पिता की आज्ञा से मुनि विश्वामित्र के यज्ञ की रक्षा करने के लिये भगवान श्री राम और लक्मण दोनों भाई विश्वामित्र के साथ चल दिये। जहाँ उन्होंने रास्ते मे जाते समय विश्वामित्र की आज्ञा से भयानक राक्षसी ताड़का का वध किया तथा सुबाहु और मारीच का वध करके विश्वामित्र के आश्रम को राक्षसो के आतंक से मुक्त किया।
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