00:00आज का फिल्मों का दौर कोई ब्लॉक बास्टर फिल्म का नहीं है
00:03यहाँ पर ऐसी फिल्म शायए
00:05जो किरदार हो
00:08मियूजिक हो, स्क्रिन प्ले हो
00:09इसके साथ साथ
00:11एक ऐसा एक्टर हो
00:12कि जो फिल्म को उठा सके
00:15और ऐसा एक्टर की
00:17अगर हम बात करें
00:18तो राजकुमार राव एक ऐसा नाम है जिसे हम वर्सटाइल, मोस् टालेंटेड अक्टर कह सकते हैं.
00:26इतनी अच्छे-च्छे फिल्में आई हैं, जो लो बजेट भी है, बिग बजेट भी है, लेकिन राजकुमार राव अपना अलग
00:34पन उसमें छोड़ते आये हैं.
00:36हमारे साथ राजकुमार राव जी है, प्रहार एक फिल्म आ रही है, बायो पीक है, जिस पर आप लीड कर
00:45रहे हैं, ये फिल्म चुनने के पीछे, आपकी काया रहाई थी, आपको ऐसा क्यों लगा कि ये फिल्म मैं करूँ,
00:54इसके बहुत सारे रीजन्स हैं, पहला तो ये फिल्
01:01फिल्म स्कूल से है, फिल्म इंस्च्टोट पूले से, वो मेरे एक अग्साल जुनियर ते वहाँपर, तो इनके काम का म
01:07हमेशा से बहुत एडमार रहा हूं, इंसिच्ट्ट के टाइम से में हुआ का काम देखता है ये था जबार, उन्हें
01:13किल्ला बनाई, पाताल लोग बना
01:20दूसरा रीजन था क्योंकि मैडॉक फिल्म दिनेश विजन जो हमारी प्रेडूसर उनके साथ में इतना काम किया पहले भी तो
01:27बहुत कमफर्ट है उनके साथ काम करने में और वह बहुत अच्छी कहानिया चुनते हैं और मुझे पता है वो
01:31फिल्म को जहां पहुंचना चाहिए
01:39करें इसको जो स्टोरी है और जिसके हम बात कर रहे हैं यह सब हम सब के दिमाग में भी
01:47बहुत ताजा है वो सब तस्वीरे वो वीडियो जो ने देखे और मुझे खुद भी आज अजले मैं मुझे नहीं
01:54पता था कि कोड के अंदर क्या हुआ है कि उसके अंदर की जो बारिक
02:02आता था मीडिया को वो हम पढ़ते थे तो इस फिल्म के जरीए कोट के अंदर की जो सब डीटेलिंग
02:08है उसको केस कैसे चला क्या क्या हुआ बहुत ड्रमाटिक है बहुत थ्रिलिंग है जिस तरह से केस चला और
02:15फाइनली कैसे वुच्वल जीने का साब को फांसी पर पहुंचा
02:29तक मुझे एक बात उसमें बहुत अच्छी लगी कि उसमें स्क्रीन प्ले भी है और उसमें खुद का भी एक
02:37अपनापन है लेकिन ये करते समय जैसे कि आपने न्यूटन में भी बहुत छोटा सा किरदार था लेकिन अलग था
02:45लेकिन जिस तरह से वो उसको आपने निभाया क
02:48तो राजकुमार आज भी याद है शाहिद में भी वो ही हुआ है वो तो लिग से हट की थी
02:53फिल्म स्क्रीन प्ले और ओमरेटा तो वुरा नेशनल और इंटरनेशनल कैनवास था तो आप जब स्टोरी चुनते हो तो उसके
03:02पीछे डिरेक्टर देखते हो या फिर उसके पीछ
03:07या उसका रीच या उसका लॉजिकल एंट क्या रहेगा यह देखते हो और इसी सबसे पहले कहानी देखते हैं स्टोरी
