सवाईमाधोपुर. सरकारी स्कूलों में बेहतर शिक्षाए गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई और स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराने के दावे खूब किए जाते हैं। बच्चों को स्वच्छता का महत्व समझाने के लिए अभियान चलाए जाते हैंए रैलियां निकाली जाती हैं और हाथों में तख्तियां थमाकर आमजन को जागरूक करने की जिम्मेदारी भी नौनिहालों को सौंपी जाती है। लेकिन जब इन्हीं बच्चों के लिए स्कूलों में बुनियादी सुविधा जुटाने की बारी आती है तो व्यवस्था की पोल खुल जाती है। जिले के 65 सरकारी विद्यालय ऐसे हैंए जहां बच्चों के लिए शौचालय व रसोई तक उपलब्ध नहीं हैं।
बच्चों से स्वच्छता का पाठ पढ़वायाए खुद व्यवस्था करना भूले
ष्एक कदम स्वच्छता की ओरष् जैसे नारे स्कूलों में खूब सुनाई देते हैं। स्वच्छता अभियान के दौरान विद्यार्थी हाथों में तख्तियां लेकर रैलियां निकालते हैं और लोगों को साफ.सफाई का संदेश देते हैं। बच्चों को बताया जाता है कि स्वच्छता स्वस्थ जीवन का आधार है और गंदगी से बीमारियां फैलती हैं। लेकिन जिले के 44 विद्यालयों में शौचालय का अभाव इस अभियान की गंभीरता पर सवाल खड़े करता है। हालात यह है कि जिन बच्चों को स्वच्छता का संदेशवाहक बनाकर समाज के सामने खड़ा किया जाता हैए उन्हीं के विद्यालयों में आवश्यक सुविधा उपलब्ध कराने की जिम्मेदारी पूरी होती नजर नहीं आती। किशोरियों के लिए ज्यादा गंभीर परेशानी विद्यालय में शौचालय नहीं होना सभी विद्यार्थियों के लिए परेशानी का कारण हैए लेकिन किशोरियों के लिए यह समस्या और भी गंभीर हो सकती है। कई बार ऐसी परिस्थितियां छात्राओं की नियमित उपस्थिति और पढ़ाई जारी रखने में भी बाधा बन सकती हैं। सरकारी विद्यालयों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए समय.समय पर विभिन्न योजनाएं संचालित की जाती हैं। स्वच्छता और विद्यार्थियों की सुविधा को लेकर भी जोर दिया जाता है। इसके बावजूद जिले के विद्यालयों में शौचालय का अभाव कई सवाल खड़े करता है।
अब नारों से नहींए धरातल पर काम करने की जरूरत
सरकारी स्कूलों में पढऩे वाले बच्चे भी बेहतर सुविधाओं के हकदार हैं। उनके लिए शौचालय जैसी अनिवार्य व्यवस्था उपलब्ध कराना किसी विशेष सुविधा का एहसान नहींए बल्कि बुनियादी जिम्मेदारी है। ऐसे में शिक्षा विभाग को इन 44 विद्यालयों की स्थिति का आकलन कर प्राथमिकता से शौचालय निर्माण और आवश्यक सुविधाओं की व्यवस्था करनी चाहिए। ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्ण्
इनका कहना हैण्ण्ण् जिले में 65 ऐसे विद्यालय है जिनमें बिल्डिंगए शौचालय व रसोई तक नहीं है। इनमें से सरकार से 39 स्कूलों की प्रशासनिक स्वीकृति आ गई है। वित्तीय स्वीकृति व बजट आने के बाद स्कूलों में काम शुरू कराया जाएगा। शेष स्कूलों की प्रशासनिक स्वीकृति का इंतजार है।
देवीलाल मीना, मुख्य जिला शिक्षा अधिकारी, सवाईमाधोपुर