00:06और चबेली जी कैसी लगी रस्याओ अच्छा था सिर्फ अच्छा अरे हमको तो बहुत अई पसंद है हम तो कह
00:14रहे हैं आप भी बनाना सीख लो अम्मा से और हमको जिन्दिगी बार फिर खिलाना
00:18अच्छा चबी लीजे मालो मैं आज हम लेट क्यूं हुए नहीं हम शहर गएते आज शहर हाँ वो क्यों आपके
00:28लिए कुछ लेने अच्छा का लाए हो आखे तो बंद करो अरे बाबा करो तो सही
00:44अब आखे खोलिये पायल सर्प्राइज
01:07इसके क्या जर्वती है क्यों आपको अच्छा ने लगा बहुत ही सुन्दर है
01:21अच्छा पायल की कीमत वसूल कर रहे हूं
01:33कावा
01:38तुने का कर दिया च्छा पेली
01:40लोग भी न सही कहते हैं उत्तो कुगी और छिनार को इज़त कभी रास नहीं आती है
02:07हम आ गए वनुहर जी दर्वाजा खोलिए
02:16लबता है अमें तक नारास है
02:37बेटा चल नाश्ता कर ले बहुने रसियाओ बनाया है
02:41अमा अच्छी चीज रोज रोज खाने से वैसे भी उसकी वैल्यू खतम हो जाती है
02:48और मुझे टाइम नहीं है लेट हो रहा है मुझे
02:51अहां अरे सुनतो बेटा
03:01का हुआ आप हम से कल की बास से नाराज है का
03:08हम कौन होते हैं आपकी बास से नाराज होने वाले
03:29अरे ओ मनेर बिटवा
03:35सब ठीक तो है ठीक हूँ काका चुपके से विवा कर लिए और हमको बताए भी नहीं
03:41पहले ते बोलते थे हम बजरंग बली के भक्त हैं ब्रह्मचारी हैं
03:46काका जब हम ब्रमचारी थे तब आप कहते थे विवा करो आज जब कर लिये हैं तो आपको पीड़ा हो
03:53रही है चलिए चलते हैं प्रणाम
04:00दो दिन के अंदर दाल चारु का भाव मालूम पढ़ गया लगता है
04:13जयराम जी के परधान जी जयराम जी के पधारी है जयराम जी की परधान जी क्या बात है आज गंगा
04:26उल्टी केसे बह रही है
04:28क्या बताएं परधान जी मन के प्यास इतनी बढ़ गई है परधान जी कि गंगा को उल्टी बहना पड़ा
04:37परधान जी बात ये है कि सेट्ची को चवीली के कुवा में डूबकी लगाना है
04:44तुमने हमको क्या दलाल समझ रखा है
04:47हर चीज की एक कीमत होती है परधान जी
04:50हम जानते हैं कि तुम्हें इलेक्शन में पार्टी का टिकट चाहिए
04:56और ये तो तुम्हें पताई है कि टिकेट तक हमारी पाहुच है
05:01बस एक बार उस चवीली को हमारे नीचे लेहाओ
05:06पैसा जो तुम चाहो
05:07वो क्या है ना
05:09जब दोनों हाथ में लड़ू मिल रहा हो
05:12तो मुव बंद रखने में ही फायदा है
05:14तो आज रात चवीली हर हाल में हमारे नीचे होनी चाहिए
05:19अब वो कैसे हो ये आप के उपर है
05:23आज नहीं, कल
05:25कल क्यों, आज क्यों नहीं
05:28क्योंकि कल नेता जी आने वाले है
05:31चवीली शेहर में नहीं
05:32इस वक्त तुमारे ही गाउं में
05:35हमारे गाउं में?
05:38ये तो वो ही मिसाल हो गई
05:40कि बगल में चोरा और गाउं में धिंडोरा
05:49अरे, इस सब का देख रहे हैं हम?
05:51सलाज जमीन और आस्मान सब एके तल में?
