00:13नमो भारत रेल जब तयार की जा रही थी तो इस बात का पूरा खयार लखा जा रहा था
00:18किसमें यात्रा करने वाले याच्चों को किसी भी तरह की कोई आसुविधा ना हो
00:23इसके लिए इस बात का खयाल बहुत हद तक रखा गया कि जो भी स्टेशन है नमो भारत रेल का
00:29वो आसपास के सभी जो टांसपोर्ट के साधन है उनसे जुड़ा रहे
00:34इस वक्त हम मौझूद हैं सराय काले खांके स्टेशन पर और यहां पर आप देखे कि पूरी एफोबी तयार की
00:39गई है फोटोल बीच इसी एफोबी के जरिये नमो भारत रेल स्टेशन मेट्रो स्टेशन और हजरत निजामुद्दीन जो रेलवे स्टेशन
00:49है उसको जोड़
00:50गया है मतलब आप नमो भात्रे से याता करते हुए आईए और वहां से उतरकर आप सीधे जा सकते हैं
00:57इस तरफ रेलवे स्टेशन की तरफ और अगर आपको वहां से उतरकर दिल्ली के दूसरे इलाकों में जाना है तो
01:04आप यहीं कहीं से एक्जिट करिए और सामने आपको य
01:10नहीं भी अपनी कार लाने की जरुवत नहीं है अमूमन होता यह था कि कोई भी जो इस तरह का
01:15बड़ा इंफर्स्ट्रक्शर होता है उसमें दिक्कत यह थी कि वहां तक पहुस्टने में बहुत दिक्कत होती थी या फिर वहां
01:22से जब आप निकले तो फिर पब्लिक ट्रांस
01:39सुधा ना हो खास बात यह भी कि यहां आप देखेंगी जिस तरह से जो ट्रेवलेटर्स हैं वह लगाए गए
01:44हैं मतलब इस तरह की सुधाएं आप अमूमन एयरपोर्ट पर देखते हैं और एयरपोर्ट के अलावा आपको यह किसी बस
01:52स्टेशन या फिर रेलवे स्टेशन �
01:54पर दिखाई नहीं पड़ती लेकिन इसे भी यहां पर लगाया गया है पहले आप सोचे कि यही ट्राइफिक जो की
01:59में रोड से रेलवे स्टेशन की तरफ टेवल करती थी तो इस पूटर्वर्ट के नीचे आती थी और वहां पर
02:05बहुत लंबा जाम होता था उस जाम के बी�
02:21को इस नमो भात रेल स्टेशन को तयार किया गया, इस वा腳 खिया लगा गया है, वह यातरी जो गाओं
02:27द्हास से आरे है दिली की तरफ या फिर मेरत से आ रहा है, इन्ने दिली जाना है, दिली के
02:32आगे जाना है, मुंबई जाना है, यहीं से टेंट पकर नी है तो उन्हें अ�
02:50अपने गाउं घर से आता है तो अनाज भी लेकर आता है और वो कोशिश करता है कि जहां रहने
02:55जा रहा है वहां कुछ दिन तक कुछ खरीदना ना पड़े और इसी जद्दो जहद में को कई बार बहुत
02:59सरा समान अपने सर पर रखकर ले जाता है उन्हें कोई दिक्कत ना हो इ
03:17कुल मिलाकर इंफरस्ट्रक्शर किस तरह का होना चाहिए पुब्लिक फ्रेंडली होना चाहिए इस बात का ख्याल भी यहां पर बहुत
03:25अच्छे तरीके से रखा गया है
03:35तो अभी जैसे आप आय तो इस पे खड़े हो गई आराम से आप इतना समान लेकर आई इस पे
03:54खड़ी हो गई आराम से कोई दिक्कत ने है
03:59इसँ एयसे आती पैदल दिक्कत हो
04:12इयाद्तियों के सुईदा के लिहाज से नमो भारत रेल ने का कुछ बदला है यह हम सब जानते हैं
04:18लेकिन आज हम समझने निकले हैं कि कैसे नमो भारत रेल ने स्विती पीज़िर का कूरे
04:23economic infrastructure को
04:25बदल कर रख दिया है वो लोग
04:27जो दिल्ली में नौकरी करते थे
04:29मेरट में रहते थे पहले दिल्ली में प्रॉपर किराय पर
