00:00आपको पता ही ना हो आपको बीमारी क्या है और आप जाकर दवाई की दुकान की सारी दवाईयां खा लें
00:05तो क्या होगा वो हम हैं कोई दवाई बता दो जो आपने नहीं आजमाई हो और क्यों इतनी आजमानी पढ़
00:14रहे हैं दवाईयां क्योंकि बीमारी नहीं पता है जब �
00:19हर दवाई आजमानी पड़ती है
00:21कितने लोग हैं जिनकी कोई बीमारी
00:23डाइग्नोज नहीं हो पा रही थी
00:24तो आट-दस तरह के अलग-अलग डॉक्टरों के पास गए
00:26होमियोपैथे की उना नी
00:28आयुरुवेदे की ये डॉक्टर वो डॉक्टर
00:29चलो दिल्ली चलते हैं, चलो यहां चलते हैं
00:32चलो विदेश भी दिखा लाते हैं
00:33कितनों के साथ हुआ है
00:34या कितने जानते हैं किसी के साथ ऐसा हुआ
00:38डाइगनोसिस ही नहीं हुआ है
00:40डाइगनोसिस मने
00:42ज्यान
00:44जानना की बात क्या है
00:47शारिरिक बीमारी में डाइगनोसिस के बाद उपचार होता है
00:51मानसिक बीमारी में डाइगनोसिस ही उपचार होता है
00:56शारिरिक बीमारी और मानसिक बीमारी दोनों में डाइगनोसिस
01:00बहुत जरूरी होता है
01:02परिक्षन
01:04बहुत जरूरी होता है दोनों में
01:07लेकिन शारीरिक में डाइगनॉसिस परयाप्त नहीं होता, डाइगनॉसिस हो जाता है फिर आप कहते हो, डाइगनॉसिस, प्रिस्क्रिप्शन, ट्रीटमेंट, प्रोग्नॉसिस, वहाँ
01:16पर यह चलता है, कि डाइगनॉसिस के बाद अब काम शुरू होगा, मानसिक भीमारी प
01:26कि क्या है मामला हो गया काम हो गया