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  • 5 hours ago
बस्तर दशहरा में जोगी बिठाई की परंपरा एक पुरानी मान्यता से जुड़ी है. लगभग 600 सालों से इसे निभाया जा रहा है.

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00:13विश्वे प्रसिद्ध बस्तर्द शहरे की अनूठी परंपराओं में शामिल जोगी बिठाई की रस्म सोमवार को जगदलपुर के सिरहसार भवन में
00:22विदी विधान के साथ संपन होई
00:30करीब 600 वर्षों से चली आ रही इस परंपरा में इस साल आमाबाल निवासी दौलत कुमार नाग जोगी के रूप
00:37में अगले 9 दिनों तक निर्जला तपस्या करेंगे
01:25जोगी बिठाई की परंपरा एक पुरानी मानिता से जुड़ी है
01:28कहा जाता है कि सालों पहले दशहरा पर्व के दौरान हलबा समाज का एक युवक मेहल के पास 9 दिनों
01:35तक निर्जला उपवास करके तपस्या पर बैठिया
01:39जब महराज को इसकी जानकारी मिली तो उन्होंने युवक से तपस्या का कारण पूछा
01:44युवक ने बताया कि वह बस्तर दशहरा को शांती पूर्ण और बिना किसी बाधा के संपन कराने के लिए साधना
01:51कर रहा है
01:52इसके बाद महराज ने सिरहसार भवन का निर्मान करवाया और इस परंपरा को आगे बढ़ाने में सही योग दिया
02:01तब से हर साल जोगी बिठाई की रस्म निभाई जा रही है
02:16यह तपस्या नौ दिनों की होती है
02:18नौ दिन तक जोगी ऐसे ही चार फीट गड़े में पालती मार कर बैठे रहते है
02:24इस दोरान नौ दिनों तक निर्जला ना ही कुछ पीना होता है और ना ही कुछ खाना
02:30इस तरह हर साल दशारा के परव में कठिन साधना की जाती है
02:35सुनिल कश्यप, ETV भारत, बस्तर

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