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ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के बाद भू-राजनीतिक समीकरणों में एक नाटकीय बदलाव आया है जिसमें ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव पर एक बड़ा और निर्णायक मोड़ सामने आया है। इस बैठक के तुरंत बाद ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच एक महत्वपूर्ण उच्च-स्तरीय कूटनीतिक मुलाकात हुई जिसने अमेरिकी राजनीति और डोनाल्ड ट्रंप के खेमे में भारी खलबली मचा दी है। ब्रिक्स देशों के मजबूत समर्थन और मध्य पूर्व के देशों के बीच अचानक हुए इस कूटनीतिक मेल-मिलाप ने युद्ध के हालातों को पूरी तरह से पलटकर रख दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस नई धुरी और रणनीतिक समझौतों के कारण अमेरिका को अपनी पुरानी नीतियों पर फिर से विचार करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। संयुक्त अरब अमीरात की मध्यस्थता और क्षेत्रीय सहयोग के इस नए दौर ने ईरान के पक्ष को अंतरराष्ट्रीय मंच पर और अधिक मजबूत कर दिया है। ट्रंप प्रशासन के लिए इस स्थिति से निपटना एक बड़ी चुनौती बन गया है क्योंकि क्षेत्रीय देश अब अमेरिका के प्रभाव से बाहर निकलकर अपने स्वतंत्र फैसले ले रहे हैं। इस वीडियो में हम इसी पूरे घटनाक्रम के हर एक पहलू और इसके दूरगामी परिणामों का विस्तार से विश्लेषण करेंगे कि कैसे ब्रिक्स और खाड़ी देशों की यह रणनीतिक चाल आने वाले समय में वैश्विक राजनीति की तस्वीर हमेशा के लिए बदल देगी।

The recent BRICS summit has triggered a dramatic geopolitical shift, bringing a massive and decisive turn to the ongoing tensions between Iran and the United States. Immediately following these high-level international deliberations, a crucial diplomatic meeting took place between Iran and the United Arab Emirates, which completely shocked Donald Trump and his political camp in Washington. With robust backing from BRICS nations and a sudden diplomatic rapprochement among Middle Eastern countries, the impending threat and dynamics of the war have been radically altered. Experts believe that this new strategic axis and cooperation compel the United States to rethink its aggressive policies in the region. The mediation efforts and new wave of regional diplomacy by the UAE have significantly strengthened Iran’s diplomatic footing on the global stage. Managing this evolving landscape has become a major challenge for the Trump administration, as regional allies are increasingly making independent decisions away from American pressure. In this video, we provide an in-depth analysis of this entire sequence of events and its far-reaching consequences, exploring how this strategic move by BRICS and Gulf nations will permanently reshape global politics.

#BRICS #IranWar #DonaldTrump #UAE #MiddleEastPolitics #Geopolitics #IranUSRelations #GlobalNews

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00:00ब्रिक्स हम्मित दोहजार चब्श की समापती हो चुकी है और दुनिया के 55% पॉपुलेशन ने डेली डेक्लिरेशन को अडॉप्ट
00:08कर लिया
00:08लेकिन आज जैसे ग्लोबिल साउथ की बात हो रही थी सबका ध्यान लेकिन खीच लिया एरान और यूएई की बातचीत
00:17ने
00:17जी हाँ दरशको ये दो ऐसे देश जो एक दूसरे पर लगातार हमरे कर रहे हैं एरान ने यूएई का
