सुप्रीम कोर्ट ने मणिपुर के राहत कैंपों में हुई असामान्य मौतों पर चिंता जताईऔर मुख्य सचिव से जवाब मांगा.साथ ही 2023 की जातीय हिंसा से विस्थापित पीड़ितों की मौतों पर विस्तृत रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया. कोर्ट ने 34 मामलों में से केवल 20 मामलों में ही पोस्टमार्टम और राहत शिविरों में मौत के मामलों में केवल 20,000 से 30,000 रुपये मुआवजा देने को लेकर सवाल उठाए. कोर्ट ने राज्य सरकार से मौत की वजहों का पता लगाने, राहत शिविर में रहने वाले लोगों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताते हुएजरुरी कदम उठाने के निर्देश दिए.एक रिपोर्ट में आठ जिलों के राहत शिविरों में 600 से अधिक मौतों का जिक्र किया गया था.कोर्ट 2023 की मणिपुर जातीय हिंसा से जुड़ी मुकदमों से संबंधित याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी.3 मई, 2023 को मणिपुर में जातीय हिंसा भड़की थी.जो पहाड़ी ज़िलों में आदिवासी एकजुटता मार्च के बाद शुरू हुई थी.जो बहुसंख्यक मैतेई समुदाय की अनुसूचित जनजाति का दर्जा देने की मांग के विरोध में आयोजित किया गया था. इस हिंसा में तब से अब तक सैकड़ों लोग मारे जा चुके हैं. कई लोग घायल हुए हैं और हज़ारों लोग विस्थापित हैं.
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