जैसलमेर. 2अक्टूबर को गांधी की तस्वीर के साथ चरखा, स्वच्छता और अहिंसा याद करना आसान है। मुश्किल यह देखना है कि उनके विचार आज की अर्थव्यवस्था में कहां खड़े हैं। गांधी का रचनात्मक कार्यक्रम केवल स्वच्छता तक सीमित नहीं था। इसमें खादी, ग्रामोद्योग, ग्राम स्वराज, बुनियादी शिक्षा, महिला उत्थान, आर्थिक समानता, किसान और श्रमिक समेत 18 विषय शामिल थे। यानी गांधी का सवाल समाज की रोजमर्रा की अर्थव्यवस्था और जीवन पद्धति से भी जुड़ा था। जैसलमेर में इसका सबसे दिलचस्प सिरा ‘स्थानीय’ से जुड़ता है। मरुस्थल की कठिन भौगोलिक परिस्थितियों ने यहां लंबे समय तक जीवन को स्थानीय संसाधनों और सामुदायिक सहयोग पर निर्भर रखा। पानी की सीमित उपलब्धता, पशुधन, पारंपरिक हुनर और दूर-दराज की बस्तियों ने ऐसी जीवनशैली विकसित की जिसमें जरूरत के मुताबिक संसाधनों का इस्तेमाल और स्थानीय कौशल की अहमियत रही। इसे गांधी के विचारों का परिणाम नहीं कहा जा सकता, लेकिन स्वावलंबन और स्थानीयता के उनके विचारों से इसका संवाद जरूर दिखाई देता है।