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  • 5 minutes ago
भोपाल में रहने वाले नीव करौरी बाबा के पोते धनंजय शर्मा ने उनके साथ बिताए 14 साल की यादें साझा की. शिफाली पांडे की रिपोर्ट.

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Transcript
00:00नीव करोरी बाबा के पौत्र डॉक्टर धननजे शर्मा इस वक्त ETV भारत पर खास बातचीत के लिए मौजूद हैं।
00:08जब से फिल्म रिलीज हुई है हनुमान अंश उनके पास पांच मिनिट की भी फुरसत नहीं, लगातार कॉल्स आ रहे
00:14हैं, इंटर्व्यूज लिए जा रहे हैं, तो वैसे तो ये फिल्म आने के बाद दुनिया बाबा को अलग ढंग से
00:21जान रही हैं, पहले से भी जानती रही
00:22है, लेकिन एक पोते के नजर से, जब इतने फून कॉल्स आते हैं, आप किन यादों में जाते हैं अपने
00:29बाबा के साथ?
00:31मेरी यो बाबा का जो संग रहा है, वो बच्वन से लेके 13-14 साल तक का रहा है, उसके
00:40दोरान एक ऐसा प्यार पाया है उनसे, जिसको अभी भी याद करता हूं, तो बहुत अच्छा लगता है, मेरी जिद
00:48को जिस तरीके से वो पूरा करते से, अपने पास गले से लगा लेते
00:54से चाती से बहुत खुश होते थे तो हाथ पेर के बोलते थे तो धाक्तर मनेगा, उनके सपने को आपने
01:03पूरा किया, उनका आशरवात था, तो ये चीज़ें थी, एक वो अंग्रे जी का बहुत, मैं पढ़ता था, केंपियन स्कूल
01:16में पापाल में, तो अंग्रे जी बुल
01:21अंग्रे जी बाते थे, बक्त लोगों के सामने, बोलते थे कि देखो ये वान आती है, ये अंग्रे जी आनता
01:30है, इसे बात करो, इसे बात, तो वो लोग पूछ थे थे, बहुते जो नेम और ये आप हम जवाब
01:39दे थे, तो बड़ा चाहक हमार कहसते थे, देखा हमारा लला
01:45जो है, वो अंग्रे जी जानता है, एक आध्यात्म की रहाती और दूसरी तरफ उन्हें चिंता भी बहुत थी, एक
01:53वो किस्सा कि जब चेचक फैला हुआ था भारत में, और चुकि उनके विदेशी भी काफी सारे फॉलोर्स थे, तो
02:00कैसे उनको वो चिंता हुई कि चेचक ज
02:15है, वो इंडिया गूमने आए, नीचे बैठे हुगे थे, तो महाराजी की दस्ती गई, तो खड़ा करने इनको, फिर इनके
02:28दिमाग में क्या चल रहा था, वो बता दिये, फिर उसे ये पूशे हैं कि उसे बोले कि तेरा पिता
02:35जी ये थे, उनका ये हुआ, ये हुआ, पूर
02:44लग जाया है, क्योंकि पास्ट टेलिंग इस वेरी वेरी डिफिकल्ट, वो जब तक सिद्धिया नहीं होती हैं, तब तक नहीं
02:53बता सकता कोही भी, तो वो बहुत प्रभाबित हुआ है, और आके दोनों प्रति पत्नी पैरों पे किर गए, और
03:02तब से उनके साथ रहने लगे
03:06तो एक दिन बोलते हैं कि तुम हमाई देश से बड़ी चेचक को भगाओ, तो बोले महाराच कैसे भगे कि
03:14गो, बोले तु डाकता रहे, तु डबलु एचो में जा, डबलु एचो में अपना एपलाई करो, और भारत में पोस्टिंग
03:24करा के भगा दो, तो बोले ठीक है, बो
03:34यहां दिल नी में, महाँ चला जाओ, तो बोले जी महाराच चला जाओंगा, वो अपने सब का आगज वाज लेके,
03:43वो अलेडी डॉक्तर से, अमेर्का से पढ़े हुए डॉक्तर से, तो बोलु एचो में उन्हें, किसी ने भावी नहीं दिया,
03:52उनके का आगज वाज पढ़
03:55अब आपस कर देख जाओ, एक बहुत बढ़ी विलक्षन था थी, कि आप जो सोच के आ रहे हो ना,
04:03वो पहले ही बोल देखे घुस्तरी साथ, तो बोले जैसे वो उनके पास आए, बहुत नाराज हो रहा है, तो
04:12बहुत नाराज हो रहा है, तो उन्हें आपने नाराज जी ना
04:24कोई बाद ने है, कल तू फिर जाना वाई, अब सब हो जाएगा, तो बोले महाराज, पहले तो बेज़िती हो
04:33चुकी है, अब क्यार फिर जाओंगा, फिर भगा देंगे तो, नहीं नहीं मैं बोल जाओंगा, तो आदेश होता है पर
04:42तो, जाइस आप कहा है दोबारा तो फि