00:25नाजाने कितना नुकसान करा दिया है चाहे वो टूरिजन की बात करे या इन्वेश्मेंट की बात करे
00:31मार्च के पहले हफ़ते से ही तना तनी चल रही है यूएई और इरान के बीच में लेकिन भारत के
00:39अंदर जब ये दोनों आमने सामने बैठे और पीस की बात की तो इसने सब को चौका दिया दरशको इसी
00:47विशे पर और चर्चा करने हमारे साथ मौजूद है
00:50मेजर जनरल अनुज मातुर जी साथ साथ ग्रूप कैप्टरन यूके देवनाजी भी मौजूद हैं सर आप दोनों को जेहंद और
00:57बहुत-बहुत स्वागत है हमारे इस कारिकरम में
01:00सर सबसे पहला ही सवाल आपसे मैं पूछूँगा मातुर साथ से ये सवाल पूछूँगा सर आज जो बात हुई है
01:08एरान और यूएई के बीच में इसका क्या मतलब है क्या अब मिडिल इस्ट के देश एक साथ आकर चीजों
01:17को डियेसकेलेट करना चाहते हैं
01:20जहिंद आकाश देखे बहुत साधानन सी बात है कि जो अमेरिका के उपर विश्वास था या जिस चीज़ को एक
01:30अमेरिका की अमेरिका द्वारा दी गई सिक्यूरिटी गारंटी माना जाता था वो गारंटी कहीना कहीं अभी थोड़े सी मिसिंग नजरा
01:37रही है वो लोगों
01:48के अन्य देश हैं वो पूरी तरह से अमेरिका से दूर नहीं हट सकते लेकिन उनको इस बात का पूरा
01:55यकिन हो गया है कि उनको अपना एक नया सिक्यूरिटी आर्किटेक्चर बनाने के आवश चकता है और वो सिक्यूरिटी आर्किटेक्चर
02:02बिना एरान के मेरी समझ से बन �
02:05नहीं सकता अब चुकि यह पात है तो वो यह बाइलिटर बातचीत करने का प्रयास इसी वे किया जा रहा
02:11है देखिए अगर आपको यादो कुछ दिनों पहले इसी फोरम का एक्सटरनल अफेर्स मिनिस्टर्स का एक एक एक बैठे कोई
02:19थी जिसमें के इन दोनों की वजा से एक
02:34दिल्ली में हुआ है वो भारत की कूटनी थी नरेंदर मोगी की कूटनी थी कि बहुत बड़ी मैं कहूंगा विजय
02:40है क्योंकि आपने इन दोनों को लाग करके पहली बात एक साथ दिल्ली में आमन तरण दिया और वो आए
02:49और उसके बाद दोनों की वन-उन बात्चीत करा द
03:03थे और बीच में वो मेडियेशन या जो शब्द है उसको मैं नहीं प्रयोग मिलाना चाता हूँ करने का प्रयास
03:09कर रहे थे लेकिन हमने फैसिलिटेट किया हमने दोनों को कन्विंस किया कि भई अभी जो मकसिद है बातचीत कर
03:17नतीजा कोई भी हो नतीजे की बात मैं नहीं क
03:32बहुत नुकसान किया है बहुत सारे पैसा जो उनके पास था उसको फ्रीज कर लिया है उनके कई क्योंकि बैंकिंग
03:38जो इरान की हो रही थी खास करके जो उनके शेड़ो फ्लीट वगरा की बैंकिंग वो सब यूए इसे इस
03:44दात हो रही थी तो उन्होंने भी उनको उतना ही
04:02बहुत बड़ी अर्किटेक्टिर की मैं बात कर रहा था, वो मुझे कहिना के बनता हुआ नजर आ रहा है, और
04:12इस वज़ा से आप देखिए, इसमें जो मेका पैक्ट की कंट्रीज हैं, वो भी देखिया आगया करके, कुछ न कुछ
04:19उसका निकल करके आएगा, ये बात हमको सम�
04:32बहुत अच्छे से सर पुट किया कि कैसे भारत ने जो फैसिलिटेशन दी है, इसी की वज़े से ग्लोबल डिप्लोमसी
04:38में हमारा नाम भी होगा, लेकिन देवनाच सर मैं अब आप से ये जानना चाहूंगा, कि जिस हिसाब से UAE
04:44भी डिएसकेलेट करने की बात कर रहा है, सा
04:59सिविलियन लोगों की जाने ना जाए, एनर्जी सिक्योरिटी सब के लिए बरकर आ रहे है, और ग्लोबल शिपिंग रूट्स, ग्लोबल
05:07ट्रेड रूट्स पर कोई असर ना पड़े, यानि एरान भी मान रहा है, UAE भी मान रहा है, तो क्या
05:13आप, शेट ओफ होर्मूस खुल
05:15जाएगा, क्योंकि ऐसा कुछ दिखतो रहा नहीं है, आज ही कभी बैबल मेंडेप पर फिर हुटीज ने हमला किया है,
05:21टैंकर फिर उड़ाया गया कल रात को, तो यह सर कहा जाता दिख रहा है यह सारी चीज़े आपको?
