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  • 7 years ago
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कोरबा। छत्तीसगढ़ में पावर का शहर कहे जाने वाला कोरबा राज्य के आधे से ज्यादा इलाकों को बिजली पहुंचा कर रौशन कर रहा है, लेकिन खुद का जीवन मानों प्रदूषण के अंधकार में समिटता जा रहा है। कोयले की वजह से लगभग पूरा शहर कालिख की चपेट में रहता है। सड़कों और इमारतों पर कालिख की परत आप आसानी से देख सकते हैं। इसी शहर में कुछ इलाके ऐसे भी हैं, जहां कोयले की कालिख नहीं, बल्कि जले हुए कोयले की राख मिलती है। जी हां हम बात कर रहे हैं राखड़ की, जिसकी चपेट में कोरबा के तमाम इलाके हैं। ये वो इलाके हैं, जहां पर पावर प्लांट बने हुए हैं। पेश है एक रिपोर्ट, जिसमें हम दिखायेंगे कि किस तरह से राखड़ किस तरह से यहां के लोगों के स्‍वास्‍थ्‍य को प्रभावित कर रही है। आपको बता दें कि राखड़ ही है, जिसके चलते कोरबा देश का पांचवां सबसे प्रदूषित शहर है।

क्या होती है राखड़ और क्यों है यह बेहद हानिकारक फ्लाई ऐश यानी राखड़ वह राख होती है, जो कोयले के जलाये जाने के बाद निकलती है। कोरबा में सात पावर प्लांट हैं और सभी र्थमल पावर प्लांट कोयले पर आधारित हैं। स्‍थानीय कोयले की खानों से यहां पर कोयला पहुंचाया जाता है और उसी कोयले को जलाकर ऊर्जा पैदा की जाती है। राखड़ पॉवडर की तरह होती है, जो पावर प्लांट की फरनेस के निचले भाग में एकत्र हो जाती है। इस राखड़ में आर्सेनिक, पारा यानी मरकरी, सीसा यानी लेड, वैनेडियम, थैलियम, मॉलीबेडनम, कोबाल्ट, मैंगनीज़, बेरीलियम, बेरियम, एंटीमनी, एल्युमिनियम, निकेल, क्लोरीन और बोरोन जैसे तत्व पाये जाते हैं। इन्‍वॉरेंटल प्रोटेक्शन एजेंसी ईपीए की रिपोर्ट के अनुसार राखड़ में से अधिकांश तत्व हेवी मेटल यानी भारी धातु हैं, जिनकी जद में निरंतर आने पर किसी भी व्यक्ति को कैंसर जैसी खतरनाक बीमारी हो सकती है। यानी ऐशपॉन्‍ड के आस-पास रहने वाले लोगों को हमेशा गंभीर बीमारियों का खतरा बना रहता है।

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