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उज्जैन की खड़े हनुमान की मूर्ति का राज क्या? देखें अद्भुत, अकल्पनीय और अविश्वसनीय

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00:18अग्टाईसूराउ
00:20झाँसूराउ
00:23झाँसूराउ
00:25झाँसूराई
00:30आपनी जगह से अडिक है अनुमांजी हिले वेने
00:38अजय को भी स्थाना अंतरित करने के कोशिश हो रही है बढ़ अनुमांजी के इच्छा नहीं है हिलने की
00:44कर दो अजय कर दो आपर सारी विश्पूरी होती है वीजा के मीनी नौकरी की शादी की कुछ भी
01:08सच्चे मन से तो सबके वाँ सुनता ही है कभी कोई ऐसा काम अटका हो जाइस काम हो यह प्रास्नर
01:16करेंगे वो काम हो जाए
01:18इनका तो अनुमांजी का अपर लब अंशी है साख्षतकार अनुमांजी हिनके अंदर है और रहेंगे
01:26ऐसी बक्ती ऐसी सांती पहले कहीं हो देखने को नहीं मिली जै बाबा की अर मिनट हर घंटे मतलब उनकी
01:34मौजूद्गी महसूस करती हूं बाबा की
01:41इश्वर की शक्ति का अभास अपने अपने रूप में लोगों को अपने जीवनकाल में अलग-अलग तरह से हो सकता
01:47है लेकिन अगर सबको इश्वर के होने का एसास एक साथ हो तो होगा नहीं अधुत और विश्वस्निय और कल्पनिय
01:56नमस्कार मैं हूं श्वेता सिंग और
02:07हनुमान जी जो अपनी जगे पर स्थापित हैं वहां से कोई उन्हें हिला क्यों नहीं पा रहा है
02:14जे हनुमान ज्यान गुनसागर जे कपीस्ति हूं लगुजागर
02:28जे हनुमान गुनसागर जे कपीस्ति हूं लगुजागर
02:58त्रेता युग के रामभक्त हनुमान
03:12द्वापर युग के महाबली हनुमान
03:26कलियुग के संकट मुचन हनुमान
03:36बजरंग बली की आस्था का एक रूप तो ऐसा भी है
03:40जिसमें हनुमान जी का ध्यान करते करते उनके भग्त खुद हनुमान अंश बन गए
03:57द्वाबा के परती आस्था है हमारे पूरे परिवार का
04:00और हम लोग यह साल में तोते बार या तिसरी बार आ रहे हैं
04:04दिल्ली के हनुमान मंदिर पर इस्लामिक प्रतीर चांद का शिखर कलश उद्गोश कर रहा है
04:10कि कभी एक सर्व शक्तिशाली बादशाह ने भी हनुमान जी की शक्ति के आगे घुटने टेक दिये थे
04:16और आज भी जो जब भी मुसीबत में आता है वो महावीर नाम ही सुनाता है
04:23आज स्फिश्नाता है
04:27एक स्फिश्नाता है
04:37इसी आज स्फिश्ना गर्मानिक प्रता है
04:51इसी आज था
04:53ऐसी ही मान्यताओं के बीच उज्जैन में एक अडिक घड़ी हनुमान मूर्थी
04:58क्या हनुमान जी के ही चमतकार का स्वरूप है
05:04जहाँ प्रशासन की तमाम कोशिशें भी हनुमान जी की प्रदिमा को अपने स्थान से हटा नहीं पा रही
05:14हिले वे नहीं
05:17कि हनुमान जी से बढ़ा तो कोई है नहीं इस कल्यूग के प्रतक्ष देवता है अजर अमर गुण में दिस्टो
05:22तो हूँ करव बहुत रगुनायक चो हूँ तो अजर हैं अमर हैं माता सीता जी का अशिरवाद उनको प्राप्त है
05:27कल्यूग में प्रतक्ष है
05:30हनुमान जी जहां है वहीं अथावत रहना चाहिए हनुमान जी को बाबा यहीं रहे तो कि नासे रोग हरे सब
05:38पीरा जपत निरा इंतर हनुमत भीरा
05:58द्रेता से द्वापर तक फिर महा भारत काल से मुगल काल तक
06:02कुरुक शेत्र के महा युद्ध से किले के कारागार तक
06:06हनुमान जी के प्रती अद्भुत अविश्वस्निये और कल्पनिये श्रधा की असंख्य कहानिया मिलती है
06:17उज्जेन के खड़े हनुमान जी की प्रतिमा से जुड़ी आस्था इसी आध्यात्मिक अध्यायका सबसे नया रूप है
