00:28Hindi cinema
00:34ुस्वर्णिन दौर में, जहां हर मुस्कान के पीछे एक अधूरा इश्क छुपा था।
01:00वही साल 1973 में आई जन्जीर ने अमिताब बच्चन को इंगरी यंग मैन बना दिया।
01:07और उसी साल अमिताब और जया भादूरी की शादी ने उन्हें फिल्मी दुनिया का सबसे चर्चित जोडा बना दिया।
01:15लेकिन साल 1976 में आई फिल्म दो अंजाने में पहली बार रेखा और अमिताब एक साथ हाए और वही से
01:23शुरू हुई एक ऐसी कहानी जो आज भी सिर्फ देखी नहीं जाती, महसूस की जाती है।
01:30आखिर क्या था इनमें ऐसा जिसने उन्हें समय से भी बड़ा बना दिया।
02:00मैजजीन के कवर पर सिर्फ वही दो चहरे थे। और इसी बीच यश चोपड़ा एक ऐसा फैसला लेने वाले थे
02:08जिसने आग मेगी का काम कर दिया।
02:12उन्होंने अमिताब, जया और रेखा तीनों को एक साथ फिल्म सिलसिला में कास्ट कर लिया।
02:19सोचिए असली जिन्दगी के तीनों किरदार एक ही कहानी में। ये हिम्मत सिर्फ यश चोपड़ा ही कर सकते थे।
02:28अगर आप भी उस स्वर्णिन दौर के किस्सों को दिल से महसूस करते हैं, तो वीडियो को लाइक और शेर
02:35जरूर करें।
02:36कमेंट में बताएं आप रेखा की कौन सी फिल्म को सबसे ज्यादा पसंद करते हैं।
02:43अब आता है वो पल जिसने सब को चौका दिया।
02:48साल 1980, रिशी कपूर और नीतू सिह की शादी का रिसेप्शन।
02:54रेखा वहां पहुची, मांग में गहरा सिंदूर, गले में मंगल सूत्र।
02:59पूरे हॉल में सननाट आचा गया।
03:02सबकी नजरें सिर्फ रेखा पर थी।
03:05किसी ने पूछा भी, तो रेखा मुस्कुरा कर टाल गई।
03:09उन्होंने कभी नहीं कहा कि ये सिंदूर किसके नाम का है।
03:14लेकिन उसी समय से ये सवाल आज तक जिन्दा है, क्या ये अमिताब के लिए एक खामोश इजहार था।
03:22या दुनिया को दिया गया एक जवाब।
03:25भारतिय सिनेमा की अमर धरोहर हैं ये कहानिया क्योंकि इन में जवाब से ज्यादा खामोशी बोलती है।
03:38सिलसिला के बाद अमिताब ने एक फैसला लिया।
03:42उन्होंने तै कि वे रेखा के साथ अब कोई फिल्म नहीं करेंगे।
03:47साल 1981 के बाद दोनों कभी एक साथ परदे पर नहीं दिखे।
03:54एक तरफ अमिताब ने अपने परिवार को चुना तो दूसरी तरफ रेखाने।
04:00अकेले रहना चुना।
04:01उन्होंने शादी नहीं की।
04:04एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था
04:06मेरे पास प्यार की कमी नहीं, मुझे किसी नाम की जरूरत नहीं।
04:12आज भी उनकी फिल्में सिर्फ देखी नहीं जाती, महसूस की जाती हैं।
04:18क्योंकि उनकी आँखों में आज भी वही अधूरापन दिखता है, जो 40 साल पहले था।
04:24और यही अधूरापन उन्हें सबसे अलग, सबसे बिमिसाल बनाता है।
04:31यह केवल एक प्रेम कहानी नहीं थी, बलकि हिंदी सिनेमा के स्वर्णिन दौर का वो अध्याय बन गई, जिसे हर
04:38कोई अपने तरीके से याद करता है।
04:42रेखा ने प्यार को पाकर नहीं, निभा कर अमर कर दिया।
04:46आपको क्या लगता है देखा का यह वैसना सही था।
04:51कमेट में जरूर बताएं।
04:53और अगर आपको यह कहानी पसंद आएगो, तो वीडियो को लाइप और शेयर जरूर करें।
04:59ऐसी ही अंकही गाहानियों के लिए बॉली मीजन ओफिशल को सब्सक्राइब करना न भूलें।