00:00सोचिए, एक छिपकली जैसी दिखने वाला जानवर आपके सामने बैठा है. आप उसे देखते हैं और कुछ ही देर बाद
00:07उसका रंग बदल जाता है. यही वज़े है कि गिरगिट को देखकर ज्यादा तर लोग सोचते हैं कि ये अपने
00:14आसपास के रंग में छिपने के लिए
00:16रंग बदलता है. लेकिन असली कहानी इस से कहीं ज्यादा दिल्चस्प है. गिरगिट हर बार सिर्फ छिपने के लिए अपना
00:23रंग नहीं बदलता. उसके शरीर का रंग, उसके मूड, गर्मी, रोशनी और दूसरे गिरगिटों के साथ उसके व्यवहार के हिसाब
00:32से भी ब�
00:36पर बैठा है, लेकिन उसे खत्रा दिखाई दे रहा है. उसे भागने की जरूरत नहीं पड़ती. उसकी आँखें ही उसे
00:43बहुत बड़ा फाइदा देती है. गिरगिट अपनी दोनों आँखों को अलग-अलग दिशा में घुमा सकता है. यानि एक आँख
00:51एक तरफ देख सक
01:05है. और फिर अचानक उसकी लंबी जीब इतनी तेजी से बाहर निकलती है कि शिकार को संभलने का मौका ही
01:12नहीं मिलता. और सबसे मज़ेदार बात, गिरगिट की जीब कई बार उसके शरीर से भी ज्यादा लंबी हो सकती है.
01:19लेकिन इतनी लंबी जीब को वापस मुह में खी
01:34नीचने में मदद करती है. और पेड़ पर चलते समय भी इसका शरीर कमाल का काम करता है. इसके पैर
01:41और पंजे डालियों को इस तरह पकड़ते हैं कि ये आसानी से फिसलता नहीं. यानि जिस जानवर को हम अकसर
01:48सिर्फ रंग बदलने की वजह से याद करते हैं, उसके पास द
02:04पैठा दिखाई दे. उसे सिर्फ रंग बदलने वाला जानवर मत समझेए. हो सकता है वो उसी समय आपको देख रहा
02:10हो.
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