05:28आकर्श हो यह रहा है कि जब UAE बात करते हैं या साओधी अरविया बात करते हैं कि स्टेट ओफ
05:34हर्मूस खुल देना चाहिए, तो वहाँ चाहते हैं कि दुनिया बर से जितने टैंकर्स UAE गए हैं या साओधी गए
05:43हैं, जब वो भरके वापस जा रहे हैं, तो इरान उनको स
05:53से माना नहीं किया है, एरान ने कहा है जाओ, सिर्फ एरान इतना कह रहा है कि आप मुझे 48
06:02गंटे पहले बता दो, किस देश का टैंकर है, किस देश का जंडा होगा, कहां से आ रहा है, कहां
06:10जा रहा है, क्या लेके जा रहा है, एरान ने काफी शिप्स को इस तरह से जाने दि
06:22तो दिक्कत यह आ रही है कि कभी-कभी अमरीका की नेवी के भ्रह्म में आकर
06:29UAE का टैंकर, सौधी का टैंकर या कोई दूसरा देश का टैंकर
06:36अमरीका की नेवी कहते हैं जाओ-जाओ-जाओ, हम तुम्हें प्रोडेक्शन देंगे
06:43जाओ-जाओ-जाओ-जाओ-जाओ-जाओ-जाओ-जाओ-जाओ-जाओ-जाओ-जाओ-जाओ-जाओ-जाओ-जाओ-जाओ-जाओ-जाओ-जाओ
06:59-जाओ-जाओ-जाओ-जाओ-जाओ-जाओ-जाओ-जाओ-जाओ-जाओ-जाओ-जाओ-जाओ-जाओ-जाओ-जाओ-जाओ-�
07:08तो ऐसा नहीं है कि एरान सभी शिप्स को रोक रहा है हाँ शायद अभी तक उसका कोई प्रपच्छे परमान
07:18नहीं मिला दुनिया में काफी सारे पेश ऐसे हैं या काफी सारी शिपिंग कमपनिया ऐसे हैं जिन्होंने चुप-चाप अपने
07:26कैप्टन को बोल दिया है यार हम य
07:34इसको कहीं पर जमा कर देंगे जी हम काउं के किसी बैंक में जमा कर देंगे इरान को पता होता
07:40है कि हम काउं के फलाने बैंक में जमा हो गया या सिंगापूर के फलाने बैंक में जमा कर देंगे
07:45और वो उसका जो जैसे ही उसकी खबर मिलती है आया किसी को तो फिर उनका सारा
07:52एक्विशन क्लियर हो जाता ही, ठीक है जाओ, तो यहां पर शिपिंग लेन को रोग कहारा है, आकर्श, अमरीका ने
08:02तो फाइनली अमरीकन कॉंगरेस में यूएस नेदी को जब सवाल पूचा गया है, डेमोक्रेट्स दौरा, उनको कॉंगरेस में जाके बताना
08:09पड़ा कि अ�
08:15यानि 86 देश के जहाज हिंद मास अगर, अरब सागर होते हुए उमान भी खाड़ी पर पहुँचे, अंदर जाएंगे फूस्टेट
08:23फॉर्मूस से, तो यूस नेवी ने पूचा कहा जा रही हूँ, जैसे ही वो बोलता है कि वो इरान के
08:31किसी बंदरगाह में जा रहा है, तो
08:32उसको वापस कर देते हैं, और मैं आपको बताता हूँ, यह जे 86 जहाज हैं, इसमें से कम से कम
08:38तीन जहाज ऐसे हैं, जो कि भारत ने कॉंट्रेक्ट पे लिए हुए थे, भारत ये जहाज नहीं थे, लिकिन भारत
08:46में वेश्विक मेरिटाइम मार्केट से कॉंट्रेक्ट में
