मंथरा के द्वारा समझाने पर कैकेई कोप भवन मे चली गई। जब राजा दशरथ को यह पता चला तो वह कैकेई को मनाने गये। जहाँ कुपित हुई कैकेई ने राजा से अपने दोनो वर देने को कहाँ भरत के लिये राज्यभिषेक और राम के लिये चौदह वर्ष का वनवास। जिसे सुनकर राजा बेहोश हो गऐ और राम को बुलाकर उन्हें वन जाने को कहाँ।
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