पांच साल पहले पूर्व केंद्रीय कपड़ा मंत्री स्मृति ईरानी देश के 10 गांवों को क्राफ्ट हैंडलूम विलेज के तौर पर चुना था. इसमें गया का रामपुर गांव भी शामिल था. लोगों को बड़ी उम्मीदें थी कि उनकी बदहाली दूर होगी.. लेकिन अब इस गांव और गांव के बुनकरों की किस्मत बदलने की जगह बद से बदतर हो गई है. आज यहां के बुनकर केंद्र सरकार के दिये हैंडलूम, ताना मशीन और चरखे ग्रामीणों ने खोल कर रख दिए. क्राफ्ट विलेज के रूप में यह गांव विकसित नहीं हुआ. जो लोग सरकार के इस योजना से जुड़े वे कहीं के नहीं रहे.गांव के बुनकरों के पुराने रोजगार भी छूट गए और अच्छा खासा नया काम भी नहीं मिल रहा है.
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