Skip to playerSkip to main content
  • 3 weeks ago
Horror story of tution

Category

🎈
Fun
Transcript
00:00If you like this video, please like this channel and follow me on tuition.
00:09I was 14 years old. He was very happy to study.
00:15But he was very weak in mathematics.
00:18So he was very happy to study the school.
00:24His apartment was 3rd floor.
00:26Mahesh sir came to the flat.
00:30Mahesh sir was a small flat.
00:32There was a small flat.
00:32He was a small flat.
00:33He was a small flat and was a small flat.
00:37He was a small flat on his own.
00:56।
00:57The teacher said that they are here, every child, classmate, top, and the teacher was here.
01:03Mahesh sir, they were here.
01:05They were not the best.
01:07They were not the best.
01:10They were not the best.
01:11They were not the best.
01:12They were not the best.
01:16But two people were all strange.
01:19One, Mahesh sir, the rest of the.5.5am, class over, did they.
01:24They were the beach question.
01:54।
01:56और उसे थोड़ी एक्स्ट्रा प्रैक्टिस की जरूरत है।
01:59उन्होंने आरफ को अगले दिन शाम को साथ बजाने के लिए खा।
02:03आरफ बहुत खुश था।
02:05उसे लगा कि सर उस पर स्पेशल मेनत करना चाहते हैं।
02:09अगली शाम जब वो फ्लैट पर पहुचा तो सिर्फ वो और महीश सर ही थे।
02:14उस दिन पहली बार था जब आरफ अकेले ही महीश सर से बढ़ रहा था।
02:20सर ने उसे एलजेबरा के कुछ मुश्किल सवाल दिये और वो उन्हें सॉल्फ करने लगा।
02:26सर उसे बड़े प्यार से अच्छे से सिखा रहे थे। करीब एक घंटा बीच चुका था।
02:32ट्यूशिन का टाइम बस खतम होने ही आया था कि बाहर अचानक तेज आंधी चलने लगी।
02:39कुछ ही मिनिट्स में इतनी जोर की बारिश शुरू हो गई कि सामने वाली बिल्डिंग भी मुश्किल से दिख रही
02:45थी।
02:46तबी महेश सर को आरफ के पापा का फोन आया। उन्होंने बताया कि तेज बारिश और भ़वा की वज़ा से
02:51रास्ते में एक बहुत बड़ा पेड़ गिर गया है जिसकी वज़ा से ट्राफिक पूरी तरह जाम हो गया है और
02:58उन्हें आरफ को पिकप करने में अब कम से कम एक
03:02घंटा लगेगा। आरफ के पापा ने महेश सर से रिक्वेस्ट की कि जब तक वो आ नहीं जाते तब तक
03:08वो आरफ को अपने घर में ही रखें। महेश सर ने हामी भरी और फोन रख दिया। लेकिन फोन रखते
03:15ही महेश सर घबराहट के मारे बौकला गये थे। रात के साड�
03:21बच चुके थे। महेश सर ने घर के सारे खिड की दर्वाजे बन किये। ड्रोइंग रूम का दर्वाजा अंदर से
03:28लौक किया। और कुछ पल चुप खड़े रहे। ऐसा लग रहा था कि जैसे वो किसी बात का इंतजार कर
03:35रहे हो। फिर वो धीरे से आरफ से बोले। आर�
03:51किसी भी हाल में मेरे रून के अंदर मताना। ये कहकर महेश सर हडबडी में कैलरी से गुजरते हुए बेडरूम
04:00में चले गए। बेडरूम का दर्वाजा धीरे से बन हो गया। आरफ को महेश सर का ऐसा हाव भाव देखकर
04:06बेहत अजीव लगा। लेकिन फिर उसने चुप �
04:20आपस में कुछ खुस्पोसा रहा हो। कई अवाजे एक साथ बहुत धीरे धीरे बोल रही हूँ। आरफ ने ध्यान से
04:29सुनना चाहा लेकिन अचानक से सब शान्त हो गया। और तभी एकदम से पूरे फ्लाइट की लाइट चली गई। पूरा
04:37घर अंधेरे में डूप गया�
04:40चमकती बिजली की रोशनी जो खिड़की से आ रही थी वो कुछ पल के लिए कमरे को रोशन करती और
04:46फिर सब कुछ दुबारा काला पड़ जाता। तभी महेश सर के बेडरूं का दर्वाजा अपने आप को गया। अंदर घना
04:53अंधेरा था। लेकिन आरफ को लगा कि दर्�
