00:00क्योंकि मुझे प्रात्ना करना चाहिए?
00:30क्रोच से या मोह से या मान से या लोप से या विकार से
00:34और दुख दिया गया समझ लो
00:36हमारी इकनेस है
00:39किसी को दुख पहुँच या इसे वेवार हो गया
00:42घर में ही हो जाता है
00:43बाहर तो अच्छे रहते हैं अब
00:45पाइप को याज
00:47बच्चों को, अस्पन्ट को, माबाब को
00:49ओफिस में बॉस है, कली गया
00:51जहां हमारा वेवार है किसी को दुख पहुच गया
00:54तो दिल से माफ़ी माँगने के
00:55हे कृष्ण भगवान, ये आद्मी को मेरे क्रोच से मैंने दुख दे दिया
00:59दिल से मैं पस्चाताप करता हूँ, मुझे क्षमा करो
01:02ऐसी गल्टी नहीं करने की शक्ती दो
01:05अविकार से द्रश्ठी बिगढ गई कहीं
01:07ए भगवान मेरी एकारी द्रश्ठी से
01:10किसी को मैंने, किसी के प्रती भाव बिगाढे
01:13दिल से मैं एक शमा चाता हूँ, मुझे क्षमा करो
01:16ऐसी गल्टी नहीं करने की शक्ती दो
01:19आपका अश्रिवात चाहिए
01:20हाँ, ये प्रतीकमन कहा जाता है
01:23अलोचना, प्रतीकमन, प्रत्याज्ञान
01:25इस प्रकार मेरी गल्टी हो गई
01:27इसके लिए रिद्धय से मैं पस्चाताप करता हूँ
01:30ऐसी गल्टी नहीं करने की शक्ती दो
01:33इतनी भावना करने से रोज
01:35पहला निष्चे करने का
01:36मेरे मन, वचन, काया से
01:37किसी को दुख नहीं पहुचाना है
01:39ए भगवान मुझे शक्ती दो
01:41और बाद में दोपर में, शाम को, रात को, सोने से पहले
01:44डस, पंदर मिनित निकालो
01:46आज किसी को दुख पहुचाया
01:48अर बाहर नहीं बोले तो मन से भी हो जाता है
01:51ए उल्लू का पठा, बीच में आये क्यों आता है, समझता नहीं, क्या समझता है
01:55मन से भाव विगर गए, तो मन से भी दुख पहुचाया
01:58भाणी से भी, शब्द से किसी को नुखसान कर दिया
02:01या आचरन से, मुझे बात नहीं करने है, जाओ
02:04तो मुझे बेर लिया, तो उनको दुख पहुचाएगा
02:07तो ऐसे बात में हम चेक करने हैं, उस टाइम पे तो जागरती नहीं रहेगी
02:12पर आदा गंटा, एक गंटा, दो गंटे के बाद जागरती आईगी
02:15एक गल्ती हो गई ये, तो दिल से पस्चात आप करने का
02:18तीनी शब्द है, इस प्रकार मेरी गल्ती हो गई
02:21ये भगवान मुझे क्षमा करो, ऐसी गल्ती नहीं करने की शक्ती दो
02:25शक्ती दो जरूर माँगना, ताकि हम दोश में से धीरे धीरे मुक्त होते जाएंगे
02:32और उसके ऊपर का रस्ता है, हमेश के लिए मुक्ति चाहिए
02:37तो आत्मज्ञान प्राप्त करना चाहिए
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