06:34सिंगहस्त महाकुम दोहजार अथाईस की तैयारियों के कारण उज्जेन में सड़क को चोड़ा करने के लिए एक अभियान चलाया जा
06:40रहा है
06:40इस अभियान के रास्ते में आता है लगभग 170 साल पुराना खड़े हनुमान जी का मंदिर
06:47प्रिशासन ने मंदिर को शिफ्ट करने का प्लान बनाया
06:50मंदिर तो तूट गया लेकिन हनुमान जी अपनी जगे से टस से मस नहीं हुए
06:56भक्ति से महाबली वीर बजरंग बली की अध्भुच शक्ती का चमतकार मान रहे हैं
07:01हालंकि प्रिशासन की कोशिशें अब भी जारी हैं
07:44क्रेन की ताकत भी जब हनुमान प्रतिमा को हिला न सकी
07:52हुदाई की गहराईयां भी जब प्रतिमा की थाह न पास सकी
07:59तो भक्तों ने कहा ये बजरंग बली का अध्भुच चमतकार है
08:08हनुमान जी का चमतकार इस समय दिखाई दे रहा है
08:10हनुमान जी को तीन बार उठाने का प्रियास किया गया
08:13फिर भी हनुमान जी अपनी जगए से अडिक है
08:15नहीं उठे तो इसी सूच करके आए कि देखे हनुमान जी का चमतकार क्या है
08:20अपने सनातन में चमतकार होते रहते हैं भगवान समय समय पर चमतकार दिखाते रहते हैं
08:30प्रशासन के माथे पर पसीने आ गए आस्था का सैलाब भूमट पड़ा
08:40सिंगस दोजार अठाइस की विकास कारे भी आवश्यक हैं और उठेन की धार्मिक आस्था भी हमारी सरवुच प्रात्मिक्टा है
08:46विश्यसग्यों संसमाज और स्रधालूओं के विश्वास के साथ समाज हम निकाला जाएगा
09:05प्रशासन के लिए इस रधालूओं की भावनाए प्रतिमा की सुरच्छा और उठेन की धार्मिक और सांस्कृतिक विराशत सर्वोपरी है
09:16बुल्डोजर से मंदिर की दीवारे तो गिरा दी गे
09:21हथोड़ों की मार से दीवारे छट सब विखर गए
09:24लेकिन हनुमान जी की मूर्ती टस से मस नहीं हुई
09:29हनुमान जी को भी स्थान अंतरित करने के कोशिश हो रही है
09:34बड़ हनुमान जी की इच्छा नहीं है हिलने की
09:36अब ये चमतकार तो देखना चाहिए
09:39मैं जागड़ों में हनुमान जी का ही रोल करता हूँ
09:41मुझे पता है कि जहां बाबा है विराजमान है वो वह विकुल नहीं हटेंगे
09:44हम गुजराच से पाटन से आये हैं
09:46और ये सुना था तभी हम ये देखने के लिए आये थे
09:49और यहाँ पे अस्ता करकर के
09:51हम बताने चाहने है कि यहाँ पे दादा की मुर्ति यहाँ पे रहेगे और यहाँ पे पुजा ही रहेगे
10:08मंदिर के बारे में प्रमान दिये जाते हैं कि यह 1857 के करांती के समय का है
10:17यानि करीब एक सो सतर वर्ष पुराना
10:20और दावे हैं कि हनुमान जी की मूर्ति मंदिर से भी पुरानी है
10:35स्री हनुमान जी महाराज तो आस्था के प्रतीक है
10:39समस्त जो सनातन धर्म की इनुबरसिटी है
10:45विश्व ध्याले उसके कुलाध ही पती है
10:48स्री हनुमान जी
11:16जितना मजबूत विश्वास श्रधालों के मन में है
11:19उतना ही कौतुहल, खुदाई और मूर्ती के नीचे की वस्कु स्थिती का पता लगाने की कोशिशे करने वाले तक्लीकी विश्वशग्यों
11:26की भी है
11:27कि आखित प्रतिमा कुछ क्रेम की मदद से भी उठाया क्यों नहीं जा सका
11:54प्रतिमा को हटाने की चार बार कोशिश की जा चुकी है
11:59लेकिन सफलता नहीं मिली और प्रिशासन की हर असफलता के साथ
12:04श्रद्धालू की श्रद्धा और मजबूत होती जा रही है
12:13आस्था या विज्ञान अनसुलजा रहसे या धीरे धीरे खुलती रहसे की गाट है
12:18उज्ञेन के खड़े हनुमान जी की मूर्ती अपनी जगे से न हिलने के पीछे
12:22अगर चमतकार की गुंजती आवाजे हैं तो इसके पीछे कुछ तर्प भी दिये जा रहे हैं
