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  • 24 minutes ago
शुरुआती निरीक्षण में कुआं करीब डेढ़ मीटर व्यास का और लगभग 20 से 22 फीट गहरा बताया गया

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01:41यह समभोता 2-500 साल पूर और आज यह परिशर में आप देख रहे हैं लेकिस्त सरचना के बराबर में
01:49यह पूरे प्रिशर के बाहर भी आपको ऐसे सरचना मिलेंगी क्योंकि सरचना
01:55ना कि ठीक ऊपर आप डिकोजीट ना कि ब्रीक के बार तो आपने चारों तरह पीस
02:06के बाहर भी आप देखेंगे इतनी सरचनाय के बास जब यह मिटी के खुदाइज होगी तो ऐसे मानुवी संस्क्रितों कर
02:13और उससे साब को दिखाई
02:25प्रशासन और विभार की उद्शियों पर आपने नभाई किया कितनी तोड़ाई नादर आई यह तक्रीबान सर्फेस से 20
02:35फीट की घहराई पर है तीन फीट इसका व्यास है और इसमें जो लाखवरी इंटे लगी है उसका रेशियो
02:42बीज दस और पांच सेंटीमीटर का है और इसके उपर आने के बाद तीन फीट की घहराई पर एक मोल्डेड
02:50ब्रिक का वह सरचना मिला है संभवत उस इट को काट करके बोला कार बनाया गया है
03:03कि यह हमारी इतिहास का पक्ष है वास्तुकला से आप सभी सुधी जन अच्छे से अवगत होंगे कि इतिहास में
03:13इटों का अपना एक कालकरम रहा है
03:15मौरे राजवन्स के जो इटे थी वह अलग थी गुप्त राजवन्स की अलग थी उसके फेस के बाद के अलग
03:21आई फिर पत्थरों के भी यूज हुए किलों में आने जगहों पर हम मद्य घंगा घाटी से विलॉंग करते हैं
03:28यहां आपकी मिट्टी इतनी सुटेवल है कि हम
03:30मिट्टी को इटो के इटो के अपने सरचना में ढाल सकते हैं तो बाद मद्यकाल में जो राजवन्सा है उन्होंने
03:36लाखोरी इट बनाई अंग्रेजों की समय आने के बाद गुंबा टाइप के मोटे इटे बड़े हो गए और वर्तमान समय
03:41की इटों साब करेंगे तो वह इ
04:00इतना हो चुका है यह कहीं से माइग्रेट करके लोग यहां पे आए यहां बसे उसको फील किये करने के
04:07बाद उकर जो नए सरचना बने वह उपर आपको चतुर्दिक दिखाई देंगे
04:17कि यह जो सरचना है लाइम मोटार से सुर्खी चुने से बना हुआ है उपर का तीन फीट का जो
04:25है उस पे लाइम प्लाश्टर है और कोई ऐसा सेंपल ले सेंपल अडेंटिफाइड करने के लिए प्रसासन ने हम लोग
04:34को बुलाया कि इसकी प्राचिंता क्या प्राचिंता य
04:39और जैसे मैंने बताया कि सहरानपूर का इतिहास अपने आप में बहुत सम्रीद है यह पैदिक पीरियट से बाद भी
04:45है और आपके इधर सरसामा बहुत सारे साइट है जो हरपन पीरियट से भी संबंदीत है तो इसका जो इतिहास
04:51क्रम हो और देखेंगे तो आज तब कईति
05:07हो सकती है कि वजूत का भी यहां पर ऐसे प्रमाण मिलते हैं ठीक है तक बता तो रहें ने
05:15बहुत सारे राजवनसों ने यहां पर सासन किया है जहां आया या उससे पहले जूंगल आये पराड़िक पाथाव में आपको
05:23वैदिक पिरियेट के भी साक्षियां पर मिलेंगे हर
05:37जहां का है कोई मंदिर हो सकता है यह जो पहले बात है कि यह जो सरचना मिली है एक
05:46यह परिशर है यहां पर इर्दगीर्द आपको कोई भवन दिखाई दिया ना कुछ ऐसा चीज़ लेकिन हमारे सामने एक कूप
05:53के जैसा एक खट मिला हुआ है समभवत हो कूप ही है लेकिन �
05:58इसके चतूरती तुरा जो आवास है इसीच को देखे तो मैंने पहले ही बताया कि तीन फीट का जो डिपॉजिट
06:03है अगर इसके नीचे का जो लेयर होरिजोंटल ही आप करेंगे तो ऐसे मानवी सच्छ आपको चारों तर दिखाई देंगा
06:16मैंने पहले ही बताया कि माननी नियाले के आदेश के करम में उसका अनुपानन हुआ है पुरा तत्विभाग जो प्रत्यक्ष
06:25आपको दिखाई दे रहा है कुप जैसा सद्रीश उसकी प्राचिंता के जाच के लिए हम यहां आए आज अपने गांग
06:35में और चाहे जहां
06:37से बिलॉंग करते हैं आप महां के कुंगों की स्थिति देख लीजिए कि आप में आज भी इन सीटू है
06:42आपको पानी दे रहे हैं बहुत सारे कुंगों की हाइट कम होती वह सुग गया है तो संभावता इसका भी
06:49वाटर लेवल डाउन हो गया होगा फिर उसके बाद जो जि
07:06कुछी दी कहां नहीं जा सकता संभावनाम इतिहास नहीं लिखा जाता है अब्जेक्टिव प्रशाशन और इसके जो उद्देश हैं उसके
07:15उपर निर्फर करता है अगल बगल एक्सक्वेट करके उसके आफंटिसिटी को पुस्ट किया जा सकते हैं तो लेकिन यह कि
07:35आप इ
07:36मैंने बताया कि सहरानपुर का इतिया समरीद थी और इसके अरवाचिन काल से आज तक मानवी संस्कृति के आवाज आपको
07:43काल क्रम में भुगर्व में संचीत मिलेंगे पहला मानव कैसा था उसके बात कैसा या उसके बात कैसा वो पूरे
07:50संचीत है जमीन में और यह हरप्प
08:02कि ने सीरिवत लाइम प्लाश्टर है
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