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शरद पूर्णिमा 2026 की हार्दिक शुभकामनाएं! इस वीडियो में सुनिए शरद पूर्णिमा की पावन व्रत कथा, जिसके प्रभाव से अधूरी इच्छाएं पूरी होती हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है। जानिए दो बहनों की यह पौराणिक कहानी और समझें पूर्णिमा व्रत का असली महत्व। लक्ष्मी-नारायण और चंद्र देव की कृपा पाने के लिए कथा को पूरा ज़रूर सुनें। वीडियो को लाइक और शेयर करें।

Wishing you a blessed Sharad Purnima 2026! In this video, listen to the sacred Sharad Purnima Vrat Katha. Discover the ancient mythological story of two sisters that highlights the true power and significance of completing the Purnima fast. Watch the full video to seek the divine blessings of Goddess Lakshmi, Lord Vishnu, and Chandra Dev.

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~HT.410~VG.HM~

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Transcript
00:20पूरानी कता
00:30पूर्णेमा का वरत रखती थी लेकिन दोनों के वरत करने के तरीके में एक बड़ा अंतर था
00:33बड़ी बहन पूर्णेमा का वरत पूरी श्रद्धा और नियम कानून के साथ पूरा करती थी
00:37वहीं छोटी बहन हमेशा जलबाजी करती और वरत को अधूरा ही छोड़ देती थी
00:42इसका परणाम ये हुआ कि शादी के बाद छोटी बहन के घर जो भी संतान पैदा होती
00:46वो कुछ ही समय में शांत हो जाती यानि वरत्यू को प्राप्त हो जाती
00:50परिशान होकर उसने पंडितों से इसका काराण पूछा विद्वानों ने उसे बताया कि तुम पूर्णेमा का धूरा वरत करती हो
00:55इसलिए तुम्हें ये दुख मिल रहा है
00:57अगर तुम पूरी निष्ठा से पूर्णेमा का वरत कूरा करोगी तो तुम्हारी संतान जीवित रहेगी
01:02पंडितों की सलह मानकर छोटी बहन ने अगली पूर्णेमा का पूरा वरत विदी विधान से किया
01:07कुछ वक्त बाद उसे फिर से एक पुत्र हुआ लेकिन दुर्भागे से वो भी पैदा होते ही मर गया
01:12इस बार छोटी बहन ने एक युकती निकाली उसने अपने मरत बच्चों को एक पाटे पर लटा दिया और उपर
01:18से कपरा ठक दिया
01:19फिर उसने अपनी बड़ी बहन को अपने घर बुलाया और अंजाने में उसी पाटे पर बैठने को कहा
01:25जैसे ही बड़ी बहन उस पाटे पर बैठने लगी उसके कपड़ों का एक छोर उस बच्चे से चूग गया
01:30बड़ी बहन का इस पर्ष पाते ही वो मरा हुआ बच्चा अचानक जीवित हो गया और रोने लगा
01:35बड़ी बहन चौक गई और बोली तुम मुझे कलंक लगाना चाहती थी अगर मैं इस पर बैठ जाती तो ये
01:40बच्चा मर जाता
01:41तब छोटी बहन ने रोते हुए का दीदी ये तो पहले ही मरा हुआ था लेकिन तुम्हारे पवितर वरत के
01:46प्रभाव और तुम्हारे स्पर्ष से मा लक्ष्मी और विश्नु जी ने इसे दोबारा जीवन दे दिया
01:51इस घटना के बाद पूरे नगर में शरत पूर्णिमा के पूरे वरत की महीमा फैल गई और सबी लोग इसे
01:56पूरी विधिविधान से करने लगे
01:58तो ये थी शरत पूर्णिमा की पावनकता है इस दिन रात को चंदरमा की रोश्नी में खीर रखना और अगले
02:03दिन उसे प्रसाद रूप में खाना बेहत शुब माना जाता है
02:06प्रेम से बोली लक्ष्मी नारायन और चंदरदेव की जाए

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