12:34उज्ञेन में खड़े हनुमान जी की प्रतिमा आखित इतनी कोशिशों के भावजूत जगे से क्यों नहीं हिल पार है
12:43वैसे तो बजरंग बली की महिमा अपरम पार है लेकिन कई और कारणों पर चर्चा भी हो रही है
12:49और वजय पता लगाने के लिए विशेशग्यों की टीम का गठन किया गया है जो मुख्य रूप से इन बिंदूओं
12:56पर विचार कर रही है
13:00क्या मूर्ती का बड़ा हिस्सा जमीन के नीचे मौजूद है
13:05क्या मूर्ती का निचला हिस्सा नीचे किसी पत्थर से जुड़ा है
13:10क्या इसे किसी ऐसी टक्नीक से बनाया गया है जो अभेते है
13:15और मूर्ती का वजन कितना है
13:21क्या बिना जमीन खुदे या पता चल सकता है कि मूर्ती किस चीज से जुड़ी हुई है
13:26विशेशग्यों की टीमे उजेन पहुंची
13:28IIT की इंजिनियरों को इसका पता लगाने की जिम्मेदारी दी गई
13:32कि आखिर ऐसी क्या वज़े है जो मूर्ती अपनी जगे से हिल नहीं रही
13:39अभी पक्ये तोर पर कोई नहीं कह रहा
13:41पर इंजिनिरिंग, पुरातत्व विशेशग्यों और स्थानिय प्रशासन के अनुसार
13:46इसके पीछे धोस, वैज्यानिक और तक्नी की कारण हो सकते हैं
13:53खड़े हनुमान जी की उचाई करीब 8 फीट है
13:56पहली संभावना ये है कि ये मूर्ती की पूरी सन रचना नहीं
14:00यानि जो उपर नजर आ रहा है सिर्फ उतना नहीं है
14:03उसके नीचे का बाकी हिस्सा जमीन के अंदर काफी गहराई तक मौझूद हो सकता है
14:09इसलिए IIT की टीम ने विशेश उपकरणों से ये पता लगाने की कुछिश की
14:14कि मूर्ती जमीन के अंदर कितनी गहराई तक है और उसके नीचे क्या मौझूद है
14:23पुरातत्व विशेशग्यों के अनुसार एक संभावना ये भी है
14:27कि मूर्ती को प्राचीन इंटरलॉकिंग तकनीक से स्थापित किया गया हो
14:31यानी नीचे के पत्थरों को इस तरह आपस में फिट किया गया हो
14:35कि वो एक दूसरे में लॉक हो जाए
14:38ऐसी स्थिती में मूर्ती को उपर से पकड़ कर खीचा नहीं जा सकता
14:43क्योंकि नीचे के पत्थर भी उससे जुड़े होंगे
14:46जो प्रितिमा यह बने हुई है वो इंटर लॉकिंग एंची कि प्रिती में स्थरों
14:54फघले कि जो जोड़ने का था उसका अलगी तरीके अपनाथे उस तरीके सेत 109 इस तिलाओ को जोड़ा गया है
15:03और सिलाओं को जोडने से और भी जादा मजबूती आ गई है क्योंकि ये मूर्ती 127 बर्स पुरानी है उस
15:09समय जो टेक्निक यूच का थी जो सिल्पकार टेक्निक यूच करते थे उस टेक्निक में ये एक मिस्रर बनाते थे
15:16जिसमें डाल रहती थी गुड़ रहता था रार का बे
15:28उस श्ञाओं के मजबूत वेस के बीच में ये मूर्ती को तरासा गया होगा तब जाके ये मूर्ती इतनी मजबूत
15:35हो चुकी है
15:39एक संभाबना के अनुसार मूर्ती शायद किसी बड़ी शिला का हिस्सा हो और उसका निचला हिस्सा जमीन में मौजूद चक्टान
15:47से जुड़ा
15:47अगर ऐसा है तो मूर्ती को अलग करने के लिए सिर्फ क्रेन से काम नहीं चलेगा
15:53पहले ये समझना पड़ेगा कि मूर्ती और चक्टान आपस में कहां जुड़े हैं
15:59निश्चित तोर पर ही यह तो सम्मव है कि मूर्ती जमीन के नीचे सिला से जुड़ी हुई है
16:04यदि मूर्ती सिला से नहीं जुड़ी होती तो अभी तक जिस दिन हमने नीव खोदने का काम सुरू किया था
16:10उसी दिन ही मूर्ती को मिस्थाबित कर सकते थे
16:12एक्चुली यह मूर्ती बहुत पुराने जमाने के सो साल के उपर पुरानी मूर्ती है
16:16उस समय जो भारती यह सिल्पकला है वो पत्थरों के बेस पे ही मूर्तीयों का निर्मान किया जाता था
