00:05स्टेज पर बच्चे दोड रहे हैं
00:07कोई फूलों की बीच लीटा है
00:08कोई स्पीच के दोरान मंच पर पहुँच गया
00:10और सामने देश के बड़े बिजनस परिवार का एक बड़ा इविंट चल रहा है
00:20लेकिन इन विडियोज में एक बात बहुत खास है
00:22बच्चों की शरारतों से ज़ादा चर्चा हो रही है उन्हें संभालने वाले बड़ों के वेवार की
00:27ना कोई बड़ा हंगामा ना बच्चों को लेकर सारवजनिक रूप से शर्मंदी की का प्रदर्शन
00:32तो सवाल है क्या ये किसी खास तरह की पेरेंटिंग है
00:36और जब आम माता पिता बच्चों की ऐसी हरकतों पर पर परिशान या शर्मंदा हो जाते हैं
00:41तो कुछ लोग इतने शांत कैसे रह पाते हैं
00:43साइकलोजी में इसे इमोशनल रेगुलेशन कहते हैं
00:47यानि अपनी भावनाव, गुस्से और तनाव को संभालना
00:50जब बच्चा किसी आपचारिक कारिक्रव में शरारत करता है
00:53तो माता पिता को एक साथ दो चीज़ें परिशान करती हैं
00:56बच्चे का व्यभार और दूसरे क्या कहेंगे
00:59लेकिन अगर माता पिता पहले अपनी घबराहट को संभालने
01:02तो बच्चे को डाटने या घबराने के बजाए
01:04जादा सोच समझ कर प्रतिक्रिया दे सकते हैं
01:08इसका मतलब ये नहीं कि वो बच्चों की हर हरकत को सही मानते हैं
01:12इसका मतलब है कि वो हर इस्तिती को गुस्से से नहीं
01:15समझदारी से समभालने की कोशश करते हैं
01:18छोटे बच्चों को हमेशा ये समझ नहीं आता कि किसी बड़े कारिक्रब में कब शांत बैटना है और कब खेलना
01:24बंद करना है
01:25उनकी उम्र, उर्जा और ध्यान बनाय रखने की श्रमता भी इसमें भूमिकाने भाती है
01:30ऐसे में बच्चों को सबके सामने शर्मिंदा करने के बजाए, प्यार से समझाना, उसका ध्यान दूसरी तरफ लगाना या जरुवत
01:37पढ़ने पर उसे वहां से ले जाना ज़ादा उपयोगी हो सकता है
01:41Parenting Research में Co-Regulation इसी प्रक्रिया को समझाता है, जब वैसक अपनी स्थिर प्रतिक्रिया और मार्ग दर्शन से बच्चों
01:49को अपनी भावनाओ और व्यावाय संभालना सीखने में मदद करते हैं
01:53इसका मतलब यह नहीं कि बच्चे को कोई सीमा ही न बताई जाए, प्यार के साथ सपष्ट सीमाई भी ज़रूरी
01:59है
02:00येकिन कई बार परिशानी सिर्फ बच्चों की शरारत नहीं होती, उसके साथ जुड़ जाता है लोगों का डर
02:05सब क्या सोचेंगे, लोग मुझे खराब माता-पिता तो नहीं समझेंगे
02:09और मेरे बच्चे को व्यवहार करना नहीं आता, ऐसा तो नहीं लगेगा
02:13जब माता-पिता अपने बच्चे के व्यवहार को अपनी पेरेंटिंग का रिपोर्ट कार्ड समझने लगें, तो छोटी सी शरारत भी
02:20बहुत बड़ी लग सकती है
02:21लेकिन बच्चे का एक सारवजनिक नकरा ये साबित नहीं करता कि माता-पिता अच्छे है या बुरे
02:26बच्चे सीख रहे होते हैं और माता-पिता भी हर परिस्तती में बहतर प्रतिक्रिया देना सीखते ही है
02:32लेकिन क्या मानी फैमिली की पेरेंटिंग को आदर्श मान लेना चाहिए
02:36यहाँ एक जरूरी बात है
02:38वारल वीडियो हुमें किसी परिवार के कुछ पल दिखाते हैं
02:41उनकी पूरी पेरेंटिंग नहीं
02:43लेकिन अगली बार आपका बच्चा किसी शादी, पार्टी या सारजनिक जगह पर शरारत करें
02:48तो खुद से सवाल पूछे
02:49क्या मुझे बच्चे के वेवहार को संभालना है या लोगों की राय के डर को
02:53क्यूकि काम पेरेंटिंग का मतलब ये नहीं कि बच्चा कुछ भी करे और माता-पिता चुप रहें
02:58इसका मतलब है कि माता-पिता बच्चे को संभालते वक्त अपना संतुलन ना खोएं
03:03क्यूकि बच्चे को हर बार परफेक्ट दिखाना पेरेंटिंग नहीं है
03:07उसे धीरे-धीरे बहतर व्यवहार सिखाना बिना हर गलती को अपनी बेज़ती समझना असली सीख है