Skip to playerSkip to main content
  • 5 months ago
ट्रेजेडी क्वीन मीना कुमारी—एक ऐसा नाम, जिसने अपने दर्द, संवेदनशील अभिनय और अद्भुत शायरी से भारतीय सिनेमा में अमिट छाप छोड़ी। इस वीडियो में जानिए मीना कुमारी का संघर्षपूर्ण बचपन, फिल्मों में उनका सफर, कमाल अमरोही से विवाह, अधूरी मोहब्बत, शायरी, Filmfare Awards, पाकीज़ा की कहानी और उनके जीवन के आख़िरी दिनों की भावुक दास्तान।
अगर आप पुराने बॉलीवुड, हिंदी सिनेमा के स्वर्णिम दौर और महान कलाकारों की अनकही कहानियाँ पसंद करते हैं, तो यह वीडियो आपके लिए है।
💐 इस वीडियो में आप जानेंगे:
✔️ मीना कुमारी का बचपन और संघर्ष
✔️ ट्रेजेडी क्वीन बनने की कहानी
✔️ कमाल अमरोही से विवाह और निजी जीवन
✔️ मीना कुमारी की शायरी और दर्द
✔️ Filmfare Awards और रिकॉर्ड
✔️ पाकीज़ा की अनकही कहानी
✔️ आख़िरी दिन और अमर विरासत
यदि वीडियो पसंद आए तो Like, Comment, Share करें और Bollymeezon को Subscribe करना न भूलें।

