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  • 5 years ago
मेरे पहले ग़ज़ल संग्रह "काग़ज़ से गुफ़्तगू" की पहली ग़ज़ल
मतला
शर्म से लाल जो रुख़सार हुआ
बिन कहे प्यार का इज़हार हुआ
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