कहीं 588 तो कहीं 3237 मतदाता, 60 वार्डों में अलग-अलग चुनावी गणितनए परिसीमन के बाद बदली वार्डों की तस्वीर बड़े वार्डों में सामाजिक समीकरण तो छोटे वार्डों में व्यक्तिगत संपर्क बनेगा जीत की कुंजी
सवाईमाधोपुर. नगरपरिषद चुनाव का मैदान अब धीरे-धीरे पूरी तरह सजने लगा है। प्रत्याशियों की नजर अब अपने-अपने वार्ड के मतदाता गणित पर टिक गई है। नए परिसीमन के बाद बदली वार्डों की सीमाओं ने चुनावी मुकाबले के समीकरण भी बदल दिए हैं। नगरपरिषद के 60 वार्डों में कहीं मतदाताओं की संख्या छह सौ के आसपास है तो कहीं यह आंकड़ा तीन हजार को पार कर गया है। ऐसे में हर वार्ड में चुनावी रणनीति भी अलग नजर आने वाली है।
नगरपरिषद क्षेत्र में कुल 92 हजार 713 मतदाता इस बार शहर की सरकार चुनेंगे। इनमें 47 हजार 998 पुरुष और 44 हजार 955 महिला मतदाता शामिल हैं। मतदाताओं की संख्या में वार्डवार बड़ा अंतर होने के कारण प्रत्याशियों के सामने भी अलग-अलग तरह की चुनौतियां हैं। बड़े वार्ड में अधिक मतदाताओं तक पहुंच बनाना जहां प्रत्याशियों के लिए चुनौती होगी, वहीं छोटे वार्डों में एक-एक परिवार और मतदाता से व्यक्तिगत संपर्क चुनाव का रुख बदल सकता है। वार्ड 60 सबसे बड़ा, 51 सबसे छोटा मतदाता संख्या के लिहाज से वार्ड 60 सबसे बड़ा वार्ड है। यहां कुल 3237 मतदाता हैं। इनमें 1696 पुरुष और 1541 महिला मतदाता हैं। दूसरी ओर वार्ड 51 में सबसे कम 588 मतदाता हैं। यहां 291 पुरुष और 297 महिला मतदाता हैं। यानी सबसे बड़े और सबसे छोटे वार्ड के बीच मतदाताओं की संख्या में पांच गुना से अधिक का अंतर है। यही अंतर प्रत्याशियों की चुनावी रणनीति को भी प्रभावित करेगा।
तीन हजार पार वाले वार्डों पर खास नजर
मतदाता संख्या के लिहाज से तीन हजार से अधिक मतदाताओं वाले वार्ड चुनावी दृष्टि से खास माने जा रहे हैं। इन वार्डों में प्रत्याशियों को घर-घर संपर्क के साथ अलग-अलग मोहल्लों और सामाजिक समूहों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करनी होगी। बड़े वार्डों में केवल व्यक्तिगत लोकप्रियता के सहारे चुनाव निकालना आसान नहीं होगा। यहां बूथवार प्रबंधन, मतदाता संपर्क और सामाजिक समीकरणों का असर अधिक दिखाई दे सकता है। वहीं, कम मतदाता संख्या वाले वार्डों में चुनाव का स्वरूप अलग होगा। ऐसे वार्डों में प्रत्याशी कम समय में अधिक मतदाताओं तक पहुंच बना सकते हैं। यहां व्यक्तिगत संबंध, परिवारों से संपर्क और स्थानीय मुद्दे चुनावी परिणाम पर बड़ा असर डाल सकते हैं। परिसीमन ने बढ़ाई दावेदारों की चिंता नए परिसीमन के बाद कई वार्डों की सीमाएं बदली हैं। इसका सीधा असर उन प्रत्याशियों पर पड़ रहा है, जो लंबे समय से अपने पुराने वार्ड में राजनीतिक जमीन तैयार किए हुए थे। सीमा बदलने के बाद अब उन्हें नए इलाकों और नए मतदाताओं के बीच भी अपनी पहचान मजबूत करनी होगी। यही कारण है कि प्रत्याशी अब मतदाता सूची के साथ वार्ड की भौगोलिक स्थिति और सामाजिक संरचना का भी आकलन करने में जुटे हैं।
महिला मतदाताओं की भूमिका भी अहम
कुल मतदाताओं में महिलाओं की संख्या भी काफी महत्वपूर्ण है। नगरपरिषद क्षेत्र में 44 हजार 955 महिला मतदाता हैं। ऐसे में महिला मतदाताओं का रुझान कई वार्डों में चुनावी परिणाम को प्रभावित कर सकता है। प्रत्याशी अब महिला मतदाताओं तक पहुंच बनाने के लिए अलग रणनीति तैयार कर रहे हैं। वार्डों में स्थानीय समस्याओं के साथ सड़क, पानी, सफाई, नाली, रोशनी और अन्य नागरिक सुविधाएं भी चुनावी चर्चा के केंद्र में आने लगी हैं। ...........................................
सबसे अधिक वोटर्स वाले पांच वार्ड वार्ड 60 में सर्वाधिक 3237 मतदाता (पुरूष1696, महिला1541) वार्ड 29 में 3188 मतदाता (पुरूष1701, महिला 1487)
वार्ड 9 में 2491 (पुरूष 1302, महिला 1189)
वार्ड 45 में 2437(पुरूष 1248, महिला 1189)
वार्ड 18 में 2323 (पुरूष 1140, महिला 1083)
सबसे कम वोटर्स वाले पांच वार्ड
वार्ड 51 में सबसे कम 588 मतदाता(पुरूष 291, महिला 297)