00:04ुरुक्षेत्र के मैदान में अर्जुन मोहवश युद्ध से पीछे हट रहे थे।
00:08तब जनारदन ने अर्जुन को ज्यान देने के लिए अपनी माया फैलाई।
00:12उन्होंने अर्जुन को वह दिव्यद रिष्टी दी जिसे देवता भी तरस्ते हैं।
00:16और अचानक श्री कृष्ण ने अपना असली ब्रहमांडिये विराट रूप प्रकट किया।
00:21इस रूप में अनन्त मुख, अनन्त नेत्र और अस्त्रशस्त्र चमक रहे थे।
00:25उनके शरीर में समस्त ब्रहमांड, देवता और रिशी समाय हुए थे।
00:29पौरव सेना के सभी महारती उस अगनी में स्वतह जलते दिखे।
00:33अर्जुन इस भयंकर और असीम रूप को देखकर कांप उठे।
00:37उन्होंने हाथ जोड़कर इस भयंकर रूप को शांत करने की प्रार्थना की।
00:41अब भगवान ने अपने उस भयंकर रूप को समेट कर सौमे रूप धारन किया।
00:46यह रहस्य सिखाता है कि इस ब्रहमांड का हर कंड सिर्फ उसी की इच्छा से चलता है।
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