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Watch Karnsangani Episode 1 and dive into a powerful story set in a traditional village filled with emotions, family values, and hidden secrets. Meet Karn, a strong yet sensitive young man torn between responsibility and his dreams. When an unexpected incident disrupts family peace, relationships are tested and tensions rise. This first episode sets the stage for love, conflict, and intense drama that will keep you hooked. Don’t miss the beginning of this gripping journey.👇👇

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Transcript
00:00मैं हूँ गुरु शेत्र वो रणभूमी जिसकी भूरी मिट्टी महाभारत के युद्ध के बाद तेरा बरस तक रख्तसी लाल रही थी
00:26मैंने उस युद्ध में धर्म देखा अधर्म देखा विनाश देखा रक्षा देखी पर जो प्रेम यहां देखा उसकी गाथा कभी नहीं गई गई
00:41अर युद्ध में दो पक्ष होते हैं मेरे उपर लड़े गए महाभारत में तीन थे
00:48दो एक दूसरे के विरुद्ध और तीसरा इस युद्ध के विरुद्ध और ये कथा है उस तीसरे पक्ष की उर्वी की उसके महाप्रेम की
01:02ये कहानी उर्वी और काण की प्रेम का था है
01:07पुखिया में वर्षो बाद सूर्य किरन का आना हुआ है मंगल गीत काओ उस्सो मनाओ
01:17गुनिवरगर्ग हमने इसका नाम उर्वी रखा है
01:21यू तो आपकी पुत्री बहुती सुंदर बुद्धिमती एवं भागिवान है
01:27किन्तु
01:31किन्तु किन्तु क्या मुनिवर गिन्तु बड़ी होने पर इसका जीमन इसके सामने दो मार्ग लेकर राएगा
01:41एक वो जो फूलों से भरा होगा और दूसरा जिसमें अंगारे सुलग रहे होंगे
01:50अब ये इस पर निर्भर है कि ये कौन सी रहा चुनेगी इसका एक निर्णय इसका जीवन बदल देगा
02:02महरानी ध्यान रहे कि कहीं अंगारों वाली रहा न चुल ले
02:11कहीं अपना भागे ऐसे वक्ति से न जोड ले जिसका जन्द ही तुर भागे सब दूआ हो
02:19तुर भाग के है तेरा तुर मेरा भी की माहो कर जनम देते ही तेरा त्याग कर रही हो
02:28कराजित तेरे आने वाले जीवन का हर पर तेरे लिए एक निया संगर्ष एक चुनौती ले कराएका
02:40पर तुझे अकेले ही अपने दुखों से लगना हो का पुत्र
02:44माबाप संतान को आशिरवाद देते हैं पर तुने मुझ से दुर्भाग के पाया राज परिवार में शक्रिय जनम पाकर तु भाग के के भरोसे है उत्र
02:58नहीं ये किसी व्यक्ति को क्या ऐसी वस्तू को भी नहीं चुनेगी जिसके पीछे दुर्भाग्य का साया हो
03:09हम इसे सुख के फूलों की ऐसी आदत लगा देंगे कि दुख के अंगारों पर पाव रखने से पहले ही अपने पाव मोड ले
03:17इसके आस पास सिर्फ सुख और सौभाग्य ही होगा ये अंधेरे से दूर सिर्फ जगमगाती रोशनी के पीछे ही जाएगी
03:47इस जीवेन में जो तुम सुख चाहूगी वो पाना तुमारा अधिकार होगा
04:08दनर्वध्या सीखना मेरा अधिकार क्यों नहीं गुरू दूर्ण क्यूंकि तू सूथ पुत्र है
