पोक्षी का Suicide Point #realmotivation #bridsuicidepoint #shorts
असम के दिमा हासो जिले (Dima Haso) की पहाड़ी में स्थित जतिंगा घाटी (Jatinga Valley) की पक्षियों का सुसाइड पॉइंट कहा जाता है. हर साल सितंबर की शुरुआत के साथ ही आमतौर पर छिपा रहने वाला जतिंगा गांव पक्षियों की आत्महत्या के कारण चर्चा में आ जाता है. यहां न केवल स्थानीय पक्षी, बल्कि प्रवासी पक्षी पर अगर इस दौरान पहुंच जाएं तो वे खुदकुशी कर लेते हैं.
जतिंगा गांव को इसी कारण से काफी रहस्यमयी माना जाता है. इस बारे में वैज्ञानिकों ने काफी पड़ताल की कोशिश की कि आखिर क्या वजह है जो एक खास मौसम में और एक खास जगह पर पक्षियों को ऐसा करने के लिए उकसाती है.
वैसे इंसानों में ये प्रवृति ज्यादा आम है. परीक्षा या नौकरी के नतीजे या फिर संबंधों में असफल होने पर कई बार लोगों में खुदकुशी की प्रवृति दिखती है. साथ ही कई ऐसी जगहें हैं, जो इंसानों के लिए सुसाइड पॉइंट के तौर पर जानी जाती हैं, जैसे ऊंची इमारतें या गहरी खाई. यानी ऐसी जगहें, जहां पर मौत सुनिश्चित हो सके, लेकिन पक्षियों के मामले में ये बात अलग हो जाती है.
पक्षी होने के कारण वे जाहिर है कि इमारत से कूदकर तो जान नहीं दे सकते, लेकिन वे तेजी से उड़ते हुए इमारतों या ऊंचे पेड़ों से जान-बूझकर टकरा जाते हैं और तुरंत ही उनकी मौत हो जाती है. ऐसा इक्के-दुक्के नहीं, बल्कि सितंबर के समय में हर साल हजारों पक्षियों के साथ होता है. ये बात अजीब इसलिए भी हो जाती है क्योंकि ये पक्षी शाम 7 से रात 10 बजे के बीच ही ऐसा करते हैं, जबकि आम मौसम में इन पक्षियों की प्रवृति दिन में ही बाहर निकलने की होती है और रात में वे घोंसले में लौट चुके हैं. फिर क्या वजह है, जो वे एकाध महीने के लिए अचानक अंधेरा घिरने पर घोंसलों से बाहर हजारों की संख्या में आते हैं और टकराकर मर जाते हैं?
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