05:57कलवल छोड़िये पिये साव
05:58आप एई बताइए कल नेता जी कितने बज़े आ रहे हैं
06:02भाई परधान जी
06:03नेता जी तो आब आने से रहे
06:04क्या मतलब?
06:06अरे मतलब साफ है
06:07मंत्री जी संसत के काम से दिल ली गए है
06:10और पूरा एक महिना वहीं ठहरेंगे
06:12समझ गए ना?
06:15परधान जी
06:16हम कुछ नहीं जानते
06:18एक महिना तो दूर की बाद
06:20हम एक दिन भी परधाश्ट नहीं करेंगे
06:22अब आप पर है परधान जी की
06:24चाहे मुर्थी बन करो या खोलो लेकिन
06:26आज
06:26आज अभी लिए हमें चाहिए
06:28मतलब आज ही चाहिए
06:30बस अब हम और कुछ नहीं जानते
06:32चलो
06:32आज आज आज चलते
06:36आच्छा परधान जी
06:37अब हम भी चलते हैं
06:39परणाम मिलते हैं चलते
06:40हाँ परणाम
06:55का सोच रहे हैं
06:59सोच रहे हैं बचवा
07:02कल का काम
07:04आज ही क्यों ना कर दे
07:07परधान जी
07:08अपना वेलू
07:09और सेट का भूख बढ़ाईए
07:11मतलब अरे मतलब ये
07:14कि कल सुबा छवेली को
07:16लेने चलते हैं
07:17और वहीं पर डगरु को बुला कर
07:20कोठे पर एक रात की
07:22बोली लगवा लेंगे
07:27ये से
07:28चल
07:29मतल
07:32जो तो, जो जो जो है
08:00पैसा नहीं करना चाहे था अरे वीचारी उसी हालत में पली तुमारी पत्नी थोड़ी है उसे जो समझ आया उसने
08:09कह दिया और तुम भी तो लेकिन हम चाहबिली जी से कोई फायदा थोड़ी ना उठा रहे हमको प्रेम हो
08:17गया है लेकिन कल जब वो चली जाएंगी तो का होगा
08:23अगर वो रहना चाहे तो कोई बात नहीं हम रख लेंगे और अम्मा भी तो बहुत मानती है लेकिन अम्मा
08:32को पता चला कि छबीली छेनार है तो क्या सोचेंगी छबीली जी को बहुत स्विकार करेंगी की नहीं करेंगी लेकिन
08:39रखना तुझे अम्मा को नहीं अरे विकार मे
08:43बहस कर रहे हैं पहले यह तु पता चले कि छबीली जी का मन में है क्या
08:54आज इतना लेट कैसे हो गया नहीं वो स्कूल में आपको न जूट बोलना भी नहीं आता है
09:05कोई एक बात से इतना नराज होता है क्या और वैसे भी कल तो हम चले ही जाएंगे
09:13तो आज की रात हम आपकी बहुत हसीन करना चाते हैं
09:43आज की बहुत है
10:00झालिया उपालिया जोह।
10:14आ्यू मे व..