04:19तेरा दुर्भाग मैंने नहीं इश्वर ने लिखा है तेरे जन के साथ
04:26यदि तुझे वीर प्रतापी बनना होता तो तू सूथ पुत्र नहीं एक शत्रिय बनकर पैदा होता
04:36जब इश्वर ने पैदा करते समय तेरे माथे पर तिलक नहीं लगाया तो मैं तुझे अपना शिष्च बना शिक्षा का तिलक कैसे लगा सकता हूँ
04:44गुलुद्रोण एक महान दर दर बनाई मेरे जीवन के सबसे बड़ा सपन है रप्या मुझसे मेरे सपन मत चीलिए धरती की धूल माधे पर सजने के सपन नहीं देखती उसके नियती है ठोकरों में रहना और एक जोके से उड़ जाना जूठन दे मिले तो वो तेरे विए प
05:14तो शक्त्रिय से मिले दान या उपहार में दो या चार स्वांट की मुद्राएं मिलने का दे इस से बड़ा सफ्त देखना तेरे लिए पाप है
05:23धनर विद्या सीखने का उन्माद करण को महंद्र गिरी परवत की और ले चला जहां गुरूओं के गुरू महारिशी परश्राम जी रहा करते थे
05:45परश्राम जी केवल प्रामौन को ही सिक्षा दिया करते थे
05:48इसी कारण करण ने सिक्षा पानी के लिए पहली और आखरी बार जूट का सहरा लिया
05:55ब्राम्मन हो
05:57जी गुरुदेव
06:15और इसी प्रकार समय बीटा गया
06:17उर्वी को मखमली पर्दों से च्छन कराती सूरी करने शीतर लगती थी
06:25उनसे अठेलिया करना ही उसका खेल था
06:29और करण रोज पहाड़ों के चोटियां चाड़कर सूरी को आलिंगन करता था
06:47सुतो वसुत्रवायो वाको वाको वाम्या
06:55तरिवाये थां पुलेचन वादिये थांदू पहुरुषण
06:59वाल-वाल-वाल-वाल-वाल-वाल-वाल-वाल-वाल-वाल-वाल-वाल-वाल-वाल-वाल-वाल-वाल-वाल-वाल-वाल-वाल-वाल-वाल-वाल-वाल-वाल-वाल-वाल-वाल-वाल-वाल-वाल-वाल-वाल-वाल-वाल-वाल-वाल-वाल-वाल-वाल-वाल-वाल-वाल-�
07:29राजकुमारी जी, सूरज आग है, आग से ना खेलिएगा, किसी दिन आप जल जाएंगी
07:49खेला तो आग से ही जाता है ना, पानी भी कोई खेलने वाली चीज है
07:59पर्दा नहीं गिरेगा
08:14राजकुमारी जी, हमें हमारा जीवन बड़ा प्यारा है, क्योंकि इस जीवन के साथ आपके पिता जी का बचन जुड़ा हुआ है
08:21अभेदान दिया है उन्होंने हमें, अगर आपका निशाना थोड़ा टेड़ा हो जाता तो में उपर और आपके पिता जी का बचन भूल में मिल जाता
08:30मेरे निशाने पर संदेह कर रही हो, याद रखना, यह आखे गलतिया करती नहीं, हाँ, करवा ज़रूर देती है
08:42अब अपने विस्पर से बाहर निकलिए, आज आपकी प्रतिस परदा है, तेर हो जाएगे
08:46दौड में जीत उसकी नहीं होती, जो उस दौड को सबसे पहले शुरू करता है, बलके उसकी होती है, जो उस दौड को सबसे पहले खतम करता है, जो मैं करूंगी
09:16चंचन चंच वनिसकान वाइसे नसफात के जैसी, मतमाती कोई बलकाती कोई लहराती कोई बनकत जैसी, एड अंद अंद कंचन दे पर इंचन रास गंत सोगी
09:37रास कुमारी जया और विजया अंद रास कुमारी जया और विजया अंद रानिकी अनुमती चातिया
10:07माफी ना, मानते हैं हमें थोड़ी देर हो गई, पर
10:25तीन दिन की देरी? तुम्हें पैचानने से इंकार कर दू तो?