08:49लिए हुए थे, जैसे समझो पनामा का साइंड वेपन है, लेकिन जा रहा था वो भारत के लिए कच्छा ते
08:55लामने के लिए, और किस बंदरगा जा रहा था, इरान के बंदरगा को जा रहा था, तो यूएस नहीं थे
09:02नहीं उसको वापस बैच दिया, हमारे विदेश मंतरा
09:15को खबर दे दी थी, ओमान के मसकट में जो अमरीका की नेवी के नेवल अटेशी हैं, उनको पहले से
09:27हमारे डिफेंस अटेशी ने खबर दे दी थी मसकट में, कि फलाना फलाना जहाँ जा रहा है, पनामा रेस चाड़
09:34है, वो इंडियन कारगोश लेके आएगा, लेकिन फिर
09:47इरान से ज़्यादा, अमरीका की नेवी वहां कर्कियों कर रही है, जी अकश, जी सर बहुत बहुत बैतरीन तरीके से
09:55आपने समझाया कि कैसे अभी हाल फिलाल में क्या चल रहा है, पर सर अब अगला सवाल, ब्रिक्स क्योंकि खतम
10:02हो चुका है, मैं वापिस आओंगा, मेजर
10:05जनरल साब से पूछूँगा, सर सवाल ये है कि डॉनल्ड ट्रम्प हमेशा से ब्रिक्स के खिलाफ रहे है, पिछली बार
10:13भी उन्होंने कहा था कि ब्रिक्स इस डेड, कहा था कि टारिफ लगा दूगा, लेकिन इस बार ब्रिक्स के अंदर
10:20से ही जो आवाज निकली हो है, वो
10:33क्या ये इंडिया और अमेरिका के रिष्टों में खटास डाल सकती है? आकाश दिखे, मैं आपको थोड़ा सा इक्तिहास दिखाऊंगा,
10:42कि ये एक बड़ा फेमस टायलॉग कहा गया था ब्रिटिश एम्पायर के बारे में, कि the sun will never set
10:47on the British एम्पायर, हर उस एम्पायर का जो �
10:53दुनिया पर अपना प्रबूत वो जमाती है, उसका समय आता है, और मैं आपको बता सकता हूँ कि अमेरिका का
11:00समय आ चुका है, अमेरिका की जो बपोती थी, जो अमेरिका की दादा गिरी थी, वो डिकलाइन पर है, और
11:07उसमें आग में घी डालने का काम डोनल्ड ट्रम्प �
11:10ने किया है, आप देखिए कि जो ब्रिक्स की बात कर रहे हैं, ब्रिक्स से अमेरिका को परेशानी नहीं है,
11:18ब्रिक्स से अमेरिका को घवराहट है, उसके मैं आपको वज़ा बताता हूँ आका, देखिए, अमेरिका जब सोवेत संग का विगटन
11:26हुआ उनिस सो इकानवे में
11:28उसके बाद अमेरिका के पास एक बहुत बेहतरी मौका था
11:31कि वो पूरी विश्व को अच्छे से लीड करके और विश्व का लीडर बना रह सकता था
11:38और सब की यँ चीज को उन्होंने क्या प्रेफर किया कि लोगों को अतंकित करो
11:44लोगों को धमकाओ, लोगों को डराओ, एकनॉमिक टेररिजम मैंने कहा ये, एकनॉमिक टेररिजम करो, डॉलर को वैपनाइज करो
11:53और उन्होंने लीड करने की बज़ायद दुनिया पर नियंत्रण करना ज्यादा बेतर समझा
11:58और उस नियंत्रन की वज़ा से आगे आप देख रहे हैं कि ये जो फोरुम्स बन बन के उबर करके
