00:10ुशिवजी से प्राप्त तीन अचूक बानों के बल पर वह पूरे युद्ध का पासा पलट सकते थे।
00:17भगवान श्री कृष्ण ने उनकी इस असीम शक्ती की परीक्षा लेने का निर्णय किया।
00:22कृष्ण ने पूछा इस विशाल पीपल के पेड के सारे पत्तों को एक बान से कैसे भेदोगे।
00:27बरबरीक ने आखे बंद कर मंत्र पढ़ा और अपना पहला जादूई बान छोड़ दिया।
00:32वह बान पेड के एक एक पत्ते को चूकर वापस बरबरीक के पैरों के पास आ गया।
00:38लेकिन कृष्ण ने एक पत्ता अपने पैर के नीचे छिपा लिया था ताकि परीक्षा अधूरी रहे।
00:43अध्भुत बात यह हुई कि वह बान आकर सीधे कृष्ण के पैर के चारों और चक्कर काटने लगा।
00:49बरबरीक समझ गए कि पत्ता कृष्ण के पैर के नीचे दबा है और उन्होंने बान वापस बुलाया।
00:56कृष्ण समझ गए कि यह योध्धा क्षन भर में युध्ध का परिनाम बदल सकता है।
01:00भर्म की रक्षा के लिए कृष्ण ने बरबरीक से उनके शीश का दान मांग लिया।
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