10:29तो दिल टूट चाएगा
10:31हाँ हाँ, दिल तो सफ तुम्हारे पास ही है, मेरे दिल में तो कंकड भरे पड़े है
10:36किसने कहा? यह कि तुम्हारे दिल जैसा दिल कहा
10:41अब भी नाराज है हमसे हमारी दूस्त, लाज कुमारिया तो हम भी हैं, पर इनके नकरे अलगी
10:49हाँ, जया, तो हमने आभूश्नू के प्रदरश्णी से वो जो कमाल का रत्म लिया है
10:55अरे वही, जिसे पांचों तत्व भी ना मिल के ना तोड़ पाएं
11:00ये दे, अरे ये ऐसा रत्म है ना, जो पे पहनेगा उसका भागे खुल जाएगा
11:07यही विशेश भेट्टों लाने गए थे हम उरूवी के लिए, पर मिलेगा तभी, जब हमारी सकी हम इश्रमा करेगी
11:14चीनना भी आता है मुझे, उरूवी आज प्रदर्शिनी में जो विशेश आते थी आ रहे है ना, उनके हातों में ये रत्न रखना और परखना कि वे तुम्हें जादा घूरते हैं या रत्न को
11:44कोई जरूरी तो नहीं कि हर लड़की श्रिंगार किसी और के लिए करें मुझे सजना पसंद है और वो भी सिर्थ अपने लिए तो हम भी तो सजना की बात कर रहें
12:14क्यों गई है ना धापोर घंची और किस राज का ऐसा ध्वाज होगा अकर्शक है सच हर लड़की और लड़की की बीच की कहानी प्रेम कहानी नहीं होती जैसे कि मैं और तुम दोस्त हैं वैसे ही वो और मैं अजी जाओ सब जानते हैं कि तुम्हारा अनका रिष्टा हो च�
12:44दोस्ता आता और अगर नहीं आता ना तो पच्टा आता है हस्तिनापूर का ध्वज आगे
12:53अर्चन
13:14प्राणों का मौँ छोड़ चुकी हो क्या कि यदि ये गोड़ा रुकता नहीं तो तुम पे विश्वास होना हो गोड़ों पर पूरा विश्वास है ये जानते हैंने कब रुखना है और कब नहीं
13:44कि इतनी दूर से आने वाले का स्वागत पतानों से स्वागत हार की आस लिया आए हो तो शायब मुझे जानते हैं तोड़ते दोस्ती अस्तिनापूर के राजकुमार को दंकारी है उख्या की राजकुमारी से भिढ रहे हो सुभाव में यदि हार मानना होता तो भी हार मानन
14:14सच में कोई स्वागत नहीं स्वागत तो अतितियों का किया जाता है ना और तुम अतिति में तो क्या हूं वो जो दिल के सबसे करीब है अब चलो प्रफिस फर्दा शुरूरी होने वाली होगी तिल के करीब मगर दिल मिले
14:33सावधान सावधान सावधान पुखिया राज के वासियों महाराज बहुशा और महारानी शुप्रा दस साल में होने वाली रथदोर प्रतियोगिता में आपका स्वागत करते हैं
14:54वो देखिए वो रहें उर्वी और अर्चु
14:57सर्त्य कहते हैं साथ दोनों एक साथ बहुत सुन्दर लगते हैं
15:03अपने भाग्या में उर्वी अर्जुन को ही चुनेगी और यही भविश्य दूँगी मैं अपनी पुत्री उर्वी को
15:08आप सभी का पुखिया की इस रथदोर प्रतियोगिता में स्वागत है
15:12आज स्पर्धा घोडो की नहीं रत पे सवार रथी की भी नहीं अपितु सार्थी की है
15:18के वो विशम परिस्तितियों का सामना करते हुए अपने रथी को कैसे सुरक्षित अपने गनतव्यत तक पहुँचाता है
15:26महान धनूर्धर प्रतापी अर्जुन का पुखिया में स्वागत है
15:38स्वागत ना करे माराज
15:40वो तो अधितियों का किया जाता है
15:44अपने बच्पन की मित्र की कुशलता की प्रदर्शन में तो आ नहीं था
15:52वैसे तुम त्यार तो हो ना
15:57तुम्हें हारता हो देखना बहुत ही लजज़ित कर जाएगा मुझे
16:00ये तुमने ठीक नहीं किया
16:06पुर्वी आप तो सार्थी हो
16:10आपका रथी कौन है
16:12ये है ना
16:14ये बनेंगे रथी
16:18तो वीर अर्चुल आप तयार है ना
16:28जी
16:34मुझे खोड़ों पर भरोसा नहीं पर अपने सार्थी की अकल पर करना होका
16:41जीवन भर का साथ है इनका दोनों की जोड़ी ऐसे ही बनी रहे इतने रथ है और सिर्फ तुमें एक लड़की जो सार्थी बनना चाहती हो
17:07गोड़े लड़का या लड़की नहीं देखते वो सिर्फ यह देखते हैं कि उनकी लगाम थामें हाथों में कितना साहस है
17:14अच्छा है मेरे हर युद में मेरी सार्थी बनके मेरे साथ चलना
17:24क्यों नहीं अगर मेरे पती ने नुमती दी तो ज़रूर चलोंगी
17:31और इस शंकनात के उद्धोश के साथ प्रतियोगिता शुरू होती है
17:46कर्ण अब तक हमने तुम्हें जो भी शिक्षा दी है उसकी परिक्षा की घड़ी है यह
17:57तैयार हो
17:59कर दो
18:14कर दो
18:19कर दो
18:24कि कि रगने कहाओ.
