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  • 9 years ago
सदियों पुरानी कश्मीरियत की परंपरा को जिहादी चाहे जितना भी नुकसान पहुंचाने की कोशिश करें, लेकिन जब किसी के लिए दुख की घड़ी आती है तो सभी एक हो जाते हैं। शुक्रवार को श्रीनगर के हब्बाकदल में ऐसा ही कुछ हुआ। एक कश्मीरी पंडित महिला की मौत की खबर जैसे ही फैली स्थानीय मुस्लिम भी पीड़ित परिवार के पास पहुंच गए। सिर्फ दुख जताने नहीं बल्कि दाह संस्कार के लिए यथासंभव मदद करने। कश्मीर में 1989 में आतंकवाद के शुरू होने के साथ ही अल्पसंख्यक पंडितों को वादी से पलायन करना पड़ा। पंडितों के साढ़े तीन हजार परिवारों ने पलायन नहीं किया। हब्बाकदल कभी कश्मीरी पंडितों का इलाका माना जाता रहा है, जहां अब सात-आठ परिवार ही रहते हैं। इनमें राज पारिमू का परिवार भी है।

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