12:04आ रहे हैं ये उसकी वज़ा है और एक और मैं आपको बता सकता हूं कि ये जो बना था
12:10गाराच से 25 वर्ष पहले उसकी वज़ा भी यही थी और अब उसको इस डॉलर टेररि�
12:18से इन्होंने और एक ऐसा जगे पहुंचा दिया कि अब उन्होंने एक टर्ल सिस्टम वहां पर लगाने की का इंडिश्चित
12:26रूप से डिसाइड कर लिया है आकाश इसका एक बहुत महत्वपूर्ण जो जो रिजल्टन निकल करके आया है इस ब्रिक
12:33समिट इस वाली ब्रिक
12:48वे ओवर हो गया है तो अब ये इसी वज़ासे अमेरिका को थोड़ी परेशानी हो रही है लेकिन वो जानते
12:53हैं वो भी समझते हैं उनको मिलिटरिली उनके जगे दिखा दी है एरान ने पश्च्चिमेशिया में उनको इनको यहां पर
13:03जिस प्रकार से इकनॉमिक ली जो न�
13:18चीज़ें इस बात को इस तरफ इशारा करती हैं कि टॉनल ट्रम्प को तकलीफ होना बिल्कुल निश्चित है और ये
13:26बात वो समझते हैं जानते हैं कि ये उनका समय इस प्रकार का आ चुका है अब वो टॉलर अभी
13:32भी बहुत ताकत्वर करंसी है आकाश के मानने की बात है �
13:35अमेरिका अभी भी एक बहुत बड़ी सामरिक और आर्थिक शक्ति है वर्ल्ड की ये भी बात हमको मानने की आवश्यक्ता
13:43है लेकिन लेकिन उनका टिकलाइन मुझे लगता है शुरू हो गया है और ये जो फोरम ब्रिक्स का बन किया
13:50रहा है देखिए आपके रेप्रेजें�
14:04तो हर प्रकार के लोग हर प्रकार के देश इसमें हैं पचास प्रतिशत पचपन प्रतिशत आपने खुद कहा थोड़ी देर
14:11पहले पचपन प्रतिशत आबादी को ये रेप्रेजेंट करते हैं और चालीस प्रतिशत जीडी भी को ये रेप्रेजेंट करते हैं ये
14:22बहुत भ
14:34का समिट नई दिल्ले में हुआ है भारत की कूटनीती की वज़े से इसने एक नया आयाम हासिल कर लिया
14:41है आकाश और जो इतना जबर्दस तहला कि चालिस पता नहीं कितने चावालिस पेज का एक एक साचा गोशना पत्र
14:49निकाला गया है उसकी सफलता भी देखा जाएगा कि आ
15:04अंतर राष्ट ये संस्थाओं में जो है वो जादा होना चाहिए और उसका सपोर्ट करना चीन जैसे देश का आतंकबाद
15:11पर भारत का का पक्षल अपने तरफ मानना और पहलगाओं का स्पेसिफिक मेंशन इस साजा गोशना पत्र में होना चीन
15:23का ये कहना कि भारत से और भ
15:34एक बहुत जबर्दस्ट कूट निटिक सफलता मैं कहूंगा नरे दिर मोधी और उनकी टीम की रही है और इससे ये
15:42बिकुल साफ हो करके नजर आ रहा है कि अब जो है विश्मु का जियो पुलिटिकल एंड जियो इकोनोमिक और
15:51पदली होने वाला है
16:04झाल
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