04:48पूरा परिदर्श ही बदल गया, जहाँ जहाँ हो गए, वहाँ वहाँ उनके कागच ओके होते रहे, और वहाँ उनको नोकरी
04:59मिल गई, और नोकरी के बाद जो और मिला उसमें उनको नेपाल और इंडिया का प्रभादी बना दिया गया, इसी
05:09बीट महाराज की देथ हो जात
05:18जब बन गया यहाँ पर तो उनने महाराजी का संकाल पूरा किया, इंडिया नेपाल से उन्होंने चेचक को अन्मूलन करा,
05:31जबकि आज तक अपना मीजल्स वगएरा का कहां अन्मूलन हो पा रहा है, चिकन पॉक्स भी आज नहीं हो पाई
05:38है, तो महाराजी की इस्ती बड़
05:48कि आपके पिता जी महाराजी की बाबा जी की अस्तियों को संभाल कर रखे रहें, उसके बाद आप संभाल कर
05:54रखे हुएं, कभी एक अश्ट होता है कि जो संकल्प था पिता जी का, कि एक आश्रम होगा जहां पर
06:02वो अस्तियां रखी जाएंगी, उसमें बहुत लंबा अंत
06:16We don't have to think about that.
06:20When we are doing the whole thing,
06:23we will do it.
06:23We are doing it.
06:24We are doing it.
06:24We are thinking about it.
06:25What is it?
06:26It is something we don't know.
06:35It is something we can't recognize.
06:38And when the day it will be,
06:39I will trust.
06:40I am taking a bath by myself.
06:43I will leave a bath that day.
06:45So what was going on?
06:50A good day, I have become an offer.
06:53One should be an offer.
06:56Since we lying here and we all sat in a house,
07:00I should have been sitting here in my house.
07:03And I should be sitting here in my eyes.
07:05Now, let me finish doing the hand in my hands.
07:08I don't have any doubts in this situation, I don't have any doubts in this situation.
07:17The last question, this film came, although it was a great gift from the father,
07:25but after that, your family came to Salim Light,
07:28and you also came to Salim Light, and you also came to Salim Light,
07:35and you also came to Salim Light.
07:39I don't know what to tell you.
07:42I can't say anything.
07:45There are some people in the house,
07:46who are the people who are living in the house,
07:49but whatever they are, they are not good.
07:51There is no one in the house.
07:54There is no matter where these guys are in the house,
07:58there are no people who will come out and stop children.
08:03The definition of theц.
08:07They are in the house,
08:17there was a kitchen, a kitchen, a camera, a man and a photo of a mother's father.
08:29This is a small house.
08:33So, that building of the trust was created by the building, and my father told me that
08:40that this place, which is not written in the trust of the deed,
08:46that it is also connected to it.
08:50So in this situation, I have no idea what is going on or what is going on.
08:54That's why we will go to the maharajji.
08:57What is your stand?
08:59No, there is no stand.
09:00In our case, the maharajji is working.
09:04That is the most important work.
09:07We should go to that.
09:08We should not interfere with this.
09:12We should do that.
09:14We should go to the maharajji's name.
09:16Thank you very much.
09:18Thank you very much.
09:20Cameraman Faizan Khan, Chifali, ETV, Bharat.
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