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  • 11 minutes ago
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने जनता के भरोसे को न्यायपालिका की सबसे बड़ी ताकत बताया है. उन्होंने कहा कि अदालतों की वैधता सिर्फ फैसले से नहीं, बल्कि फैसला देने की निष्पक्ष प्रक्रिया से तय होती है. यानी मुकदमा हारने वाला व्यक्ति भी अगर यह महसूस करे कि उसके साथ निष्पक्ष व्यवहार हुआ है, तो न्यायपालिका पर उसका भरोसा कायम रहता है। CJI के मुताबिक, सिर्फ लोगों की पसंद के मुताबिक फैसला आना ही भरोसे का आधार नहीं है। भरोसा तब बनता है, जब फैसले की प्रक्रिया और उसके पीछे के कारण स्पष्ट हों. इसी संदर्भ में उन्होंने पारदर्शिता और रचनात्मक आलोचना को भी जरूरी बताया। उनका कहना है कि न्यायपालिका भी सूचनापूर्ण और रचनात्मक आलोचना से ऊपर नहीं है. CJI ने ये भी कहा कि अदालतों की जटिल प्रक्रिया कई बार लोगों को न्याय व्यवस्था से दूर महसूस करा सकती है. इसलिए पारदर्शिता सिर्फ खुली सुनवाई तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि फैसलों के पीछे के कारण भी लोगों के सामने होने चाहिए.

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00:30भरुसा तब बनता है जब फैसले की प्रक्रिया और उसकी पीछे के कारण श्फस्ट हों।
01:00के सामने होने चाहिए।
01:02उन्होंने भरुसे को ऐसी चीज बताया जिसे एक बार हासिल करके हमेशक के लिए कायम नहीं रखा जा सकता।
01:09इसे हर मामले और हर अनुभव के साथ लगातार कायम और मजबूत करना पड़ता है।
01:15Bureau Report, ETV भारत
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