16:22और सिलाओं को आपस में जुड़ा जाता था
16:24नीचे एक बहुत बड़ी सिला होगी उस सिला के पार्ट की ही यह मूर्ती है
16:28सिला से काटके यह मूर्ती बनाई गई होगी इस कारण से यह मूर्ती अभी जमीन से नहीं निकल पा रही
16:33है
16:33जब हम गहन सरबे करेंगे अंदर जाके और देखेंगे तब हमें पता चलेया कि नीचे एक मजबूस सिला का बेस
16:39इसमें बना हुआ है
16:43विजशग्यों के अनुसार मूर्ती जिस पत्थर से बनी है वो मालवा बसॉल्ट हो सकता है
16:48ये एक कठोर ज्वाला मुखी का पत्थर होता है
16:51हालकि इसका मतलब ये नहीं कि वो टूप नहीं सकता अगर गलत दिशा में फोर्स लगाया गया तो टूपने का
16:58खत्रा होता है
17:03मूर्ती जितनी भारी होगी उसे खिसकाने के लिए उतना ही ज्यादा बल चाहिए होगा
17:08लेकिन यहाँ सिर्व वजन की बात नहीं है
17:10अगर मूर्ती का निचला हिस्सा यानि बेस जमीन के साथ लौक है
17:14तो उसे खिसकाने के लिए घरशन यानि फ्रिक्षन और प्रतिरोधक बल दोनों से पारपाना होगा
17:19यानि सवाल सिर्फ ये नहीं कि मूर्ती कितनी भारी है बलकि मूर्ती जमीन से कितनी मजबूती से जुड़ी है
17:29Ground Penetrating Radar के जरिये ये पता लगाने की कोशिश की जा रही है कि जमीन के नीचे क्या है
17:35GPR का फायदा ये है कि हर जगेत तुरंत खुदाई करने की जरूरत नहीं पड़ती
17:40अगर जमीन के अंदर कोई अलग घनत्व वाली चटान, बुनियाद या इंटरलॉकिंग स्ट्रक्चर है
17:46तो Radar Response से उसका नक्षा तैयार करने में मदद मिल सकती है
17:52ये मंदिर 170 साल पुराना था और प्रतिमा के बारे में कहा जाता है कि उससे भी पुराना
17:59वर्षों से जो सिंदूर और तेल चड़ाया गया उसकी वज़े से इसकी आंतरिक संगजना में सुक्ष्म दरारे होनी की आशनका
18:07है
18:08अगर क्रेन या बुल्डोजर से जरूरत से ज्यादा बल का प्रयोग कर लिया जाएगा तो आशनका है कि प्रतिमा बीच
18:16से खंडित हो सकती है और प्रशासन ऐसा बिलकुल नहीं चाहता
18:20अब तक प्रशासन की कोशिशों और विशेशग्रू की जाच में हफ्तों बीच चुके हैं कारण जानने की प्रतीक्षा सब को
18:28है पर कहते हैं न होई है सोही जो राम रची राखा और ये तो प्रधुराम के सबसे अनन्यभग हनुमान
18:35जी की बात है
18:41धर्म गरंतों और मानेताओं के अनुसार अपने महा प्रयान के समय भगवान श्रीराम ने हनुमान जी की अनन्त सेवा से
18:48प्रसंद हो कर उन्हें आशीरवाद दिया कि जब तक इस प्रितवी पर श्रीराम की कता और उनका नाम लिया जाएगा
18:55तब तक हनुमान जी के शरीर में प्राण रहेंगे और वो इस धर्ती पर सशरीर जीवित रहेंगे
19:01अब माना जाता है कि हनुमान जी तब से हर युग में अपनी उपस्तिती का ऐसास कराते हैं
19:12धार्मिक मानेताओं में ये माना जाता है कि त्रेता युग में जब हनुमान जी समुद्र पार करके लंका पहुँचे
19:17और माता सीता को भगवान राम का संदेश सुनाया तो माता सीता ने उन्हें अजर अमर होने का वर्दान दिया
19:27एक मानेता ये भी कहती है कि जब भगवान श्री राम अवतार फून होने के बाद वैकुंठ लोटे
19:33तो हनुमान जी को राम कथा हर युग में जन जन तक पहुँचाने और भक्तों की रक्षा का दायत्व सौप
19:40कर गए
19:40इसी कारण से हनुमान जी का उलेक हर युग की कथा में मिलता है और उन्हें चिरन जीवी माना जाता
19:47है यानि आज भी जीवत
19:51धर्म ग्रंथों के अनुसार आठ लोग चिरन जीवी माने गए हैं