18:30क कि रड़ी धुह।
18:54ये तो अंदिरी का लिको फाई
19:24तुम्हारे सामने एक व्रक्ष है उस व्रक्ष की टहनियों में शंक छुपा है तुम्हें उस शंक पर लक्ष साधना है
19:43अब यह ऐसा भी होगा कि युद्ध में तुम्हारा शत्रु माया भी हो तुम्हें दिखाई न दे या फिर तुम्हारे नेत्र तुम्हारा साथ छोड़ दे ऐसे अंधेरे को पार करने की चुनोती है तुम्हारे सामने
20:01लक्ष साध हो
20:28इस गुफा में तो बहुत अंदेरा है उद्वी
20:30कैसे पार कर पाओगी अर्जुन इस वर ने में पार शिंद्रिय ऐसे मुश्किल समय के लिए दी जब रास्ता दिखे न तो रास्ते को सुनो ये कबूतरों की आवाजी हमें रास्ता दिखाएगी
20:45कि
20:49कि
20:55कि
20:57कि
20:58कि
21:12कि
21:22बज़ लजन वा
21:52किया हुआ है कि वीर अर्जुन जो अपने निशाने के लिए जाने जाते हैं आज सारे तीर गलट छूट रहे हैं आपके तुमी ने अपना हाथ दिया था
22:16मित्र हो मेरे हाथ तो क्या देने के रिए तो अपनी जान भी दे सकती है तुमारे लिए पर इस बार हाथ नहीं दिया था इशारा गिया था कि दाहिने और आजाओ आगे पतली पक दंडी है रत का संतूलन बना रहेगा
22:31आन धनुर्धर वो होता है जिसे युद्ध में अपने लक्ष के अतिरिक तोर कुछ दिखाई नहीं देता
22:50लक्ष यदि सामने हो तो उस पर निशाना साधना आसान होता है किन्तु लक्ष यदि दिखाई ना दे तो इस चुनोती में तुम्हारा लक्ष तुम्हारे पीछे है कर्ण
23:09बिना देख और बिना संतुलन खोय लक्ष पर निशाना साधो कर्ण
23:39कर्ण
24:09पर कि ब squeeze की का जो कि ध el किक पिरेटान सिय भर सकझ के उंद सब गरूंगन
24:19कि अन्मा का जिक के ठे करें काल मुच्छ गलन
24:25कि अन्मार मार करट दաղ करें
24:30जातिम में नtoire हुआ जाति का जिए ए ए나�ाव
24:36एक ही पार करना असंबल है
25:06क्या हुआ रुक्यों गई अर्जुन परिक्षा मेरी है तुम्हारी नहीं तुमसे मदद लेना चल होगा पुरी प्रेम और युद में चल हो या बद जीत देखे जाती है
25:32ऐसी जीत का क्या फाइदा जो दुनिया को दिखे पर अपना मन ना देख पाए ऐसी कहावते उन लोगों ने गड़ी है जिनके लिए उनका स्वार्त उनके सिंदान तो उसे कहीं बढ़कर है
25:41मेरे गुरुची श्री क्रिष्णा ने मुझे यहीं सिखाया है कि चतुर बनू पर कभी कपट मत करूं हारी हुई अच्छी नहीं लगों कि
25:51मेरा दोस ऐसी बाते करते हुए अच्छा नहीं लग रहा है
25:54कर्ण हमने तुमसे कभी यह नहीं पूछा कि एक ब्राम्मन होते हुए भी शत्रियों के भाती तुमने शस्त्र विद्या क्यों सेखी
26:06कुरुदेव विद्या पे तु सभी का सम्मान अधिकार होना चाहिए ना ब्राम्मन हवन ही क्यों करें एक शत्र चाहे तो वह संगीत क्यों ना सीखें
26:22और शूत्र शूत्र सरफ सेवा ही क्यों करें
26:31अधियों अधियों विचार है अब जड़ा यह भी देखें कि तुम्हारे बान भी क्या उतनी ही उची शमता रखते हैं जितनी उची तुम्हारी सोच है
26:46कि आए
26:49कि
26:51कि
26:57कि
26:59कि
27:11पुर्वी इस प्रतियोगिता में सिफ राजकुमार नहीं साधारन स्तर से आए प्रतियोगी भी है लोग क्या कहेंगे उख्या की राजकुमारी एक साधारन इंसान से हार कहीं
