00:20पूरानी कता
00:30पूर्णेमा का वरत रखती थी लेकिन दोनों के वरत करने के तरीके में एक बड़ा अंतर था
00:33बड़ी बहन पूर्णेमा का वरत पूरी श्रद्धा और नियम कानून के साथ पूरा करती थी
00:37वहीं छोटी बहन हमेशा जलबाजी करती और वरत को अधूरा ही छोड़ देती थी
00:42इसका परणाम ये हुआ कि शादी के बाद छोटी बहन के घर जो भी संतान पैदा होती
00:46वो कुछ ही समय में शांत हो जाती यानि वरत्यू को प्राप्त हो जाती
00:50परिशान होकर उसने पंडितों से इसका काराण पूछा विद्वानों ने उसे बताया कि तुम पूर्णेमा का धूरा वरत करती हो
00:55इसलिए तुम्हें ये दुख मिल रहा है
00:57अगर तुम पूरी निष्ठा से पूर्णेमा का वरत कूरा करोगी तो तुम्हारी संतान जीवित रहेगी
01:02पंडितों की सलह मानकर छोटी बहन ने अगली पूर्णेमा का पूरा वरत विदी विधान से किया
01:07कुछ वक्त बाद उसे फिर से एक पुत्र हुआ लेकिन दुर्भागे से वो भी पैदा होते ही मर गया
01:12इस बार छोटी बहन ने एक युकती निकाली उसने अपने मरत बच्चों को एक पाटे पर लटा दिया और उपर
01:18से कपरा ठक दिया
01:19फिर उसने अपनी बड़ी बहन को अपने घर बुलाया और अंजाने में उसी पाटे पर बैठने को कहा
01:25जैसे ही बड़ी बहन उस पाटे पर बैठने लगी उसके कपड़ों का एक छोर उस बच्चे से चूग गया
01:30बड़ी बहन का इस पर्ष पाते ही वो मरा हुआ बच्चा अचानक जीवित हो गया और रोने लगा
01:35बड़ी बहन चौक गई और बोली तुम मुझे कलंक लगाना चाहती थी अगर मैं इस पर बैठ जाती तो ये
01:40बच्चा मर जाता
01:41तब छोटी बहन ने रोते हुए का दीदी ये तो पहले ही मरा हुआ था लेकिन तुम्हारे पवितर वरत के
01:46प्रभाव और तुम्हारे स्पर्ष से मा लक्ष्मी और विश्नु जी ने इसे दोबारा जीवन दे दिया
01:51इस घटना के बाद पूरे नगर में शरत पूर्णिमा के पूरे वरत की महीमा फैल गई और सबी लोग इसे
01:56पूरी विधिविधान से करने लगे
01:58तो ये थी शरत पूर्णिमा की पावनकता है इस दिन रात को चंदरमा की रोश्नी में खीर रखना और अगले
02:03दिन उसे प्रसाद रूप में खाना बेहत शुब माना जाता है
02:06प्रेम से बोली लक्ष्मी नारायन और चंदरदेव की जाए