19:55आठ ऐसे लोग जो हर युग में हमेशा रहेंगे अश्वत्थामा, बली, व्यास, विभीशन, क्रिपाचार, परशुराम और हनुमान
20:04साथ ही मारकंडे रिशी का नाम लेने से भी निरोगी काया और लंबी आयू का वर्दान मिलता है
20:12मानेता है कि श्री राम के बैकुंठ प्रस्थान के पश्चात हनुमान जी गंध मैदन परवत पर चले गए और भगवान
20:19राम का सुमरन करने लगे
20:31फिर द्वापर युग में भी हनुमान जी का उलेक स्पष्ट रूप से मिलता है जो उनकी त्रेता से द्वापर की
20:38यात्रा का वर्दन करता है
20:44कहा जाता है कि वनवास के दौरान भीम दुरापदी की खुशी के लिए गंध मादन की परवत की और सुगंधित
20:51कमल लेने के लिए गए
20:52रास्ते में उन्हें एक वृत बंदर मिला जिसकी लंबी पूछ के कारण रास्ता रुका हुआ था घीम ने एहंकार में
20:59बंदर से कहा पूछ हटाओ
21:02जब भीम बहुत अभीमानी हो गया था कि मैं प्रत्वेवे सब्सक्तिशाली हूँ इस गवन को दूर करने के लिए कि
21:11जब भी किसी अंकार आता है चाहिए वो रावन हो चाहिए कंस हो तो गवान उसको एक सबक जरूर देती
21:17तो ऐसा ही हनमान जी ने कहा थी इसका बहुत अ�
21:28जब भीम आया तो उन्हें बड़ी कोशिश की किस तरह से उस रस्ते से हटाये जाए तक हनमान जी ट्रस
21:34से मसनी हुए और तब जाके भीम का अंकार डूटा कि ये बुरा आदमी मेरे शक्तिशाली है अब हनमान जी
21:41अपने मोल रूप में प्रगट हुए उनको कहा कि कभी अ�
21:45महान आपके जो है न वह आपको पत्म की ओर ले जाता है महा भारत युद्ध से पहले भगवान श्री
22:01कृष्ण ने हरुमान जी से अरजुन के रथ पर धोजा में विराजमान होने का आग्रह किया था ताकि आक्रमण के
22:08वाणों से रथ पीछे ना हटे और पूरे युद्ध
22:11के दोरान हनुवान जी अरजुन के रथ पर धोजा रूप में रहे त्रेता और द्वापर्युग की तरही कल्युग में भी
22:20हनुमान जी की शक्ति की कथा का प्रसंग मिलता है मुगल समराट अकबर ने महा कवी तुलसी दास की भक्ति
22:26के परीक्षा लेने के उद्देश्य से
22:27कहा जाता है कि उन्हें कैद में डाल दिया, उसके बाद जो हुआ वो अद्भुत और विश्वस्ने और कल्पने कहलाया
22:37कल्युग में हनुमान जी के हुने का उलेक मिलता है तुलसी दास जी के समय से
22:42कहा जाता है कि काशी में हर रोज राम कथा कहते थी
22:45एक दिन उन्हें एक प्रेत बिला
22:47तो उन्होंने उससे श्री राम के दर्शन करने का रास्त पूछा
22:52उसने तिर्पत होकर कहा कि मैं हजालों साल से बढ़ रहा था
22:55तुमसे वर मागो
22:56उनका हम सारी दुनिया छोड़ चोड़ चूए हैं
22:58तो हमें क्या वर्द होगे
23:00तदा आप ही कहा
23:01तब उन्होंने चिर्द कर कहा कि राम जी के दर्शन कराओ
23:04तो उसने कहा हम राम जी के दर्शन तो नहीं करा सकते
23:09लेकिन
23:10जहां प्रभु हरुमान का नाम लिया जाता है, वहां से हम लोग दूर रहते हैं, इसलिए हम बड़ सावधान रहते
23:17हैं, और आपकी कथा में रोज हरुमान जी आते हैं, और इस तरह से आते हैं, कि लोग के पहचान
23:22न सकें, वो कुष्ट के रोगी बन कर आते हैं, सबसे बाद
23:25सबसे बाद में जाते हैं तो उस दिन तुलतिधा जी महराज ने कथा समाप्त कि और उने कुछ नहीं नहीं
23:42नहीं
23:45अजिकार नहीं रखता कि लेकिन आप जाए चित्रकोट में और वहां पर प्रभू के दर्शन हो जाएंगे।
24:21अजिकार नहीं रखता कि लेकिन आपके प्रेणा के कैसे होगा।
24:45मिलती है कि तक काली मुगल समराथ अकबर ने जब तुलसिदास का नाम और उनके मूँ से राम जी की