27:21प्रतियोगिता में प्रतियोगी का कौशल देखा जाए उसका जन्म नहीं मनुष्य का जन्म उसके हाथ में नहीं होता पर हां उसका कर्म
27:33उसके हाथों में होता है इश्वर ने चोकिया उसका अंक्लन ना हो जन्म होने के बाद मनुष्य ने क्या किया उसके आधार पर वो छोटा या बड़ा शक्ति शाली या कमजोर ज्ञानी या अज्ञानी ये तैह मैं किसी राशकुमार से हारूया जीतू या किसी साधारन से म
28:03कि एक लड़ाई चल रही है एक खाई है उस पर एक पुल बना हुआ है जिसे किसी की योग्यता पर अविश्वास करके किसी और ने बनाया है
28:16यदि तुम्हें समानता पर इतना ही विश्वास है तो उस पुल को अपने बाणों से भेदो
28:28पुत्तर की ओर दस कोस आगे और प्रमानित करों कि तुम्हारे विचारों में कितनी सच्चाई है और इरादों में कितनी शक्ति
28:40करण उठाओ धनुश यदिहास वर्तमान को पुकार रहा है भेदो लक्ष
28:52उत्तर की ओर दस कोस आगे
28:57तुम ये से तु तोड रहे हो या मैं तोड़ू दोस्त को लजाना तो नहीं चाहती तुम्हीं सोच लो
29:24ये अर्जुन के बान उसे बना हुआ से तु इसे तोड़ने का सामर्थि सिफ मेरी तीर रखते हैं
29:32अर्जुन के बान उसे तुम प्रूब्ट
29:44ये तुम ये अर्जुन के पुम्हीं
29:47इस तुम प्रूब्ट
29:52कि अओ भाई रडसे पारो पुमारी को एिए मुटिस पुमारी को अगाए जब पारो जाइ।
30:22हुआ है हुआ है
30:52झाल, झाल, झाल
31:22झाल, झाल, झाल
31:52झाल, झाल, झाल, झाल
32:22झाल, तुम अपनी सारी परिक्षाओं में सफल होए
32:25भेश्म के बाद
32:27तुम ही हमारे सबसे योग्य और मेधावी शिश्य हो
32:31आश्यव, एक ब्राममण होते हुए भी
32:35शत्रियों से अधिक कूझ है तुमहारे धनुश कि टंकार नो
32:40ये विजया धनुश है भगवान विश्व गर्मा के हातों से निर्मित इस पर चड़ाया गया प्रतेक बांड शत्रूओं के लिए काल समान होगा
33:01जब कभी तुम इस धनुश का प्रियोग करो तुम कभी पराजित नहीं होगे आज से ये तुम्हारा हुआ कर इसे सुईकार करो
33:24बधाई नहीं दोगे आदा श्रे मेरा भी है जो मैं रच से नहीं किरा
33:29वैसे तुम्हारा डेले बरका श्रेया नहीं पर गहते हैं न दोस्ति में सारी चीज़े बाट लेनी चाहिए तो ठीक है बाट लिया श्रेया
33:40आज जब तुमने मुझे अपना रथी चुना तो मुझे लगा कि घायल हो जाऊंगा घायल तो नहीं हुआ पर कायल अवश्य हो गया अपने गुरू की बात मानते हुए तुमने पुरे सचाई से जीत हासिल की है आज एक नहीं सीख मिली
33:56कंगनों वाले हाथ भी लगाम संबाद सकते हैं लगाम तो हमेशा से ही कंगनों वाले हाथों में ही रही है जीवन रत की भी वैसे आज तुम्हें और एक सीख दे देती हुँ
34:12कि बविश्य में अगर कोई यूद लड़ो तो सार्थी सोच समझ कर चुणना एक कुशल सार्थी भी चैपराजे के बीच का अंतर बन सकता है
34:22एक ब्राम्मन होते हुए भी शत्रियों से अधी कूझ है तुम्हारे थनुष की टंकार में
34:41मुझे धन और विद्या सीखनी थी कुरुदिव लेकिन मैं जहां भी क्या हूं सबने मेरी जाहती देखी
34:54मेरी तड़प नहीं ऐसे मैं मुझे लगा
35:06कि आप भी कही मुझे मला ना करते हैं
