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Meerut Jail का ‘Radio Parvaaz’ इन दिनों अपने unique concept को लेकर चर्चा में है। यहां कैदी सिर्फ गाने सुनते नहीं, बल्कि खुद RJ बनकर रेडियो शो भी चलाते हैं। खास बात यह है कि प्यार, जुदाई और धोखे वाले पुराने Bollywood songs की भी खूब demand रहती है। कैदी अपनी पसंद के गानों की request देते हैं और फिर Radio Parvaaz पर उन्हें बजाया जाता है। करीब 4 घंटे के इस broadcast में music के साथ motivation और life skills से जुड़े programmes भी होते हैं। जेल के अंदर बना यह radio inmates के लिए entertainment के साथ emotional connection का भी जरिया बन गया है।

Meerut Jail’s ‘Radio Parvaaz’ is grabbing attention for its unique concept. Here, inmates don’t just listen to songs—they also become RJs and run their own radio shows. Interestingly, old Bollywood songs about love, separation and betrayal are among the most requested tracks. Inmates submit song requests, which are then played on Radio Parvaaz. The four-hour daily broadcast also features motivational content and life-skills programmes. The jail’s radio station has become more than just entertainment for inmates, offering them an emotional connection through music while also creating a positive and engaging environment inside the prison.

+HM+

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00:04मेरट जील की चार दिवारी के अंदर से अगर आपको प्यार जुदाई और धोके वाले पुराने गानों की अवास सुनाई
00:10दे तो शायद एक पल के लिए आप भी सूच में पढ़ जाएंगे
00:13आखिर जील में बंद कैदियों को ऐसे गाने सबसे ज़ादा क्यों पसंद आ रहे हैं मामला किसी फिल्म की कहानी
00:19का नहीं बलकि मेरट जो की उत्तर प्रदेश में है उस जील का है उसके अंदर एका प्रोग्राम चल रहा
00:25है जो की है रेडियो परवास दरसल ये पूरा रेडिय
00:29रेडियो इस्टेशन जील के अंदर ही चल रहा है जहां कैदी सिर्फ गाने नहीं सुन रहे हैं बलकि खुद आर्जी
00:35बनकर रेडियो चला रहे हैं मिरट जिला जील में शुरू किया गया ये इंटरनल रेडियो इस्टेशन कैदियों के लिए एंटरटेर्मेंट
00:55और कनेक्�
00:57सिर्फ उनका बैरेक नंबर बताया जाता है सबसे इंटरस्टिंग बात है उनकी गानों की पसंद दरसर रिपोर्ट की माने तो
01:0390, 80 और 70 के दशक के पुराने हिंदी गाने कैदियों के बीच काफी जादा पॉपलर हैं पुरुष कैदिय जुदाई
01:10धोके वाले सौंग और भ
01:25हिला कैदियों के बच्चे जिल से बाहर रहते हैं अधिकतर ऐसा दिखा जाता है ऐसे में मा बच्चों और परिवार
01:32से जुड़े गाने अपने घर और अपनों की याद दिला देते हैं यानि कि इन गानों के बीचे सिर्फ एंटरटेर्मेंट
01:37नहीं बलकि एक एमोशनल एं�
01:53के निबाता है और बाकी चुक कैदी स्टूडियों में आकर गाने बजाते हैं और उन्हीं गाना गाने का मौका भी
01:59मिलता है ये रेडियो करीब रोज चार घंटे चलता है सुबह दो घंटे और शांप को दो घंटे इसके लिए
02:05कंप्यूटर मिक्सर और जो हाई-टेक स्पी
02:22की 11 रेडियो परवास सेंटर उत्रपरदेश के अलग-अलग जीलों में चलाये जा रहे हैं यानि कि जिस जगा को
02:27आमतोर पर सिर्फ सजा और बंदिशों से जोड़ा जाता है वहां म्यूजिक एक अलग तरह का कनेक्शन बना रहा है
02:33प्यार जुदाई धोके और प्यार की य
02:52की 11 वालग जीज़ा भी तरह कर ear बंदिशों सेंटर धर जाता है टन्ट अलग-जीक यारा-जी यार घ
03:01है लेंगी है झालग-जीज़ खना की 11 वाल-बंदेशब क्या झाल-बंदा भी टूलग-जीज़ ओर सब्सक्या का ड़पना
03:01का अवाफनीज़ और स्वारे ओंसक्र प्

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