00:10दिवाली पर हर कोई अपने घर को रोशन करने की तैयारी में है।
00:30इसा मंच दिया है जहां वे अपनी प्रतिभा दिखाने के साथ आत्मिर्भर बनने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं।
01:00संस्थान में उन्हें मुम्बतियां बनाने के साथ साथ राखियां सजावटी सामान तयार करने और बुनाई जैसे काम भी सिखाए जाते
01:06हैं।
01:07छे अध्यापिकाएं बच्चों को उनकी शमता के अनुसार प्रशिक्षड देती हैं।
01:11देखे जब स्पेशल बच्चा है तो नॉमल स्कूल में उसकी बुलिंग तो होगी।
01:17जो मर्जी कहें क्योंकि वह उन बच्चों का भी ग्सूर ही,
01:20जो नॉमल है उनको दिखता है कि यह क्या है तो वह एक मज़ाग का पात्र बन जाता है।
01:25जब यहां आता है तो हमारा यह रहता है कि
01:30independent living is our independent living
01:33prepare for parents for relief
01:37for mother and father for 5-6 hours
01:39after that they learn something here
01:43so that they learn to implement it in their home
01:48so that their parents don't have a responsibility
01:52tomorrow they have siblings or anything
01:56parents don't live, generally parents say
01:59when we don't live, then what will happen
02:00I say to myself, what do we do for our children
02:05our parents need to do our efforts
02:06our parents need to do our efforts
02:10tomorrow we don't have to do our siblings
02:13or any other family
02:16at least self-help
02:18daily living
02:21ुڑान संस्थान की शुरुवात साल 2003
02:23में करीब 10 विशेश बच्चों के अभिबावकों के प्रयासों से हुई थी
02:28शुरुवात में केंद्र को विरोध का सामना करना पड़ा
02:31लेकिन अभिबावकों ने हार नहीं माली
02:33आज आस पास के लोग भी संस्थान से जुड कर बच्चों की मदद कर रहे हैं
02:382004 से मैं जुड़ी हुई हूँ
02:412002 में रिटायर हुई थी उसके बाद से
02:44मैंने यही सोचा कि मंदिर मस्चिद यही है मेरे लिए
02:47तो मैंने यही आना शुरू किया
02:49और बहुत लोगों को मतलब की कंपैल किया कि आओ देखो भुवान ने हमें क्या कुछ दिया
02:55पर बहुत असर पड़ा बहुत कम्यूनिटी हमारी समाज इसमें जोड़ा है हमारे साथ ना
03:01तो तब से लेकर आज तक परिवर्तन तो बड़ा हुआ है
03:04बच्चे कुछ खाना सिखते हैं, खेल भी करते हैं, क्एल भी करते हैं, तो इनको थोड़ा पे प्रोचसान चाहिए होता
03:11तो वह हमें देए ने होता है
03:13इनको प्रोचसान की जरूरत और कुछ मिह हैं
03:19and the other people who are retired, who are also here to come to see them and give them their
03:32time.
03:33They help them to eat their food and also help them.
03:40and there are many people who have been looking for their help.
03:44And in the same way, there are many children who are very hard to do this.
03:49I want to appreciate them all the time,
03:53who are watching and watching.
03:55And teachers, who are such a good time,
04:01they have to give them time to give them.
04:04So I want to give them a lot of time.
04:09Sanstha میں فلحال 42 विशेस बच्चों को सिक्षा, ठेरपी और कौशल विकास की सुविदाएं दी जा रही है
04:15यहाँ 36-38 वर्ष तक के लोगों को उनकी जरूरत की शमता की अनुसार प्रशिक्षन दिया जाता है
04:22बच्चों को इस काबिल बनाने की कोशिश की जाती है कि वे अपने रोजमर्रा के काम खुद कर सकें
04:28जब ETV भारत की टीम उडान संस्था की केंदर पर पहुंची तो हमें देकर बच्चे खासे उत्साहित नजर आए
04:34कभी घरों तक सीमित रहने वाले और छोटी-छोटी जरूरतों के लिए परिजनों पर निर्भर रहने वाले इन बच्चों ने
04:40खुलकर अपनी बात रखने का प्रयास किया कैमरे के सामने आने में भी उन्हें कोई जिजक नहीं थी
04:46चाजिमा, चन्ने, चाजिमा जावर, आवे मताल, तोपली, प्राव, सब ये गाम कते ही है
04:57आज कलर पन गिया है आज में साथ लाने में जित्ते रोड सब पैस हुटा है
05:04नहीं प्याँ से अच्छे का शाथ लाने में जिम्रा जाए हूँ
05:09दावल क्या सिख्चो उप्षू
05:13नहीं स्कूल ने पर ताओं
05:16नहीं में
05:18कोया में साथ
05:21आज कर दू कांगे के
05:24मैंने कित्तो की शो रेके
05:27मैंने कित्तो की विश्टावाज बावाज पांदो अनी
05:32लो रेके
05:34धांक्यू
05:35स्कूल में आना अच्छा लगता है
05:36What conference is it?
05:38Adik, Sanwaya, Aaruz, Bona
05:44Who is your favorite teacher?
05:46Yes
05:47Your name is Leda
05:49My name is Leda
05:50What is your name?
05:52My name Arshita Thakur
05:53What do you teach?
05:55I make candles that you can see
05:58I make a banana, crochet, fly
06:03How do you feel at school?
06:06It feels good
06:07Who are your friends?
06:10My friends
06:15I have to put on the clothes and put them in the bag
06:19Then I put them in the bag
06:21Then I open them in the bag
06:24Then I make candles
06:26ुरान संस्थान को दिव्यांगता की शेत्र में बहतर काम करने के लिए हिमाचल प्रदेश की स्टेट नोडल एजनसी भी बनाया
06:38गया है।