35:12तो इससलिए मुझे जूट का सहर ने न पुड़ा
35:21मैंने आप से जूट कहा था गुरुदिव
35:27मैं पराम में नहीं हूं
35:32एक सुट पुटू
35:35पढ़ में आप स्ब्स्चाइब
35:47सृट
35:49स्थट
35:53झाल झाल
36:23झाल
36:53गर्ण
36:54तुम्हारे पेरों से इतना रक्त बहरा था
36:58तुमने हमें उठाया क्यों नहीं
37:00खुरुदिफ
37:01अगर मैं हिलता तो आपकी नीन्द टूचाती न
37:05और मेरी पीड़ा आपकी नीन्द से बढ़कर तो नहीं है न
37:09नाई
37:10इतनी पीड़ा सेहन करने की शक्ति
37:14एक शक्त्रिय में ही हो सकती है
37:18तुम ब्राम्मन नहीं हो
37:23छला है तुमने हमे
37:26सत्य बोलो
37:28गुरुदिफ
37:35प्राम्मन नहीं हो
37:41इवर प्शुदिफ
37:47चल्स पाया ग्यान
37:54गपत्स पाया सम्मान
37:57चोनी से पाया धन
37:59और अ शुदधातो से धिया गया हवन
38:02अभी पंदान नहीं है
38:04हम तुम्हें शाब देते हैं काल
38:09कि युद्ग भोमी में
38:13जब कभी भी तुम्हारी बरावरी का योद्धा तुम्हारे सामने होगा
38:17और हमारी दी गई शिक्षा की तुम्हें सर्वादी कावचिकता होगी
38:21उस एक्षन
38:22उस एक्षन
38:24हमारा दिया गया सारा ग्यान
38:27तुम भूल जाओ भे
38:29और ये विजया दानुश्मी
38:33तुम्हारे कोई काम नहीं आएगा
38:37शाप देते हैं तुम्हे
38:38शाप
38:40सुनो
38:52अपनी बदाई तु ले जाओ
38:57सब्सक्राइब आएगा
39:27एक को मिले भागे में फूल, और दूसरे को भागे में मिला शाह।
39:57समय बीटता गया, कौरों और पांडों के गुरू द्रोन से शिक्षा पूरी हो गई, और आज वो दिन आ गया था, अब राजपरिवार और पूरे हस्तनापुर के सामने उन्हें अपने कौशल का प्रदर्शन करना था
40:27पूरे विधी विधान के साथ ये पूजा संपन हुई राजकुमारी देश्ठेर, अब आप सब माताकुंती से आश्रवाद लेने हैं तू प्रस्थान करें
40:57विजयी भवा मारंग भूमी में सिक्षा प्रदर्शन है रण भूमी में युद्ध नहीं जिसमें विजय पानी हूँ युदेश्टित जीवन का हर पल एक संग्राम है कभी और से तो कभी स्वयम से और जो संग्राम स्वयम से हो उसे लड़ना और जीतना सबसे कठिन होता ह
41:27हम हर चुनावती के लिए तैयार है
41:30प्रदर्शन नहीं प्रतिस परधा भांजे तुर्योधन प्रतिस परधा
41:38जो मन्ना समझे मोका वो मोती क्या पाए
41:48जो सूरत संग्ना होगे उसकी धोती चोर ले जाए
41:56आज अगर हस्तना पुरका सिंगासन बोल सकता तो खेता
42:03आज लिड़ने होगा कि मुझे पे कौन विराज़मान होगा
42:08मामा शकुनी
42:10वीर भोगे वसुंद्रा
42:14उस सिंगासन पर तो सिर्फ मेरा ही नाम लिखाए
42:19आप चिंता कर अपनी हटिया नाग लए
42:22चिंता बहुत आवशक है भांची चिंता इंसान को चोकन ना रखती है
42:28आत्म विश्वास बड़ाई अच्छा गुण है
42:31परती तो किसी चीज की भी अच्छी नहीं
42:35मामा शी आप बस देखेगा
42:38आज रंग भुमी में सिर्फ मेरी गदा की ही गर्जन होगी
42:44होना आया है भांजे बांडवों के पिछल अगुण पुख्या के महाराज और महाराणी और वो अर्चुन की उद्धंड प्रियसी पुर्वी
43:06जया विजया लो हम पहुच गए हस्तिनापूर के वसंत महल में अर्वी कहां उठ चली
