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  • 5 years ago
किन्नर अखाड़ा | किन्नरों को शास्त्रों में उपदेवता कहा गया है. पहली बार प्रयागराज कुंभ में शरीक होने के लिए आए किन्नरों के अखाड़े का शहरियों-श्रद्धालुओं ने जिस तरह अभिनंदन किया, वह उपदेवता की उनकी पदवी को उचित ही ठहराता है.
उज्जैन कुंभ के दिनों में 13 अक्टूबर 2015 को यह अखाड़ा वजूद में आया.
महामण्डलेश्वर और पीठाधीश्वर चुने गए और तब उज्जैन के कुम्भ में यह अखाड़ा पहली बार शामिल हुआ. प्रयागराज के अर्द्धकुम्भ में भी उनकी आमद पहली बार ही हुई थी.
छह जनवरी को कीडगंज से संगम के लिए रवाना हुए किन्नर अखाड़े की पेशवाई देखने के लिए लोग जगह-जगह उमड़ पड़े थे. रास्ते भर लोगों ने उन्हें रोककर अपने बच्चों को दुआ देने को कहा या फिर समृद्धि की ख़ातिर उनके जूठे किए हुए सिक्के लेकर घर लौटे.
और कमोबेश यही हालत संगम पर किन्नर अखाड़े के कैम्प में हुआ करती थी, जहाँ उनसे मिलने के लिए लोग लाइन लगाकर खड़े मिलते.

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