04:58चमकती आखें उसकी तरफ देख रही हैं। उसने महेश सर को अवाज लगाई। सर महेश सर क्या आप हो अंदर।
05:08अब धीरे धीरे वो लाल आखें भड़ती जा रही थी। दो से चार, चार से आठ और आठ से सोला।
05:16तभी एक तेज बिजली कड़की और उस बिजली की चमक
05:19में आरव ने बेडरूम के अंदर कुछ ऐसा देखा, जिसे देखकर वो सुन पड़ गया। बेडरूम के अंदर आरव को
05:28अपनी उम्र के ही कई सारे बच्चे दिखें। उन सब की आखें एकदम लाल थी और चेहरे एकदम सफेद। वो
05:36सब वेहट डरावने लग रहे थे।
05:39और बस आरव को ही घूरे जा रहे थे। पर जैसे ही बिजली कड़कना भंद हुआ, परंधिरा हुआ, वो चेहरे
05:46और आखें गायब हो गए। तभी उसे बेडरूम के अंदर से एक ऐसी चीख सुनाई थी, ये आरव के शरीर
05:53में सर्दी की लहर दोड़ गई। अवाज महे�
05:57महेश सर की थी, एक चीख, फिर दुबारा ऐसा लग रहा था कि महेश सर दर्द में चीख नहें, आरव
06:04महेश सर की चिताबनी भूल गया और भागा भागा बेडरूम ते अंदर चला गया, कमरे में सिर्फ मौमत्या ज़र रही
06:12थी, फर्ष पर सफेद चौक से एक बड़ा सा
06:16गोला बना हुआ था, उस गोले के चारों तरफ पुरानी कबड़े की बनी छोटी छोटी पुतलियां रखी थी, हर पुतली
06:24के कले में एक कागज बंदा था, और कागजों पर अलग अलग बच्चों के नाम लिखे थे, कमरे के बीच
06:31महेश सर, घुटनों के बल बेहे थे, उ
06:38उसमें काला खून जमा था, महेश सर अपनी उंगली से खून की बूंडें उस थाली में गिरा रहे थे, और
06:47लगतार किसी अंजान भाशा में कुछ बोलते जा रहे थे, उनकी अवाज बिलकुल बदल चुकी थी, हारी और बहुत अजीब
06:56सी, जैसे दो अलग अलग योग एक
07:08उठाया और उन्हें देखते ही आरफ की रोका पुठी, महेश सर का पूरा चेहरा सफेद पढ़ चुका था, और वो
07:16इतना प्धानक लग रहा था, कि जैसे महेश सर पर किसी आत्मा ने कबजा कर रखा है, महेश सर ने
07:23आरफ को गुस से सदेखा, और फिर एक अजीब धंसे ह
07:38यह देखते ही आरफ इतना डर गया, कि वो सीधा कमरे से बाहर भागा, महेश सर एक जटके से खड़े
07:45हो गए, और वो आरफ की तरफ आने लगे, लेकिन उनकी चाल किसी इंसान जैसी नहीं थी, ऐसा लग रहा
07:52था कि जैसे वो हर कदम किसी और की मर्जी से उठा रहे हो, आर�
08:08लिखते हुए आरफ सीडियों से नीचे किर गया, और भी कुछ हो गया, कुछ देर बाद आरफ की आँख खुली,
08:15तो वो हॉस्पिटल में था, उसके पापा और मम्मी उसके पास खड़े थे, उसने अपने साथ हुआ पूरा किस्सा उन्हें
08:22बताया, जब ये सब चेक करने,
08:25आरफ के पेरेंट्स पुलिस के साथ महेश सर के फ्लैट में गए, तो फ्लैट का दर्वाजा पहले से ही खुला
08:31हुआ था, पुलिस सीधा बेडरूम के अंदर गई, पूरा बेडरूम विलकुल वैसा ही था, जैसा आरफ ने बताया था, एक
08:41बड़ा सा चौक का गोला, और च
08:55गिदेख कर सब लोग शौक थे, पर महेश सर का कोई नाम और निशान नहीं था, अफिसर जब बेडरूम से
09:03अटैज बातरूम में गया, उसकी आँखें फटी की फटी रहें, बातरूम में महेश सर की लाश पड़ी थी, उनके मूँ
09:12से जाग निकल रहा था, ऐसा लग रहा �
09:15जैसे उनको किसी ने जहर से मारा है, बहां एक लेटर भी पड़ा था, जो महेश सर की हेंडराइटिंग में
09:24था, वो पढ़कर सब के होश उड़ गए, उसमें महेश सर ने लिखा था, कि दस साल पहले उनके उपर
09:33एक ऐसे इंसान की आत्मा चड़ गई थी, जो मरने से पहले
09:36बच्चों का मास खाता था, रात होते ही वो उनके शरीर को पूरी तरह काबू कर लिता था, और उसी
09:44शैतान ने दस साल पहले, महेश सर के हातों से मासूम बच्चों को मरवा डाला था, और उन्हें हमेशा हमेशा
09:53के लिए अपने काबू में खैट कर लिया था, पर अब उन स
10:18ॐस खौफना को
10:22भुला पाएगा

Recommended