43:17अपनों से मिल ले तब तक तुम तीनों वसंत महल की सुंदरत अपनी आखों में कैद कर लो ठीक है
43:27अर्वी मिना अस्तिनापूर पहुंचते ही रत के पहिए इसके पैरों में लग जाते हैं जैसे बताओ मैं बताओ क्योंकि हमारी राजकुमारी जी यहां पली बड़ी है दूसरा घर है राजकुमारी जी का पर तुम ही क्यों आग लग रहे हैं
43:42आदर अब यदान मिला है हमें वो गर्दन का मिला है जुबान काट लेंगे जैया उरुवी तो गई अपनों से मिलने
43:54महाराज धृत्राष्ट्र और महारानी गांधारी पितामहा भीश्म के साथ पधार रहे हैं
44:03अंतता है आही गया वो जिवास जब राजकुमार अपनी शिक्षा पूर्ण कर अपना युद कोशल दिखाएंगे
44:10आरे जिनके उपर भीश्म पितामह गुरु द्रोन जैसे गुरुओं का हाथ हो वो तो सर्वश्रेश्ट होंगे
44:18सर्वश्रेश्ट तो केवल एक ही होता है गाधारी और वही बनेगा हस्तिनापूर का भावी उम्राच
44:25उंदरी
44:43कितनी बार कहा है उंदरी नहीं उर्वी उंदरी तो चुहिया को कहा जाता है
44:53आँ तो उसमें अंतर ही क्या है उंदरी और ओर्वी कहीं से भी निकलाएं किसे पता लगा
44:58गांधारी मा प्रणाम जीति रहो पुत्री प्रणाम जीति रहो
45:14आप बताए आपने आज भी सफेद क्यों पहना है
45:22सफेद वस्तों पर दाग लगें तो वो देख जाते हैं
45:25कभी लगे तो उन्हें देखकर अपनी भूल सुधार लो
45:29पर ऐसा तो कभी होगा ही नहीं
45:30वो तो भविश्य ही जान पाएगा और इत्यास ही बताएगा
45:34कांधारी मा आज तो इतना बड़ा दिन है आप अपनी इस पट्टी के साथ अपने बेटों का रंकोशल कैसे देख पाएंगी
45:40मैंना आपके साथ अर्वी तुम्हारा यहां स्वागत है किन्तु अपनी मर्यादा ना भूलो बिल्कुल ने
45:52कुंती मा
45:56उर्वी इस महल के बच्ची है अथिती में और बच्चों से मर्यादा नहीं प्रेम मांगते हैं
46:09और वैसे भी मुझे पूरा भरूस है कि हमारी उर्वी बच्च्पने में भी अपनी मर्यादा नहीं खुली है ना
46:18मैं तो गांधरी मा से कह रहे थी कि रंगभूमी में उनके साथ बैट कर प्रदर्शन में जो भी हो रहा है उसका शंशन बताऊंगी
46:27आईए मा चलिए इताश्री आईए
46:39कितना इंतजार करवाया मुझे मीठे हूं ना इंतजार का फल पाच बेटे है में अकर बेटी होती तो परिकुल तेरी जैसी होती
46:49क्यों मैं आपकी बेटी ने ना तुझे तो पहू बनाऊंगी अपर
46:58कि अगे अगे अगे
47:13कि अगे
47:17एक माहान दन अगर बनना ही मेरे जीवन के सबसे बड़ा सपना प्रप्या मुझसे मेरे सपन मत चीड़ी
47:22तो सूथ पुत्र है तेरा दुर्भाग मैंने नहीं इश्वर ने लिखा है यदि तुझे वीर रतापी बनना होता तो तु सूथ पुत्र नहीं एक शत्रिय बनकर पैदा होता
47:31अगर बिद्या सीखना मेरा अधिकार क्यों नहीं गुरुदेव
47:33खरती की धूल माधे पर सजने के स्वप नहीं देखती उसके नियत है ठोकरों में रहना सर जुका कर लेना सी क्योंकि वही तेरा हिस्सा है
47:42और्वी आई है अरजुन से अपनी मितलतानी भाने कौन आया है अपनी पहचान बनाने
47:52पर होनी आई है इन दोनों को एक दूसरे के सामने लाने
48:12कैसे होगी इस प्रेम कहानी की शरुवात

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