श्री राम सीता और लक्ष्मण माता पिता से आज्ञा लेकर वन की प्रस्थान किया। राजा दशरथ ने आर्य सुमंत को उनके पीछे भेजा सारी प्रजा इससे बहुत दुखी थी और वह भी श्री राम के साथ उनके पीछे पीछे वन को चल दी। तब श्री राम रात्रि मे प्रजा को सोता हुआ छोड़कर अपने मित्र निषादराज गुहु की राजधानी श्रृंगवेरपुर पहुंच गये।
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