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Durga Puja History: पश्चिम बंगाल की दुर्गापूजा आज विश्व प्रसिद्ध है। हर साल पूरी दुनिया कई देशों से लोग बंगाल की दुर्गापूजा देखने आते हैं। आज भव्य मंडप, चकाचौंध कर देने वाली रोशनी के बीच चमचमाती मां दुर्गा की प्रतिमा होती है लेकिन क्या आप जानते हैं कि बंगाल की यह भव्य दुर्गापूजा कब शुरू हई ? किसने पहली बार दुर्गापूजा की थी? आखिर दुर्गापूजा करने का कारण क्या था? सनातन धर्मानुसार इतने देवताओं के होने के बाद 10 भुजा वाली मां दुर्गा की पूजा ही क्यों? ऐसे कई सवाल लोगों के मन में उठते हैं तो आईए बतातें हैं आपको बंगाल की दुर्गा पूजा वृहत इतिहास। इतिहास के गलियारों से बंगाल के पहली दुर्गापूजा के पीछे की बड़ी और रोचक कहानी....Durga Puja History: Paschim Bangal Me Durga Puja Kyu Manayi Jati Hai,Dharmik Karan Aur Itihaas..

West Bengal's Durga Puja is world-famous today. Every year, people from across the globe come to witness it. Today, the grand pandal, dazzling lights, and the gleaming idol of Goddess Durga are visible. But do you know when this grand Durga Puja of Bengal began? Who first performed Durga Puja? What was the reason for this? Given the existence of so many deities in Sanatan Dharma, why is only the ten-armed Goddess Durga worshipped? These questions arise in people's minds, so let us tell you the vast history of Bengal's Durga Puja. From the corridors of history, we learn the long and interesting story behind Bengal's first Durga Puja...

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00:04हर साल पश्रम बंगाल में दुर्गा पूजा के दौरान ऐसे भव्य पंडाल बनते हैं जिन्हें देख कर आँखों पर विश्वास
00:11करना मुश्किल हो जाता है लेकिन क्या आप जानते ही कि आज पूरी दुनिया में मशूर ये उत्सव कभी राजाओं
00:18और जमदारों के घर की
00:19शान हुआ करता था आखर कैसे मा दुर्गा की पूजा राज महलों से निकल कर पूरे बंगाल का बड़ा उत्सव
00:26बन गई
00:29और अज पूजा का संबंद भगवान राम की एक ऐसी धार्मिक परंपरा से कैसे जुड़ा आईए आपको बताते हैं
00:36बंगाल की दुर्गा पूजा की धार्मिक जड़ें देवी दुर्गा और महिशासुर की पौरानिक कथा से जुड़ी है जिसे दुर्गा सब्तशती
00:43भी कहा जाता है
00:44में देवी द्वारा महिशासुर का वद करने का वर्नन मिलता है
00:48मादुर्गा को यहां शक्ति और अधर्म पर वजय का प्रतीक माना गया है
00:52बंगाल की लोगप्रिय रामायन परंपरा विशेशकर कृतिवास रामायन में भगवान राम द्वारा रामायन के युद्ध से पहले
01:00शरद रितु में देवी दुर्गा की पूजा करने की कथा भी मिलती है इसे ओकाल बोधुन कहा जाता है अर्धार्थ
01:08देवी का असमय आवाहन ये धार्मिक परंपरा बंगाल की शारदिय दुर्गा पूजा को एक खास पहचान देती है अब बात
01:16करते हैं इतिहास की
01:19बंगाल में दुर्गा पूजा के भव्वे आयोजनों का संबंद लंबे वक्त तक राजाओं जमिदारों और संपन परिवारों से रहा कोलकाता
01:27की शोभा बाजार राजबाडी की पूजा जिसे राजा नवकृष्ण देव से जोड़ा जाता है इसकी प्रसिद मिसाल है इस
01:47बारह मित्रों द्वारा सामोहिक पूजा आयोजित करने की परंपरा को बारोयारी पूजा के शुरुवाती उधारणों में गिना गया धीरे धीरे
01:54सर्वजनिक दुर्गा पूजा का विकास हुआ और महलों के लोग मिलकर पूजा आयोजित करने लगे अब ये केवल किसी र
02:16अधुनिक कला के जरीए अनोखी दुनिया रची जाती है। इसी सांस्कृतिक महत्व के कारण 2021 में कोलकता की दुर्गापूजा को
02:25युनेसको की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनेधी सूची में शामल किया गया।
02:46अलाव और बंगाल की संस्कृतिक पहचान की कहानी है। ये मादुर्गा महिशासुर कावत करने वाली आदिशक्ती भी है और अपने
02:53माय के आने वाली बेटी भी। शायद यही वज़ह है कि हर साल पूरा बंगाल उनके स्वागत में एक साथ
02:59खड़ा हो जाता है।

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