Category

🎈
Fun
Transcript
00:08४ुछ कलाकार अभिनय करते हैं ४ुछ किरदार निभाते हैं ४ुछ ऐसे भी होते हैं जो अपने दर्द को ही कला
00:19बना देते हैं
00:21हिंदी सिनेमा के इतिहास में एक ऐसा नाम है जिसकी आखों में छुपा दर्द आज भी लाकों दिलों को छूजाता
00:29है
00:30उन्हें दुनिया ने ट्रेजेडी क्वीन कहा लेकिन उनके भीतर एक शायरा, एक प्रेमिका और एक बेहद अकेली स्त्री भी थी
00:39यह कहानी है मीना कुमारी की
00:48एक अगस्त 1933 को मुंबई में जन्मी महजबी बानों आगे चलकर मीना कुमारी बनी
00:54घर की आर्थिक स्थिती मजबूत नहीं थी
00:58कहा जाता है कि बहुत छोटी उम्र में ही उन्हें फिल्मों में काम करना पड़ा
01:04जिस उम्र में बच्चे खिलोनों से खेलते हैं
01:08उस उम्र में महजबी कैमरे की रोशनी के सामने खड़ी थी
01:13धीरे धीरे बाल कलाकार से वे हिंदी फिल्मों की नाईका बन गई
01:221952 में आई फिल्म बैजू बाबरा ने मीना कुमारी की किस्मत बदल दी
01:28दर्शकों ने पहली बार महसूस किया कि यह अभिनेत्री केवल सुन्दर नहीं
01:34बलकि भावनाओं की अद्भुत कलाकार है
01:381924 में उन्हें पहला फिल्म फेर बेस्ट आग्प्रेस पुरसकार मिला
01:43और इसी के साथ शुरू हुआ एक स्वर्णिन सफर
01:53मुझे चोटी बूबू ते सथे बहुत के सबसे बड़ी ताकत थी
02:01चिंता सन्यम प्रसाद रखते हैं उनके सांगे
02:06हमारे यह शुदा दुलाल का प्रसाद ही और पुरा सिनेमा और खामोश हो जाता था
02:11उनके चेहरे की उदासी और आखों के लिए कि बारे में मत शर्माना है
02:17नहीं तो बुरा मानूं दिमागा
02:20और वो सप्तान साथ अहां है
02:22नाम लाँ प्रसाद आपने नहीं करती थी
02:24वह किर्दार को जीती थी
02:28उनकी सबसे बड़ी ताकत थी
02:30वह कि अपने दोस्तों के साथ चला गया
02:32यह वह जबद़ दोस्ति अपने साथ ले गए
02:33सिर्फ नजरे जुका लेती थी
02:37और पूरे सिनेमा और खामोश हो जाता था
02:41उनके चेहरे की उदासी और आखों की नवी
02:45तंबादों से कहीं ज्यादा असर करती थी
02:52गच फिल्म निर्देशत, पठकता लेखत और उर्दू कवी कमाल अमरोही उनका असली नाम सेयद अमीर हैदर कमाल नकवी से विवाह
03:01किया
03:01शुरुआत में यह रिष्टा बेहत खुबसूरत था
03:05लेकिन समय के साथ दूरिया बढ़ती गई
03:10शोहरत तो मिली
03:11मगर सुकून नहीं
03:14यहीं से शुरू हुआ वह अकेलापन
03:17जो जीवन धर उनका पीछा करता रहा
03:22आइना भी अब सवाल करता है
03:24चहरे पर यह मलाल क्यों है
03:26मैं हस तो देती हूँ दुनिया के लिए
03:29पर अंदर इतना बवाल क्यों है
03:38बहुत कम लोग जानते हैं कि मीना कुमारी एक बहतरीन शायरा भी थी
03:44वे नाज नाम से शायरी लिखा करती थी
03:48उनकी नस्मों में दर्ग, तनहाई और अधोरी मोहबबत की छलक साफ दिखाई देती है
03:55तनहाई ने आज फिर दस्तक दी है
03:57मैंने चुपचाप दर्वाजा खोल दिया
04:05पाकीजा केवल एक फिल्म नहीं थी
04:08वह मीना कुमारी का सपना थी
04:12फिल्म कई वर्षों तक बन दी रही
04:15जब यह रिलीज हुई
04:16तब तक बीमारी उनके शरीर को कमजोर कर चुकी थी
04:21लिवर सिरोसिस ने उन्हें घेड लिया था
04:2431 मार्च 1972 को
04:28महस 38 वर्ष की उम्र में
04:31भारतिय सिनेमा की यह अमर कलाकार दुनिया को अलविदा कह गई
04:40मीना कुमारी आज हमारे बीच नहीं है
04:45लेकिन उनकी आवास
04:47उनकी शायरी
04:49और उनके किरदार
04:51आज भी जीवित है
04:53वह सिर्फ प्रेजडी क्वीन नहीं थी
04:56वह भारतिय सिनेमा की संबेदंशील आत्मा थी
05:01मीना कुमारी को हमारी विनमर श्रगधांजली
05:04मीना कुमारी केवल दर्शकों की ही नहीं
05:08बलकि फिल्म समीक्षकों की भी चहेती अभिनेत्री थी
05:12उनके असाधारण अभिनय को कई प्रतिष्ठित पुरसकारों से सम्मानिक किया गया
05:18साल 1954 में फिल्म बैजू बावरा के लिए
05:22उन्हें फिल्म फेर बेस्ट अक्ट्रेस का पहला पुरसकार मिला
05:25इसके साथ ही वे फिल्म फेर बेस्ट अक्ट्रेस पुरसकार जीतने वाली पहली अभिनेत्री बन गई
05:32इसके बाद परी नीता, साहिब बीबी और गुलाम तथा काजल जैसी फिल्मों के लिए भी उन्होंने सर्वश्रिष्ट अभिनेत्री का फिल्म
05:42फेर अबोर्ड अपने नाम किया
05:44लेकिन उनके नाम एक ऐसा रिकॉर्ड भी दर्स है, जिसे आज तक बॉलिबुड इतिहास में बड़े सम्मान से याद किया
05:52जाता है
05:53साल 1963 के फिल्म फेर अबोर्ड में बेस्ट अक्ट्रेस श्रेणी के तीनों नामांकन केबल मीना कुमारी के थे
06:00साहिब बीबी और गुलाम आरती और मैं चुप रहूंगी
06:05यहाँ उपलब्धी आज भी भारतिय सिनेमा के इतिहास की सबसे दुर्लब उपलब्धियों में तिनी जाती है
06:14यह सम्मान इस बात का प्रमाण है कि उस दौर में अभिनय की दुनिया में मीना कुमारी का कोई सानी
06:20नहीं था
06:27Unhomne Shoharat Dekhi
06:29Unhomne Mohabbat Dekhi
06:31Unhomne Tandhai Dekhi
06:34Lekin In Sabke Veech Unhomne Duniyahko Aisah Abhinay Diyah
06:39Jisay Bhulana Namunkin Hai
06:41Aaj Bhi Jab Unki Aakho Me Chhipa Dard Pardae Par Dikhai Deta Hai
06:46Toh Lagtas Hai Maanon Sumayi Thheher Gaya Ho
06:49Meena Kumari Chalhi Gai
06:52Lekin Unhaki Muskan, Unhaki Shairi
06:55Or Unhaki Adakari Hemesha Zinda Rahe Ghi
06:59Prajedi Queen Ko Shakshak Naman

Recommended