04:32घर लेकर नौकरी करते थे लेकिन अब वो
04:34रोच अपने घर से ही दिल्ली की
04:36तरफ अब डाउन कर पाते हैं कितना
04:38बदलाओ आया इस पूरे कॉलिडोर में याज हम समझने कोशिश करेंगे हमने भी अपना
04:41टिकट ले लिया है चलिए यात्रा शुरू करते हैं और जानते हैं कि विकास की यात्रा
04:45कितनी तेज़ दौड रही है
04:59इसी साल परवरी में नमो भारत रेल अपने पूरे
05:0382 किलोमेटर के स्टेश पर दौणा शुरू कर चुकी है और फरवरी से आज हम खड़े हैं सेप्टेंबर में
05:09और इतने ही महिनों में आप समझे कि इस नमो भारत रेल में हर रोज एक लाग से
05:15जादा यात्री सफर करते हैं 28 अगर्स वो तारीक थी जब एक ही दिन में
05:20एक लाग 68 हजार यात्री ने रिकॉर्ड यात्रा की थी एक ही दिन के भी तर
05:25अब तक दावा ये किया जा रहा है कि इतने ही मेनों में फरवरी से अब तक
05:28साड़े चार करोड से जादा लोग नमो भारत रेल का हिस्सा बन चुके हैं
05:33वो इसमें यात्रा कर चुके हैं आज हम भी इसमें सफर कर रहे हैं दिल्ली से हम चले थे गाज़यबाद
05:39पहुच चुके हैं
05:40और रास्ते में अब हम लोगों से बात करने जा रहे हैं समझने जा रहे हैं कि आखिर उनके जीवन
05:45में
05:46नमो भारत रेल के आने से क्या बदला हुए इसमें एक बहुत बड़ा सार्विस क्लास है जो दिल्ली में जॉब
05:52करता था
05:53मेरट में गाज़यबाद में रहता था उनके लिए मजबूरी थी कि वो दिल्ली में आकर किराय का घर लें
05:58क्योंकि रोज सरक के जर्य यात्रा करना आसान नहीं होता था इस यात्रा को आसान मनाया है नमो भारत रेल
06:04ने किराय के घर से उन्हें अपने घर तक पहुचाया है इस ट्रेल ने आज इसमें बेटे तमाम यात्रों से
06:09हम बात करने के कोशिश कर रहे हैं
06:11क्या नाम है आपका मेरनाम सुसील कुमार है क्या करते हैं आप मैं टेलर का काम करता हूं तो कहां
06:21रहते हैं मेरट दिल्ली दिल्ली दवाई लेने के लिए आये थे पहले कभी सुचते थे आपकी अगर बिमारी होई भी
06:32है तो मेरट से दिल्ली जाके दवाई लेना तो काफी टा
06:41चार बजे और रात को दस कम समनों दस बज जाते थे घर पहुचने में अब काफी आसान हो गया
06:46जल्दी पोच आप देखो मैं एक डेड़ एक बजा है घर पो जमा थोड़ी देर में आद गंटे में सुबह
06:54कब निकले ते आप सुबह चार बजे वो साड़े-चार बजे निकल
07:09पा रहे हैं पहले बता रहे हैं कि पुरा दिन लग जाता था लेकिन अब क्यों सुच। नाम कहा रहती
07:21है।
07:26नंद्गराम में रहते हैं पहले कैसे यात्रा करते थे इस रेल से पहले पहले याटों से चलते थे ते ताइम
07:34कितना लगता था ओई आधी गंटा मान लो अब तो जो भी लगे क्या बदलाओ आया इस रेल के आने
07:48से आपकी तैयारी में क्या फरक बढ़ा बहुत फरक पड़ा स
07:52हर चीज चेंज हो रही है देरे देरे एकोनॉमिक्स बढ़ रही है जी डीपी अपना ग्रोथ कर रहा है जए
08:02बहुत सारे आप लोग देख रहे हैं कि यह होता है सफर कि आप अराम से आईए एक किताब रख
08:07लीजिए उस किताब को पढ़ते हुए आपका सफर आसानी से कर जाए शायद कुछ नया ग्यान वे आपको इस किताब
08:12में मिले लेकिन जब आप यही यात्रा सडक के जरीए बा
