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  • 12 minutes ago
अजय मेहता ने पर्ल फार्मिंग के व्यवसाय को सच कर दिखाया है. अब तो अन्य किसान भी इसे अपना रहे हैं. रिपोर्ट- सरताज अहमद

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00:06बिहार शीप पालन कर मोती उत्पादन का हब बनने की राह पर है
00:11इसमें गया की रहने वाले अजे कुमार महता जैसे मोती उत्पादकों का योगदान एहम है
00:18But in the past few years, they were to be able to build a huge company.
00:22But as soon as they tried to build a contract or a new company,
00:29they used to invest in a company.
00:34But as soon as they got to the company,
00:36we ended up on a huge company for existing company to steal.
00:37We got to understand what we have to learn from the company.
00:41We have to keep the company from the company by doing the company.
00:44We have to keep the company from the company.
00:45We are doing the same thing.
00:45रखें उसमें औक्सीजन का व्यवास्ता कर रखें हैं और इसमें पहले हम 20 दिन
00:53से एक महीना रखते हैं मेरा रखे वए एक महीना हो गया पिछले साल तो पाच
00:58परसेंट डेड़ कर गया था लाते का साथ में लेकिन इस बर्स एक भी डेड़ नहीं
01:03then we take a nuclear cover to create a new nuclear cover,
01:08then we take a little bit of nuclear cover and create a channel for mettre in the nuclear cover.
01:20Then we take a nuclear cover and put it in a bit.
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02:00ुखिलस आता है, मार्केट में वो already ready made uplubs होता है, उसी को डालता है।
02:09उसमें layer by layer, देखें होंगे कि मोती में पियाज के छिलका के तरह layer by layer रहता है।
02:16उसी तरह से उस पर एक परत चढ़ते जाता है, परत दर परत चढ़ते जाता है।
02:27सीप पालन का पिछले 18 महिने का cycle होता है, अजय बताते हैं कि इस बार पिछले साल की तुलना
02:34में डबल उत्पादन कर रहे हैं, सरकार से भी अनुदान मिल रहा है।
02:39इसमार हम दो यूनिट कर रहे हैं, पिछला बार तो 2000 का यक यूनिट था, इस बार 4000 है, हमको
02:45इस बार सरकार के तरफ से भी अनुदान मिला है।
02:48पिछले किर्शी रोड मैप जब तो यार हो रहा था, तो हमें भी नभाइट किया गया था।
02:55पहला किर्शी रोड मैप में भी हम गये थे, इस दूसरा किर्शी रोड मैप में मेरे दुवारा मोती पालन के
03:00सबसीड़ी की मांग की गई थी, जिसको सरकार ने सुविकार किया, इसमें मिनुमम 80% भी अगर होता है, तो
03:09लगभग 32, शीप अगर बचता है, तो बती दुनी 64
03:13पीस मोती तयार होगा, तो अकल मार्केट में अगर हम इसको बेचेंगे तो 8 से 10 लाक रुपय मुनाफ़ा होगा,
03:20और अगर बीदेश में अगर हम इसको पहुंच बना लेते हैं बेचने का, तो लगभग 120 लाक से 130 लाक
03:28तक के फायदा हो सकता है, जो किसान मोती उत्पादन क
03:31करना चाहते हैं, उनको जानना चाहिए कि सरकारी अनुदान कैसे लिया जा सकता है, जिला मतस्य पदादिकारी पंकज कुमार विस्तार
03:40से बता रहे हैं,
04:01आमदनी अगर जादा हो जाती है, तो इनको देख करके और भी हमारे गये जिले के मतस्किर्शक जो है, वो
04:09इनको प्रभावित होंगे और ये मोती पालन का भी कार्ज करेंगे, इसमें बजार जो है, हम लोग अभी इसकी संभावना
04:16को ढूंड रहे हैं, देखते हैं, जिसना
04:18इनके द्वारा जो उत्पादित पदार्थ है, वो हम लोग कहां पे और कितना मैक्समम में इनको बेच सकते हैं, या
04:25बिचवा सकते हैं, ये हम प्रियास करेंगे कि इनको ज्यादा से ज्यादा इस छेतर में, मोती पालन के छेतर में
04:31ये आमदनी ला सके या कर सके।
04:33मुनाफे वाली मोती की खिती कर अजय कुमार महता जहां अच्छी कमाई कर रहे हैं, वहीं गया समय पूरे बिहार
04:41में मोती पालन की संभावना अब उज्जवल नजर आ रही है, जाहिर है मोती पालन एक सफल व्यवसाय बन रहा
04:49है, बशरते उसके लिए अच्छी ट्रेनिं�
04:52और पालन के दोरान जरूरी सावधानी बरती जाए, ETV भारत के लिए गया से सरताज एहमत की रिपोर्ट
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