10:19प्रधान तुमको ले जाने के लिए अरे आओ जल्दी जल्दी आओ कोई नहीं है अरे जल्दी आओ पैटते हैं तब
10:29तक आंगन में आओ जल्दी
10:33हम जाके देखते हैं अरे ओ प्रधान बिटा हमरी बहू को ऐसे कैसे आवाज दे रहे हो
10:53बहू बहू किसकी बहू कौन सी बहू
11:03यो कई भआल कोई कि य्लागा के रखिये अरे जल्दी रानी कोई नहीं अओ तुम्हों को तुम्हारे अस्ली जगा 31
11:11आया हूं में
11:12है अ दो अ
11:17पहु ये क्या बगबग कर रहा है और ये तुमको छबीली रानी कहे कह रहा है
11:25अमा हम बातातें आपको अमा अप अंदर जाएए हम कहे जाएं ये कमीना
11:31ये पुढिया जमान समाल कर बात कर ना तो ये तेरी पहु ना तेरे बेटे की पत्ति
11:43ये तो कोठे पर धंदा करने वाली अपना जिसम बेचने वाली छिना रहा है
11:55आज ये सारा ड्रामा में खतम करके रहूँगा पेरा सारा ड्रामा खतम खतम
12:10तुम रुको हम अभी आते हैं ठीक है हम यहीं इंतजार कर रहे हैं तुम्हारा हमरे पास टाइम नहीं है
12:17जल्दी आओ
12:41चलो
12:51चलो, आओ चे बिली रानी, आओ
13:18पेटा, यह जो प्रधान कह रहा था, कहाई सब सच था, हाँ, हाँ माँ, पर
13:38पेटा, हम तो हरी आग में जबीली के लिए प्रेम देखे हैं
13:47भले ही सब डरामा हो, लेकिन हम अपने मन से चबीली के अपनी बहों और अपनी बिठिया माने हैं
14:04पेटा, तुझा के प्रधान को साफ साफ कह दे, कि चबीली चाहे जो भी रही हो, लेकिन आज वो तुमरी
14:15पत्नी
14:16और हमरी बहु है, जा पेटा, रोक ले चबीली को, जा, लोके तो हार माई के दूद के सौगन, जा
14:28पेटा, जा
14:47चबीली जी
14:55कहा जा रहे हो आप, वहाँ आपको अम्मा जैसे और हमारे जैसे कोई मिलेगा, हम बानते हैं कि हमारा मकान
15:02का अच्चा है, हम कमा कर आपके लिए पक्का मकान बनवाएंगे
15:09हे मास्टरवा, अरे तुमको पता नहीं है, ये कौन है, अरे ओ प्रदान, जवान समाल के बात करो, ये हमारी
15:24पत्नी है, और हमारी पत्नी से अपशक बात करोगे न, तो राख लगा कर न, पफीली निकाल लेंगे
15:38मनोर जी, ये का कर रहे हैं आप, आपको तो सब कुछ पता है न, कि हम इस समाज में
15:45नहीं रह सकते हैं, आप लोगों के कितनी भेसती होगी, क्या बात कर रहे हैं, अरे कौन सा समाज, वो
15:52समाज जो तुम्हें नौचने के लिए गिद्ध की तरा बैठा हूँ है, जो मंदिर �
15:59जैसे घर में नहीं तुम्हें कोटे पर पिठाना चाहता है, है जवाब तुम्हारे पास, चबिली, हमें ऐसे समाज की कोई
16:08जरुवत नहीं है, हमारी अम्मा को एक बेटी और बहु दोनों ही मिल गई, और इससे जादा हमें कुछ नहीं
16:16चाहिए, अम्मा को हमें बेटी और �
16:20जवाब दोनों दिख गई, आपको हमें कहा दिखता है, चबिली जी, एक सुन्दर और जिसकी आत्मा पवित्र गंगा जल की
16:31तरह है, और उस गंगा जल को मैं अपने जीवन का आखिरी घूट बनाना चाहता हूँ
16:49चलो, बहुत होगे सिनेमा कर नाटक वाटक, चलो, प्रधान निकल लो यहाँ से, वरना अब हम रूद्र नाटक करेंगे, तो
16:56चल कर राख हूँ जाओगे
17:00क्या, साली अपनी योगाद प्यागी तुम काट बढ़ो होटा है
17:06अब तो निकल ले में ही बलाए है
17:33अब तो निकल ले में ही बलाए है
17:34साली हमारी बिली और हम ही सिम्याओं, हमको रुद्र अवतार दिखाएगी ऐसा कह रहे दिस साली को छोड़ूगा नहीं मैं
17:44घबराई है मत परदान जी, धीरज रखिए
17:50ऐसा चक्कर चलाओंगा, यू मस्टरवा की बीवी तो का
17:54कोठे की वैश्या तक नहीं रह पाएगी
17:59उस कुदिया को कुद्टों से ऐसा नुचुआओंगा
18:03कि बोटी बोटी करके खा जाएंगे उसकी
18:06अगर ऐसा ना किया तो मेरा नाम दगुलू सेट नहीं