Skip to playerSkip to main content
  • 8 minutes ago
गयाजी को मोक्ष की पावन धरती क्यों कहा जाता है. यहा पिंडदान करना क्यों जरूरी है? क्या है इसके पीछे की कहानी? रिपोर्ट-रत्नेश कुमार

Category

🗞
News
Transcript
00:03देशतुनिया में बिहार के गयाजी की मोख्ष नगरी के रूप में प्रस्थी है।
00:52गयाजी ने गयाजी ने गयाजी ने गयाजी ने गयाजी से यग्य के लिए उसका पवित्र शरीर दान में मांगा।
00:58गयासुर सहर्ष फल को दट पर लिट गया।
01:01यग्य के दोरान जब गयासुर का शरीर हिलने लगा तो उसकी चाती पर विशाल धर्मशीला पत्थर रखा गया।
01:09फिर भी शरीर ना रुका तो भगवान विश्णु ने स्वयम प्रकट होकर अपने दाएं पैर से शिला को दबा दिया।
01:16विश्णु जी के पैर पड़ते ही गयासुर शान्त हो गया। आज उसी स्थान पर विश्णु पद मंदर स्थित है।
01:47भगवान विश्णु ने उसे अपने दाहिने पाहों से दबा कर यह आशिरबात दिया।
01:55कि अब यह शरीर तुम्हारा इतना पवित्र होगा कि इस स्थान पर जो अपने पूरवजों के नाम से पिनदान तरपन
02:06करेगा उनकी उनको मौक्ष की प्राप्ति होगी।
02:10यग्य के दोरान भगवान विश्णु ने गयासुर को वर्दान दिया था कि यहां की धर्ती हमेशा के लिए पवित्र रहेगी।
02:19यहां जो व्यक्ति पिनदान करेगा उसके पितरों को मौक्ष की प्राप्ति होगी। इसलिए यहां पिनदान किया जाता है।
02:26यह पाँच कोस का छित्र है पंच क्रोशम गया छित्रम तन मध्धे सर्वतीर्थानी इसमें सभी तीर्थों का आवाहन है।
02:39ब्रम्हा ने जग्य करके यहां पर सभी तीर्थों का आवाहन किया।
02:44त्रेता युग में माता सीता और द्वापर युग में पांडवों ने भी यहां पिनदान किया था।
02:50आदिकाल से चलिया रही ये परंपरा आज भी सनातन धर्म में अटूट विश्वास का कींद्र है।
02:57त्रेता में रामचंद्र जी भी दसरत जी के का पिनदान किया, फिर पांडवों का भी यहां आजमन हुआ है। तो
03:06यहां शनातन के आदी तीर्थों में है।
Comments

Recommended