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  • 1 hour ago
भारत की स्पेस एजेंसी इसरो ने  मीडिया में चल रही कुछ ख़बरों पर अपनी सफाई दी है. भारतीय स्पेस एजेंसी ने कहा है कि उसका प्राइवेटाइजेशन यानी निजीकरण नहीं होगा या किसी तरह की कोई भूमिका भी कम नहीं होगी. मीडिया में पिछले कुछ दिनों से इसरो के निजीकरण का लोकर काफी ख़बरें चल रही थीं. कुछ रिपोर्ट्स में ऐसा कहा जा रहा था कि सरकार इसरो के मैन्युफैक्चरिंग और ऑपरेशनल काम निजी कंपनियों या पीएसयू को सौंप सकती है. मीडिया रिपोर्ट्स में IN-SPACe चेयरमैन पवन गोयनका के एक बयान का भी जिक्र हो रहा था, जिसमें उन्होंने कहा था कि आगे चलकर लॉन्च व्हीकल बनाने का काम प्राइवेट सेक्टर या पीएसयू करेंगे. 4 सितंबर 2026 यानी कुछ ही दिन पहले इसरो ने करीब आठ महीनों के एक लंबे गैप के बाद GSLV-F17 नाम के अपने एक महत्वपूर्ण रॉकेट के जरिए EOS-05 सैटेलाइट को सफलतापूर्वक ऑर्बिट में पहुंचाया. इस लॉन्च के बाद इसरो चीफ वी. नारायणन ने कहा कि देश की स्पेस इकोनॉमी और इकोसिस्टम को बढ़ना होगा क्योंकि अकेले इसरो देश की जरूरतों को पूरा नहीं कर सकता. उन्होंने बताया कि अभी 56 सैटेलाइट हैं लेकिन जरूरत सैकड़ों की है. उन्होंने ये भी कहा था कि सरकार के स्पेस सुधारों का मकसद उद्योग की भागीदारी बढ़ाना है और इसरो इसमें सहयोग दे रहा है.

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00:03इसरो के चेर्मेन वीनाराइण ने इसके नीजी करण को लेकर जताई जा रही चिंताओं को खारिच किया।
00:09उन्होंने कहा कि भारत के स्पेस एकोसिस्टम को बढ़ाने के लिए प्राइवेट कमपनियों और स्टार्टप्स के साथ मिल कर काम
00:15कर रहे हैं।
00:17भारत का स्पेस प्रोग्राम 64-65 साल पुराना है। अभी अंत्रिक्ष में 56 स्पेस एसेट्स हैं जो देश के आम
00:26लोगों की सेवा कर रहे हैं।
00:28लेकिन उनकी संख्यां बहुत ज्यादा बढ़ाने की ज़रुत है। हमें प्राइवेट स्टर और स्टार्टप कमपनियों का साथ देना है और
00:35स्पेस एकोसिस्टम को बढ़ाना है।
00:58साथ ही इस पष्ट किया कि इसरो का नीजी करण नहीं हो रहा है और ये एक सरकारी संगठन बना
01:03रहेगा।
01:36इसरो का ना तो कोई नीजी करण होगा और ना ही उसका महत्वकम होगा।
01:41EuroReport, ETV Bharat
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