08:32पर आप रहने वाले कहां के हो मेरट मेरट में आप रहते हो दिल्ली में कॉलेज है मेरट मेरट में
08:42रहते हो दिल्ली जाना पढ़ाई करने के लिए यह डिसीजन इस रेल के आने के बाद लिया या पहले सोच
08:46लिया था
08:49प्रेली सोच लिया था ऐसे तो मेरा भाई भी पड़ता था पहले अगर ये रेल नहीं होती तो अब दाउन
08:56आप कैसे करते हैं तब भी मेरत से ही करते हैं दिल्ली में रहते हैं नहीं फिर तो दिल्ली में
09:00रहते हैं अभी आप घर से आप डाउन कर पारों कितना अलगता रास्त
09:10मतलब अलग अलग तरि Tubischen तर मेरा मेटम लग जाता आब में डचते में डिल ने जाता है मैष तो
09:15दो गंटे 22 अधल heris Sam
09:19पहले तो पंछ आना पड़ता था जैसे आप स्टुडेंटन भी आ डिली आरहे हो ऐसे कितने वचे हो ओंगे हर
09:27रोज जो आते हों के बढ़ाती परिए
09:37अब इतो परहा ही करते हैं
09:39रहें कहां पढ़ रहा हैं?
09:41मैं थो बिहर से हूं, मैं मेरत ऐहां मेरत कोल्ज आया हूं
09:45स्ले� honoring के फोर्इन हैं के बिहर से हैं, मैं मेरत की कॉलेज में आये है
10:14तो मेरत जाने के लिए कम स्कम चार गंटे लगते थे यहां दिली से तो तीस से चालिस मिनट में
10:22पहुंच जाते हैं
10:24तो मेरत जाने मैं अभी थे थे चालिस मिनट में उतना दुरीत होड़ा है अतना सुविधा भी है सह वसानी
10:39जारें बैट के इसके बहुत सारी महिलाए भी हैं ट्रेन में अम उन से बात करने के कोशिश कर रहे
10:47हैं कि उनके लिए यात्रा कितनी बदली उनके लिए क्या मायने है
10:56जा रही है न्योज तो गाझेवादू मेर्ट में हैं पहले कैसे यात्रव होती थी पहले कैसे आप लोग फूरा दिन
11:16जा अभी कि इतना
11:17बदल गया है अब तो डेड़ घंटे में तया हो जाना जाना इतना बदल गया इससे ज़्यादे क्या बदलेगा पहले
11:28जा रहे हैं तो अब एक दिन रुख कर ही आएंगे अगले दिन आएंगे अब एक सेम डे वापसी घरबार
11:35जाए जल्दी से जल्दी काम हो जाए गंटा मा
11:41वाँ इधर उधर का काम ने मिठा लो तीन गंटे में वापस आजा है तो पहले तो पूरा दिन लगता
11:48था पूरा दिन यहां से ओटो वहाँ से वाँ से वाँ से वाँ
12:12तो आपके लिहाद से क्या फरक पड़ा इस रेल क्या ऐसे सिर्फ यात्रा के लिहाद से नहीं और ओर ओर
12:18ओर जैसे मैं जानकारी लेता हूं अपने बच्चों से अपने टीचर से और मैं इस छेतर का निवासी भी हूं
12:25तो ये एक वर्दान है ये एक सपना है जो हमारे परदान
12:30मंत्री जी ने साकार किया जिनका आज जनन दिन है बहुत बहुत शुब कामना आपके माध्यम से देना चाहता हूं
12:36और यह उनका वर्डान यह प्रताप है कभी हमारा मोदी नगर फ्लाइओर के उपर चाड़ना चाहरा था लेकिन आज की
12:42देट में यह हमारे लिए वर्डान सि
13:24!! तो शायद कभी इसके बार मैं सोचा भी、、
13:26या फिर दिल्ली मेरट के रास्ते में बढ़ते हैं, जहां तक सिर्फ मेरट से ही बच्चे यहां नहीं आते हैं,
13:31वरकि कई सार बच्चे ऐसे भी हैं, जो मेरट के हैं, दिल्ली के हैं, और इन रूट्स पर आते हैं,
13:36उन कॉल्जिस में आते हैं, जो दिल्ली मेरट के बीच में ह
13:38लेकिन उनकी आत्रा भी असान नहीं होती थी, जो कि अप काफी हद पक असान हो गई है.