03:16बहुत एक्साइटिंग होनी चाहिए और मुझे ऐसा काम करने में बहुत मज़ा आता है जो मुझे पुश करे थोड़ा मुझे
03:21लगे कि यार ये थोड�
03:33को भी डालूँगा श्रीकान का भी यह रीजन था कि विश्वली इंपेड करदार कैसे होगा बता नहीं और कैसे उसको
03:40अलग करेंगे क्योंकि हमने इससे पहले देखे हैं बहुत साथे अक्टर्स को बहुतरीन काम करते हैं तो यही कारण रहता
03:46है कि चुनने का यही रीजन ह
03:48कि कहानी कितनी एक्साइटिंग है मेरे लिए उसके बाद अपकॉस क्योंकि फिल्मेकिंग जो है वह एक डिरेक्टर मीडियम कहते हैं
03:54इसको थेटर को बोलते हैं अक्रस मीडियम तो निर्देशक का सही होना बहुत ज़रूरी है विकि बहुत बार ऐसा हो
04:00सकता है कि आपने प
04:17लोत चुपता है तकी लोग बहर आके कि यार बहुत अच्छी फिल्म थी उसके बाद सेकिंड लाइन कुट भी कि
04:23आपका काम भी बॉत अच्छा ता कोई अगर आपका काम बहुत अच्छा था था फिल्म भूत खराती तो वो बहुत
04:28चुपता है कोई ए नहीं चायगा कि को�
04:34यह हो सकता कि फिल्म बहुत अच्छी थी आपका काम भी अच्छा था यह तो फिल्म सबसे उपर होती है
04:39और फिल्म को बनाता है डिरेक्टर तो मेरे लिए निर्देशक का चुनाव सही करना सही होना सबसे ज्यादा
04:46इंपॉर्टर अज आप इस मकाम पे हो कि एक स्टारडम आप पर आ चुका है और आप वो चाह सकते
04:55हैं कि नहीं भी यह फिल्म मैं मेरी सोलो फिल्म करूंगा मेरे इर्द इतने किरदार आपने खड़े कर दिये जैसे
05:02कि स्त्री में हैं मैं तो यह भी कहूंगा कि शादी में जर
05:16हो जाता है लोग हो यार तब तो हमने कर लिया लेकिन अब भी यह हम यह ही कहेंगे कि
05:21मेरे इर्द गिर दो चार रखोंगे तो यह कैसे है यह थिंक बहुत ही अजीप सा थाट होगा कि मैं
05:27तो फिल्म करने के लिए आए थे हम यह यह आपर और सोलो फिल्म तो कोई नहीं करता
05:41किर्दार के साथ मना आगर मुझे अगर विकेंड में कोई मुवी देखनी है
06:02नई मुई तो ध्यान नहीं जाता है, फिर भी मुझे कुछ थोड़ा समय है, टाइम पास के लिए, या कुछ
06:08उसमें से मुझे हुमर चाहिए, तो मैं शादी में जरूर आना, उसके कुछ सिन देख लेता हूं, या स्त्री के
06:14कुछ सिन देख लेता हूं, तो यह आप करते समय त
06:18तब जाकि यह पूरा स्क्रीन पर आता है, जी, जी, इंपरोईस करना बहुत ज़रूरी है, मैं सिर्फ लिखी हुई लाइने
06:37तो हैं ही, पर उसके लिए मैं मैं अपना उसमें क्या आड कर सकता हूं, क्या डाल सकता हूं, वो
06:42बहुत इंपरॉटन ए, उसके दार को और कितना म
06:46के लिए तो वो मैं हमेशा से कोशिश करता हूं कि मैं करूं कि डिरेक्टर ने अगर मुझे लिया है
06:51तो कुछ सोच के लिए आप अपना क्या इसमें योगदान है आपका तो वह कोशिच रहते कि कैसे उसको मैं
06:56जो लिखा हुआ है उससे और उपर लेकर जाओ राज कुमार जी