24:50महिवा सुनी तो उन्हें बुलवाया और कहा कि चमतकार दिखाओ।
24:55तुलसिदास ऐसा नहीं कर पाए। तब अकबर में उन्हें फतेहपुर सीख्री के खिले के जेल में डाल दिया।
25:01उस रोज भले ही चमतकार नहीं हुआ। लेकिन खिले की जेल में बंद रहने के दौरान ऐसा कुछ हुआ कि
25:07तुलसिदास जी को छोड़ना ही पड़ा।
25:11अकबर ने का अपना कुछ चमतकार दिखाओ। तो का मैं सेवक हूँ, मैं कोई यादुगर नहीं, मैं कोई खिलाडी नहीं,
25:16मैं कोई चमतकार नहीं दिशा, इससे भी नाराज होगे अकबर।
25:20तो फिर उन्होंने जभीयेर में डाला तो वहुट करूण में यादना करते हुए। फिर उन्होंने हनिमान्चालीशा, आंस में रोते हुए,
25:29श्वता उनके हाथों से लिखना प्रा� bandwidth हुआ।
25:31और करते हैं कि हान्मान चलीशा को पूरा करते करते जो होता है वो तमान उत्पाती बंदर बहु से सारे
25:40बंदर अगर आ गए और वो आ करके काम सी काप्यों पद्रों किया तब बिर्बल ने का कि प्रभू बासाजी
25:46क्या अब कोई चमतकार देखना सेस है अब कोई चमतकार आ�
25:51से अकबर बहुत प्रभावित होते हैं फिर प्रणाम करके सादर तुलसी डाजी को जिल से बाहर कर तो चले आते
25:57हैं
26:06कहते हैं अकबर ने तुलसीदास की भक्ती की शक्ती देखी तो दिल्ली के कुनोट प्ले स्थित हनुआन मंदिर पर इसलामी
26:12प्रतीक चांद अरपन किया
26:14और आज भी कहा जाता है कि वो वहीं पर उसी रूप में स्थित है और यही कारण रहा कि
26:20उस मंदिर पर कभी किसी इसलामी आक्रांता ने आक्रमण नहीं किया
26:44क्या हजारों वर्ष पहले यहां आये थे हनुमान जी क्या सैक्ड़ों वर्ष पहले अक्बर ने देखी थी हनुमान जी की
26:53शक्ती क्या हनुमान जी ने यहां बाल रूप में दिये थे भक्तों को दर्शन
27:00हर युग में हनुमान जी की उपस्थिती का वर्णन धर्म गरंथों और लोक मानिताओं में मिलता है
27:05उसी क्रम में ये माना जाता है कि तुलसिदास जी को पैद में रखने के बाद
27:10अकबर ने तिले में जो देखा उसके बाद उसे तुल्ची दास जी की भक्ती पर विश्वास हो गया था
27:16ये भी कहा जाता है कि एक बार तुल्ची दास दिल ली आये और उन्होंने हरुमान मंदिर में पूजा की
27:23अकबर जो पहले से ही प्रभावित था उसने अपने भाव प्रकट करने के लिए मंदिर को एक चांद और कलश
27:30धेट किया
27:46हलाकि एक मानिता ये भी है कि अकबर को जब संक्तान नहीं हो तो वो अपनी मनोकामना लेकर हनुमान मंदिर
27:53आया
27:53और मंदक पूरी होने पर उसने शद्धावश मंदिर को चांद भेट किया
27:59हरा ये हो अपनी वह जान हैं कि महराजा अकवर को यह ँरूत अपर विश्वास था जब अनके कोई संतान
28:06नहीं हो अरिती
28:06तब उन्होंने ऐसी माननीता की थी कि मैं हरुमान जी के मंदिर में जाऊए और महां बग्मान परसन होगे अस
28:15तो इस तरह के मनवकामना यह की थी
28:33अकबर की हरुमान मंदर के प्रति विशेश आस्था की गवाही देता है
28:38मंदर कितना पुराना है इसको लेकर अलग-अलग कालखंड में राजाओं का उल्लेख होता है
28:43लेकिन यहां हरुमान जी की प्रतिमा कब से है इसकी कथा महाभारत काल से जोती है
28:50महावारत काल में जब पांड़ों का विजय पराब कीती तब यह हनमानजी पूजा अरिशनानों ने कीती यह इंदर परस्था के
28:57नाम से यह शहर विध्या था उस्तने में जवापर यूग में यह स्वेम प्रकट ही मूर्ति है हनमानजी का बाल
29:05रूप है और इसलिए पांड़
29:19मंदर के साथ एक अद्बुत रिकॉर्ड यह चुड़ा है एक अगस्त 1964 से मंदर में निरंतर राम नाम का जाप
