00:04ुद्ध भूमी में अर्जुन अपने ही सगे संबंधियों को देखकर पूरी तरह विचलित हो गए थे।
00:10अब धर्म की स्थापना के लिए जनार्दन श्री कृष्ण ने उन्हें गीता का दिव्य ज्यान दिया।
00:15किन्तु अर्जुन की शंकाओं को मिटाने के लिए भगवान ने अपनी माया का परदा हटाया।
00:20अचानक कुरुक्षेत्र का वह मैदान एक असीन ब्रहमांडी उर्जा में बदल गया।
00:25अर्जुन की साधारण आखें इस अलोकिक तेज को सेहन करने में असमर्थ थी।
00:30अचानक की तब भगवान ने अर्जुन को दिव्य द्रिश्टी प्रदान की, जिससे वे ब्रहमांड को देख सकें।
00:52अथ्भभवान का यह विराट रूप ही इस स्रिश्टी की रचना, पालन और सहार का अंतिन सत्य है।
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