13:42कुछ महिलाएं हैं, हम उनसे बात करने की कोशिच कर रहे हैं.
13:46क्या नाम एंडिया आपका?
13:47फुस्रूम सिंग.
13:48आपको श्टाबगा गया?
13:49अज़ा डिवेज़ाई है.
13:52क्या नाम एंडिया आपका?
13:54में नाम है रश्मित्यागी.
13:56रश्मित्यागी.
13:57रश्मित्यागी, कहां की हैं आप?
13:59आम कलाप रश्दगर से हैं, मेरट.
14:01मेरट से हैं आप.
14:02अभी आप कहां? दिल्ली से आ रही हैं, गाज़ाबाद से?
14:13वेसे हमारी बीटे का बिजनी से यहां पर हमारे यहां पर भी माकान और मेरट में भी माकान विजनस किस
14:19रिष्का है है यह हमारा कोचिंग सेंटर है कंप्वीटर्स वादा एक बढ़ाओ कि बुजनस के लिहाद से इस रेल से
14:28कितना फैदा हुआ
14:30हम बुजरुगों को तो बहुत फायदार आम से जाते हैं जा एक तो समय कम लगता है और वैसे भी
14:38फायदा गर्मी नहीं लगती है इसी वगेरे कि शुईदा है अच्छी से जितनी गर्मी यहां बढ़ती है उससे कम से
14:44कम यह रेल बचा लेती है तो हमें तो बहुत फायदा है �
14:52कि कोई मीटिंग करने जा रहा हूं दिल्ली या गाजियाबाद पूरा दिन निकल गया उसमें अब होता है कि सुबह
14:58नास्तर के घर से आया और लंच तक घर बहुत अच्छा लेता है बच्चों को भी बहुत मैं फिट है
15:05कि अगर हमें अपने मेरेट पोना तो अपने 20 मिनट
15:08भी नहीं लगती है में घर पहुंचने में बहुत जल्दी पहुंचाते हैं 20-25 मिनट में तो बहुत अच्छा लोग
15:12इन चेहरों की आप मुस्कान देखिए इस यात्रा का हिस्सा बने तमाम लोग को देखिए इस कोच में हर तरह
15:20के लोग बैठे हैं वो पुरुश हैं जो न
15:37आसान हो गई है कि लोगों से जुड़ना आसान हो गया और सबसे बड़ी बात जो लोग कभी किराय का
15:43घर लेकर मेरट या दिल्ली जाते थे उनकी घर वापसी है इस ट्रेन ने करवा दी है
15:49नमस्कार मैं प्रफिसर वी केत्यागी वाइस चांसलर शोबित उनिवर्स्टी बोल रहा हूं नमो भारत ट्रेन का संचालन सरकार द्वारा किया
15:59गया है इससे पूरे एडुकेशन सेक्टर में पूरा टांसफॉर्म होने जा रहा है नई दिल्ली से लेकर बीच में जितने
16:06भ
16:19कोई चीजें थी वो सब सहीमित हो जाएंगी और इस चेत्र का विकास सुनिश्यत है क्योंकि अभी तक यह था
16:26कि NCR से मेर्ट काफी दूर था और कनेक्टिविटी उतनी अच्छी नहीं होने की वज़े से 3-4 घंटे दिली
16:31जाने में लगते थे लेकिन अब इसके चलने से सभ
16:39सब्सक्राइब को मिल सकेगा दन्यवाद
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