07:16है अगर अगर उन दोस्तों के साथ हूं जहां पर यह माहौल बना हुआ है तो अपकोर्स हम लोग बहुत
07:32मस्ती करते हैं बहुत मजे करते हैं बहुत हस्ते हैं चीजों के ओपर बात करके राज कुमार जी कोई गौडफादर
07:41नहीं है फिर भी आज आप बॉलिवड में ऐसे म
07:44काम पे हो कि कोई यह नहीं कहेगा कि अभी स्ट्रगल कर रहे हैं यह तो अब सेठ हो गए
07:49है लेकिन ऐसा होता है मैं कि मेरा होम स्टेट जैसे आपका हर्याना है वहां से मैं यहां और इस
07:56मुंबई नगरी में मैं खो नहीं गया मैंने अपना वजूद बनाया यह पूरा सफर
08:03सबस्कार वाले का शराइब और मेरे माबाप का शरवाद है मैं हमेशा से यह करना चाहता था मुझे में एक्टर
08:11बनना था और इसकी शुरूबाद बहुत पहले से स्कूल टाइम से डिसाइड हो गया तक यह करना है जीवन में
08:16तो मेनत बहुत की अपकोर्स भुत थेय्टर क
08:19देली में गुर्गाओं में फिन स्कूल गए बहां बहुत पढ़ाई की आक्टिंग की उसके बाद पर दोटाराइट में मुंबई आना
08:26हुआ पर इतिंग यह इसे हुआ यह बहुत पैशन था मैं यह बोलूगा कि अपनी महनत में कोई कमी नहीं
08:33चोड़ी मैं यह नहीं चाहता
08:49है जैसे कि मैं एक हार्ड कोर जनलिस्ट हूँ जितने भी वाकिये मुंबई में हुए या भारत और महरास्तर में
08:56हुए है उसका सबका साफशिदार राह उबेने कवर भी किया है आपके कुछ फिल्म है जो हमारे लिए रेफरेंस फिल्म
09:04है जैसे कि न्यूटन है कि जब भी क
09:17अधिकल अलग है मिनस हम ऐसे कितने एडोकेट्स को देखते हैं लॉयर्स को देखते हैं जो शाहित की जिन्दगी जीते
09:26हैं असल लाइप में भी ऑमरेटा तो खेर अलगी रेंज की फिल्म है तो करते समय यह ध्यान में आता
09:33है कि यह बहुत बड़ी फिल्म है जो हम कर रहे ह
09:37करते हुए तो से लगता है कि जो मुझे दिया गया है मटीरियल इसको मैं कितना इमानदारी से निभा पाऊं
09:42और फिर वो चीज़े ट्रैवल करती हैं फिर आपको नहीं समझ आता है कई बार कि अरे यह तो मैंने
09:47सोचने हैं इतना बड़ा हो जाएगा जैसे शादी में जरू
10:04साल के बच्चों को बहुत बार जो आके बोलते हैं कि श्रीकांद देखी और बहुत अच्छी लगी मैंने कभी ने
10:10सुचा था कि इतने चोटे बच्चों को श्रीकांद देखेंगे और उनको अच्छी लगेगी तो फिल्म का यही है यही मजा
10:16है थ्रिल है कि आपको पता नह
10:21आपकी जो शादी में जरूर आना फर्स्ट आप अगर देखें तो आप स्ट्रगल कर रहे हैं अपने खुद की भी
10:29जिंदगी में और सेकंड हाप में आप आयस ऑफिसर बन जाती जो ट्रांसफोर्मेशन आपने दिखाया है बहुत कम खिल्मों में
10:38ऐसा किरदार में ट्रांसफ
10:50तो उस चीजों से वही ट्रेइनिंग होई है कैसे जो भी करदार आपको मिले कैसे उसको आप इतने कन्विक्शन से