29:26किया जा रहा है यह विश्व का सबसे लंबा जाप माना जाता है और इसे गिनेस बुक आफ रिकॉर्ड में
29:33दर्ज किया गया है
29:35हनुमान जी के प्रती आस्था को लेकर पूरी दुनिया उस वक्त हैरान रह गई थी जब अमेरिका के पूर विराश्ट
29:40पती बराक ओबामा ने एक इंटर्व्यू में बताया कि वो हनुमान जी में विश्वास सकते हैं और हमेशा हनुमान जी
29:48की एक छोटी मूर्थी जेल मे
29:49जी कि एक शुमान की में भी मूर्थीlov कि बना बती में अंहें उस खोतार है हे लिए मैंजी बाकति
29:57है गहाँ एक।
30:00इस है हंड़ अंहें स्वाद पर
30:06क्यूशन शुमान मंदर वे बमाने से काफी पुराना अध्था निरिश्टा रहा है
30:19पहले उन्होंने जब का मांगी गाड तो मैं कुछ समझा नहीं तो बाद में उन्होंने का मैं हनुमान का भग्त
30:25हूँ और मैं अपने पाकट में उनको आलवेज करता हूँ आप मुझे एक बहां से एक मूर्ती भिजवाईए उसके बाद
30:33हमने एक मूर्ती बनवाई यहां पर �
30:37गोल्ड से पालिश करवाई उसको सारी उसमें लगे कोई दो महिने लग गए हमको और अगस 2008 में हमने वो
30:46मूर्ती उनको भिजवाई उस वक्त तो वो बिजी थे इलेक्शन कंटेस्ट कर रहे थे हिलेरी क्लिंटन के साथ और जैसे
30:56मूर्ती उनके पाफ पहुंची वो हिलेरी
30:59क्लिंटन को उन्होंने डिफीट किया जब कि सब लोग कह रहे थे कि हिलेरी क्लिंटन जीत जाएंगी
31:03ओबामा के राश्टपती रहते भारत में प्रतिभा आडवानी से जब उनकी मुलाखात हुई
31:08तब ओबामा ने उन्हें भी वो प्रतिमा दिखाई और बताया कि हनुमान की भक्ती उन्हें मा से मिली
31:14कुछ शड़ों बाद मैंने देखा हूं मेरे तरह वापस आ रहे हैं बोला हे है कि और बहुत क्यूट सी
31:20एक
31:20सिल्वर फिगरीन ऑफ हनुमान जी ही और इस पॉकेट एंडर इन इंस्टेंट कनेक्ट फूमी आइस वर्ड़ों यह कहा कि वह
31:29मेरा लखी चाम है मैं हमेशा साथ रखता हूं इसको डोनेसिया में जो स्वामी गुर्वान जी है तरुपति वाले उन्हों
31:35इनकी जब मां थी म
31:37मां इनकी अपनी मा के साथ यह जब वहां थे इंडोनेसिया में रहते तो उनसे मिले थे तो उसमया उनको
31:42उन्होंने हनुमान जी जो है दिये थे कि अपने पास रखना तो मिश्व के सबसे बड़े आदमी बनोगे उसके आसे
31:47लगातार हूं हनुमान जी रखे हुए अपने �
31:53हनुमान मंदिर में भक्ती की धारा सदियों से निरंतर बह रही है भक्तों का विश्वास है कि यहां हनुमान जी
31:59की उपस्थिती महसूस होती है
32:05हनुमान जी की आज भी उपस्थिती को लेकर एक किस्सा नीम करॉली बाबा से भी जुड़ता है
32:11आज कल एक फिल्म हनुमान अंश के जरिये बच्चा बच्चा उस कहानी को जान रहा है
32:16लेकिन हम आपको बताते हैं कि वहां की मान्यता क्या है
32:32कि अगरा अगरा आप अगरा आप अगरा आप अगरा आप अगरा आप
32:56कर यूग में हनुमान जी की उपस्थिती का एक विश्वास नीव करॉडी बाबा के
33:00रूप से भी जोड़ा जाता है नीव करॉरी बाबा जो हनुमान जी के भक्त है
33:04लेकिन उनके भक्त मानते हैं कि नीव करॉरी बाबा ही हनुमान जी के अफ्तार थे
33:10प्रण अप्रया बख्तों का उनके इसको बुलाने की स्वावर की परदाए है।
33:15तक में पर चार चार साल से आ रहा हूं जबसे आया हूं जबसे मेरा जीवन बने गया है।
33:20तक मैं अफ़े परिवार का और हम लोग यह साल में चोते बार या तिसरी बार आ रहे हूं।
33:36क्या नीब करौरी बाबा कल यूग में हनुमान जी के अफ़तार थे?
