00:02ुदिश्थिर के साथ आखिरी समय तक कौन गया था।
00:05महाभारत युद्ध के बाद पांडवों ने हिमालय की बरफीली चोटियों की और अंतिम यात्रा शुरू की।
00:11एक एक करके सभी पांडव और ग्रॉपदी रास्ते में अपने पापों के कारण गिर पड़े।
00:16केवल धर्मराज युदिश्थिर ही अपने सत्य और कर्मों के बल पर जीवित आगे बढ़ते रहे।
00:22अचानक आकाश में भगवान इंद्र का स्वर्ण रत युदिश्थिर को लेने के लिए प्रकट हुआ।
00:27इंद्रदेव ने कहा, हे राजन, इस शरीर के साथ ही स्वर्ग में तुम्हारा स्वागत है।
00:33कब युदिश्थिर ने एक शर्त रखी कि यह वफादार कुट्ता भी मेरे साथ स्वर्ग चलेगा।
00:38इंद्रदेव बोले, स्वर्ग में कुट्तों के लिए कोई स्थान नहीं है, इसे यही छोड़ दो।
00:43युदिश्थिर ने द्रिड़ता से कहा, शरण में आए इस भक्त को छोड़ कर मैं स्वर्ग नहीं जाऊंगा।
00:49तभी उस कुट्ते के रूप में स्वयम्रित्यु के देवता धर्मराज्यम प्रकट हो गए।
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