उसे तोड़ रहे हो.
23:24ठीक है राजन, हम जिस तरह आय थे, उसी तरह चले जाएं.
23:28क्रोध ना करिजें मुनिवर, आप मेरे पूझे देवता समान हैं.
23:33मुझे पर अनुग्रह करिजें.
23:35रावन का वेग, तो देव, दानव, कंधर, किनर, और नाज भी नहीं सह सकते.
23:42मेरा नन्ना, मेरा नन्ना राम, उस रावन सा अकेले कैसे तक्कर ले सकेगा?
23:48मेरे पूझे पर दया कीजे, मेरे पुझे पर दया कीजे.
23:53महरशि वशिष्ट, महराज डश्रत की नजर, अभी तक राम के दिव तेज को नहीं पहचान सके.
23:59परन्तु आप तो जानते हैं, आप ही इने समझाईए.
24:03ब्रमणरशि विश्वामित्र ठीक कहने है, राजन.
24:05राम युग और इतियास की धारावं को मोडने आया हैं,
24:09वो स्वयम मंगल भवन, अमंगल हारी हैं.
24:14समय और काल बीच जाएंगे, युग बदल जाएंगे,
24:18वशिष्ट और विश्वामित्र पुस्तकों की पन्नों में लिख ही रह जाएंगे.
24:22पर राम का नाम, धर्म और संस्कृति के पईचान बन कर,
24:27अमर, अविनाशी बना रहेगा.
24:30परन्तु गुरुदर भाई...
24:31नहीं राजन, तुम नहीं जानते हैं.
24:34विश्वामित्र तो तुम्हारे पुत्र के कल्यान के लिए ही उसे लेने आये हैं.
24:38अन्यथा महर शिव विश्वामित्र, स्वयं, सुबाहु, मारिच आधी असुरों का नाश करने में समर्थ हैं.
24:46परन्तु ये सारा गवरोर राम को देना चाहते हैं.
24:50राजन, शंका मत करो, राम को इनके चरणों में समर्पित कर दो.
24:57इसी में सब का कल्यान है.
25:00संभव है, इसी में सब का कल्यान हो.
25:06आप गुरुजनों की आज्या शिरोधारे करता हूं.
25:11सुमंत्र.
25:13महराज.
25:15राम को भेजने की तयारी करो.
25:18जो आज्या.
25:30मुनिवर, राम के साथ लक्ष्वन भी आग पर संजाएगा.
25:36क्योंकि ये दोनों कभी अलग नहीं हुए.
25:40राम, लक्ष्वन, मेरी दो आखे, मेरे प्राण हैं.
25:47आज, मैं इनको आपके हवाले करता हूं.
25:51निश्चन्त रहो, राजन. सम्मांगल ही होगा.
25:55राम, लक्ष्वन, महिरशी विश्वमितर..
26:00..ही आज से तुम्हारे माता पिता के समान होगे.
26:04इनकी आज्या, इनकी सेवा ही तुम्हारा धर्म होगा.
26:15कितने कठोर हर्दर पिता है आप.
26:18हमारे सुकुमार बालकों को..
26:21हमारे सुकुमार बालकों को..
26:23..भेज दिया मुनि विश्वमितर के साथ..
26:25..राक्षुसों से लड़ने के लिए.
26:28कितने परसों के बाद वो घर वापस लोड़े थे.
26:31हम उन्हें जी भर कर देख भी न सके थे.
26:34हम जानते हैं, तुम्हें कितना दुख हो रहा है.
26:38लेकिन हम क्या करें?
26:40हमने रोकने का बहुत प्रयत्म किया.
26:43लेकिन महर शिविश्वमितर..
26:45..किसी परकार माने ही नहीं.
26:47उनके ना मानने से क्या होता है?
26:49आप इंकार कर देते.
26:51आप तो राजा हैं.
26:53हाँ, हम राजा हैं.
26:55इसलिए इंकार नहीं कर सके, राणी.
26:57आज हमें पता चला..
26:59..राजा का करतव्य कितना कठिन होता है.
27:02कितना बलिदान देना पड़ता है..
27:04..राजा को निजी भावनाओं का.
27:06पिता होने के नाते..
27:08..हमारा हिरदय रो रहा था.
27:11लेकिन राजा होने के नाते..
27:13..महरशि विश्वमितर की आज्या का उलंगन नहीं कर सके.
27:17मुनि विश्वमितर, वो तो ठेरे ही बैरागी.
27:21ना उनका कोई कुटुम, ना उनका कोई घर.
27:24वो क्या जाने, उत्रमों क्या होता है?
27:29राणी, इन महान विभूतियों के लिए..
27:32..देश और समाज ही उनका कुटुम होता है.
27:35वो जगत भर के कल्यान के लिए सोचते हैं.
27:38किसी एक कुटुम की ममता की बात नहीं सोचते.
27:42हमें उन पर विश्वास रखना चाहिए.
28:02कृपा सिन्धु मत धे, अखिल विश्व कारण करण.
28:33अरुन नयन उरु बाहु विशाला..
28:39..नील जलज तनु स्याम तमाला..
28:46..नील जलज तनु स्याम तमाला..
28:53कटी पत पीत कसे बरभा था..
28:59..रुचिर चाप सायक दुहा था..
29:06..रुचिर चाप सायक दुहा था..
29:23मक्ति अकरंत धे, शोकों मोग.
29:33मक्ति अकरंत धे, शोकों मोग.
29:42हाँ, चैकोस के इस वन प्रदेश पर ताड़का का अधिकार हैं।
29:47और इस स्थान से कोई भी प्राणी जीवित बचकर जा नहीं सकता।
29:52तभी यह स्थान एक स्मृध शाली जनपत था।
29:57कलद और करुश नाम के दो सुन्दर नगर बसे थे यहां।
30:01अगस्त मुनी के शाप से राक्षसी भनी ताड़का और उसके पुत्र मारीज की विनाश लीला से यह नगर उजाढ हो गए।
30:09उस पापिनी में हजार हाथीओं का बल है।
30:15सावधान, राम, यही ताड़का वन है।
30:20वो यही कहीं चुपी होगी।
30:23वो बड़ी मायाविनी है। कोई भी रूप धारन कर सकती है। इसलिए सावधान।
30:53वो बड़ी मायाविनी है। कोई भी रूप धारन कर सकती है।
31:23राम, यही है ताड़का।
31:53राम, यही है ताड़का।
32:23राम, यही है ताड़का।
32:53राम, यही है ताड़का।
33:16राम, समय नष्ट ना करो. सूर्यास्त हो रहा है.
33:20रात्री के समय में इन मायावी निशाचनों की शक्ती बढ़ जाती है.
33:25फिर वे दुरजय हो जाती हैं. यह हमारा आदेश है.
33:29इसका वद करो.
33:31मुनिश्रेष्ट, मेरे पिताश्री का आदेश है..
33:35..कि मैं आपकी हराज्या का पालन करूँ.
33:37अब मैं आपकी आदेश से इस तुष्टा की जीवन लिला समाप्त करता हूँ.
34:07हम करते हैं, हम करते हैं.
34:37हम करते हैं, हम करते हैं.
35:07हम करते हैं, हम करते हैं.

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