33:51क्या नीब करौरी बाबा के हनुमान रूप को किसी ने देखा था?
34:00नीब करॉरी बाबा के प्रती भक्तों की आस्था तो उनमें भगवान देखती ही है
34:04लेकिन फरुखाबाद प्रशासन की वेब साइड भी उनके इस विश्वास को पुखता करती है
34:21अमेरिका के हावर्ड यूनिवरस्टी के प्रफेसर रिचर्ड अलपर्ड के अनुसार जब वो अपनी समस्याओं के निदान के लिए भटक रहे
34:27थे
34:27तब किसी ने उन्हें मीब करॉरी बाबा के कैची धाम जाने का सुझाब दिया था
34:32वहां उन्होंने बाबा के जिस रूप को देखा वो अद्भुत था और उसके बाद वो खुद भक्त रामदास हो गए
34:38और रपल्क त्रह भंग बासु को झाल थे मना को देंक लिए हा बख़् प्र्रुप उपना भ्रें स्वेथे कि एंग
34:56ऑंडल के कि कि ए बुप उ सिए्या किᆃ स्वेव स्वेफ मर्स को दाम माट इवे हैं
35:01व्यर्च फव्व में व्यर्ववावर स्वेफ रास
35:08यहां थो नहीं पर नहीं वे दिए प्वारत शांती की तलाश में आये और कैची धाम गए तो वहां से
35:23लौट कर उन्हों ने दुनिया के मशूर ब्रैंड एपल की शुरुवात की
35:27फेस्बुक के संस्था पक मार्क जुकरबग को जब परिशानी हुई तो वो भी बाबा के धाम आये और इसका जिकर
35:33वो खुद करते हैं
35:56कि कि तुम्पूब व इस जा की ही तुम्पूद एड वी की तुम्मपूबु इन एजिया इपर ऴूस जालन आट थे
36:04अजिए इविए विस्पूबुब वग्फए ले संन्हें एपल ट्रह ले फट्वे बन एवए ले श्डबुब लेवां अश्बाुब की तुम्मन एव
36:38दुनिया की आसी तमाम हस्तियां हैं जिनके पास बाबा नीम करॉरी से जुड़े अद्भूत अनुभव हैं।
36:44हॉलिवुड की प्रसित अभिनेत्री जूलिया रॉबर्स ने बाबा की सिर्फ एक तस्वीर देखी और उनका मन असीम श्रग्धा से भरुठा।
36:55साल 1900 में जन्में उत्तर प्रदेश के लक्षमी नारान शर्मा शांती की तलाश में यूबी के नीब करॉरी से उत्तरा
37:02खंड के कैची धाम तक पहुँचे थे।
37:04हरुमान जी के प्रती उनकी आस्था बहुत ग्यारी थी। कैची धाम ने उनका आश्रम पूरे विश्रु में आस्था का केंदर
37:11बना।
37:131974 में बाबा ने देहित्याग दी लेकिन जहां उनका आश्रम है वो अस्थान हरुमान शक्ती और भक्ती का प्रमुक केंदर
37:22बन चुका है।
37:22जो वहां आता है वो बाबा के रूप में हरुमान जी के ही दर्शन करता है।
37:30तर्क अलग अलग दिये जा सकते हैं लेकिन आस्था अपने आप में अद्भुत होती है।
37:35अद्भुत अविश्वस्निया अकल्पनिया में आज के लिए इतना ही देश और दुनिया की बाकी खबरों के लिए देखते रही आज
37:42तक।
37:43कि अविश्वस्निया अविश्वस्निया एफ देखते हैं अविश्वस्निया आप में आप तक।

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