00:07आज के आधुनिक दौर में भी बस्तर में प्राचीन और पुरातन परंपराय अपने वजूद की एहमियत बता रही है नारायनपुर
00:15के मावली माता मंदिर में ऐसा ही एक पवित्र अनुष्ठान हुआ
00:20पांच दिनों तक चले इस धार्मिक अनुष्ठान में नियाय के देव भंगाराम की पूजा अर्चना हुई
00:27पांच दिवसिय पूजन के बाद देवता को विधी विधान से शहर की सीमा के बाहर ले जाकर विधा किया गया
00:34ऐसा माना जाता है कि बारिश के मौसम में होने वाली मौसमी बिमारियों के साथ भंगाराम देव किसानों की फसलों
00:42की रक्षा करते हैं
00:44किसानों के जीवन में हमेशा खुशाली और समरिध्धी आये इसे लेकर देवता के सामने इस्थानिय लोग हर साल मन्नते रखते
00:53हैं
01:32Thank you very much.
01:345 दिवसी अनुष्ठान के आखरी दिन नारायनपूर जिले के देव समिती के सदस्य, देव पुजारी और बड़ी संख्या में इस्थानी
01:43श्रद्धालू उपस्थित हुए.
01:44विशेश पूजान अर्चन कारिक्रम में नारायनपूर इस्थित माता शीतला मंदिर से सोन कुवर आंगा की भी विशेश उपस्थिती रही.
01:54संस्क्रेटी और यहां का इतिहास पूरी तरीके से यहां के आस्था और यहां के परमपराओं पर निर्भर करता है.
02:15बंगाराम जो देव हैं उनकी ऊपर में पूरी आयोजन है उसको किया जाता है और इसे ही बंगाराम विदाई के
02:21रूप में आज मना जा रहा है आज हम मौजूद है नारायनपूर के गडिया बाबा इस तल में और यहां
02:26पर हम जब पहुंचे तो यहां पर देखने को मिला ह
02:44पूजन अर्चन किया जा रहा है और उन्हें विभिनमान मनवल किया बता जाता है कि इसके संदर्व में हम जानेंगे
02:51कि क्या कुछ यह पूरा आयोजन होता है इसके संदर्व जानेंगा
03:08इसमें क्या है जैसे घर में बच्चों को संदी, खासी, दस, किसी को पोड़ा, पुर्शी, खुजली होता है
03:15खेतों में कीडा लगता है, गायवेलों को विमारी लगता है तो यह भंगाराम बाबाक पास दिन, साथ दिन बैट कर
03:21अचना करते हैं
03:34नगाडों की थाप और पारंपरिक धार्मिक वातावरन के बीच देव पुजारियों, जिने इस्थानी रूप से सराहा भी कहा जाता है
03:42उन्होंने इस धार्मिक यात्रा को आगे बढ़ाया
03:46पूरी परंपरा के अनुसार मन्नतों और चड़ावी के सामगरी को नारायनपुर शहर की सीमा के बाहर ले जाकर छोड़ दिया
03:54गया
03:54यही प्रक्रिया भंगाराम विदाई का सबसे महत्वकूल हिस्सा मानी जाती है
04:00जो भी दुख हरे गए हैं जो भी तकलीफ है उससे बचाने के लिए उन्हें धन्यवाद किया जाएगा
04:06यह कहीना कहीं एक प्रकार से बताता है कि आदिवासी संस्कृति और बस्तर की जो कला संस्कृति जो है
04:12वो कहीना कहीं इन चीजों पर निलफर करती है कि यहां पर किस प्रकार से यहां जो देवी देवता है
04:18और उन पर पूरी तरीके से आस्रित होती है
04:21यह देखने वाली जो कला संस्कृति है लगातार यहां पर जो लोग है वो पहुंच रहे हैं और अपनी आस्ता
04:28के सिर्थ चुका रहे हैं
04:29एटीवी भारत के लिया का सिंठा को ना रहे है
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