10:56करें कि लोग जब देखें तो उनको विश्वास हो उसके बिश्वास हो ऐसा ना लगे कि आप आप आप कर
11:02दिखा रहे हैं कि देखो मैं हूं ऐसा आपो बन
11:19अब आप उस मुकाम पे हो कि आप इससे डरते हो कि यह स्टेरोटाइप ना हो जाए यह तो मैंने
11:24पहले कर लिया है वापस यही आई है इसलिए आप अलग अलग फिल्मे कर रहे हैं यह स्टेरोटाइप तो नहीं
11:31मैं डरता नहीं हूं I think लोगों को शायद यह कभी कभी शिक
11:48आरे बहुत अंगिनत एक्जामपल हैं अक्टर्स के दुनिया में और लेजंड्स जोने एक ही किरदार को जंदगी बर निबाया है
11:54और लोगों को बहुत अंटें किया है और आज उनको हम लेजंड बूलते हैं तो एस लॉंग एस अपकॉर्स मैं
11:59बीच बीच में श्रीकांत
12:00तो प्रहार और दादा और अफ्तार ये फिल्मी भी करता रहूं मुझे कोई उसमें बुराई नहीं लगती है कि अगर
12:06मैं आपको एंटर्टेन करूं आपके इस इस इस इतने टेंशन वाली जिंदिगी में अगर मैं आपको धाई गंटा हासा पाऊ
12:13तो क्यों नहीं सर एक आ
12:31दूसरे लाइगवेजस में सेम टाइम उसी तरह के भी फिल्में बन रही है सिर्फ हिंदी कोई मोनोपोली नहीं है बिल्कुल
12:37ऐसे में ये फिल्म का दौर आगे कहां जाएगा
12:42सिर्फ सिनेमा तो हमेशा है थेटर ओडियंस है वो हमेशा जिन्दा रहेंगी क्योंकि ये बहुत बार उतरी जब टेलिविजन आया
12:51था तब लगता था कि शायद अभी सिनेमा वर जाएगा लोग तेलिविजन देखेंगे इंगर पर वेटके पर सिनेमा तब भी
12:56रहा उसके
13:11ह्सार लोगों के साथ देखने में जो मज़ा है वो आप फैले बैठके नहीं ले सकते हैं वो आपको थेटर
13:17में आता है साथ में हसने में साथ में डरने में साथ में रोने में क्या आप उस कहानी में
13:22integr pasó्ण अगर बशरते अपकरूस फिल्म अक्षी हो तो तो डही गंटा आप
13:42परभू सिनेबा का एक्सक्रिएंस जो है वो आपको सिर्फ बड़े परदेपरी मिल सकता है और कहीं नहीं सर आप गुडगां
13:47से आते हैं और अभी मुंबई कर बन चुके हैं मुंबई ने आपको क्या दिया ऐसा अगर मैंने आपको पूछा
13:54तो आप क्या कहीं मुंबई ने स�
14:03इस शहर ने मुझे मेरा पहला घर दिया है इतने सारे पुरसकार दी है और सबसे ज़्यादा जो प्यार मुझे
14:11मिलाएं इस शहर में आकर वो मैं उसके लिए जिन्दीगी पर करददा हूँगा वो यही शहर है जो कर सकता
14:19है हम सब जानते हैं पूरे देश भर से लोग यहां
14:33इस शहर किसी को खाली हाथ नहीं भीचती है तो मैं तो मॉंबाई सिंवी जी मुझे बहुत महबबत है और
14:39I don't think so मैं इस शहर के लावा इनों कहिवा तब ही रहता हूँ यह शहर किसी को खाली
14:44हाथ नहीं भीचता है यह गूड़ नोट पर हम रुकेंगे नाइस टॉकिंग त
14:51प्रूँ प्रूबब नहीं जी मुझे चाली है तो मैं तो मैं एफ रहता है तो मैं जो जाव शहर की
15:01तो आफ तो मैं रहता है